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पर्यायवाची शब्द (Hindi Synonyms): 450+ महत्वपूर्ण शब्द, जाने कैसे याद करे? ट्रिक और अभ्यास प्रश्न, PDF

पर्यायवाची शब्द | synonyms | tricks | 100+ | PDF | अभ्यास प्रश्न

Table of Contents

पर्यायवाची शब्द भंडार चार्ट

पर्यायवाची शब्द (Paryayvachi Shabd): 150+ महत्वपूर्ण शब्द, याद करने की ट्रिक और अभ्यास सेट

पर्यायवाची शब्द किसे कहते हैं? (परिभाषा और अर्थ)

​हिंदी व्याकरण में पर्यायवाची शब्द उन शब्दों को कहा जाता है जिनके अर्थों में समानता होती है। सरल शब्दों में कहें तो, जब अलग-अलग शब्दों का अर्थ एक ही होता है, तो वे एक-दूसरे के पर्यायवाची कहलाते हैं।

शाब्दिक अर्थ:

‘पर्यायवाची’ शब्द दो शब्दों के मेल से बना है— ‘पर्याय’ (समान) + ‘वाची’ (बोला जाने वाला)। अर्थात, समान अर्थ में बोले जाने वाले शब्द।

विशेष नोट: हालांकि पर्यायवाची शब्दों के अर्थ समान होते हैं, लेकिन हर स्थान पर एक शब्द की जगह उसके पर्यायवाची का प्रयोग नहीं किया जा सकता। प्रत्येक शब्द की अपनी सूक्ष्म विशेषता और महत्व होता है।

उदाहरण के तौर पर:

  1. सूर्य: रवि, दिनकर, भास्कर, दिवाकर। (यहाँ इन चारों शब्दों का अर्थ ‘सूरज’ ही है)
  2. जल: नीर, पानी, वारि, तोय। (यहाँ ये सभी शब्द ‘पानी’ के ही समानार्थी हैं)

पर्यायवाची शब्द याद करने की “सीक्रेट ट्रिक”

​अक्सर छात्र सैकड़ों शब्दों को रटने की कोशिश करते हैं और परीक्षा के समय भूल जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि केवल “जल” के पर्यायवाची याद करके आप कमल, बादल और समुद्र के पर्यायवाची खुद बना सकते हैं?

​इसे “Suffix Magic” (प्रत्यय का जादू) कहते हैं। नीचे दी गई टेबल को ध्यान से देखें:

एक शब्द से तीन नए शब्द बनाने का तरीका :

मूल शब्द (जल)प्रत्यय जोड़ेंनया शब्द (अर्थ)उदाहरण
जल (नीर, वारि, तोय)‘ज’ (जन्म लेने वाला)कमलनीरज, वारिज, तोयज, अंबुज
जल (नीर, वारि, तोय)‘द’ (देने वाला)बादलनीरद, वारिद, तोयद, अंबुद
जल (नीर, वारि, तोय)‘धि’ (धारण करने वाला)समुद्रनीरधि, वारिधि, तोयधि, अंबुधि

ट्रिक को समझने के कुछ और उदाहरण : पर्यायवाची शब्द

​इसी तरह आप अन्य शब्दों के साथ भी संबंध जोड़कर याद रख सकते हैं:

  1. पुत्री और सूर्य के बीच संबंध: सूर्य के पर्यायवाची के पीछे ‘जा’ (पुत्री) या ‘तनया’ जोड़ने से यमुना के पर्यायवाची बन जाते हैं।
    • ​सूर्य + जा = सूर्यजा (यमुना)
    • ​अर्क + जा = अर्कजा (यमुना)
    • ​रवि + तनया = रवितनया (यमुना)
  2. रात और चंद्रमा के बीच संबंध: रात के पर्यायवाची के पीछे ‘कर’ या ‘ईश’ जोड़ने से चंद्रमा के पर्यायवाची बनते हैं।
    • ​निशा + कर = निशाकर
    • ​रजनी + ईश = रजनीश
    • ​राका + ईश = राकेश

. कामदेव के लिए ‘मार’ और ‘अनंग’ की ट्रिक:

इंद्रियों और मन से जुड़े शब्दों के पीछे ‘ज’ लगाने से कामदेव के शब्द बनते हैं।

  • ​मन + ज = मनोज
  • ​आत्म + ज = आत्मज (पुत्र के लिए भी प्रयोग होता है)
  • ​मनसि + ज = मनसिज

​(पर्यायवाची शब्द) समान मूल धातु पहचानना

​परीक्षा में जब कठिन शब्द आएँ, तो उनके अंत (Suffix) पर ध्यान दें। यह ट्रिक तुक्का लगाने में भी मदद करती है:

  • ‘पति’ या ‘ईश’ (स्वामी): यह अक्सर राजा, सेनापति या किसी देवता के लिए आता है।
    • ​नर + ईश = नरेश (राजा)
    • ​सुर + ईश = सुरेश (इंद्र – देवताओं का राजा)
  • ‘धर’ (धारण करने वाला): * भू + धर = भूधर (पर्वत – पृथ्वी को धारण करने वाला)
    • ​चक्र + धर = चक्रधर (विष्णु)
    • ​लंबोदर (लंबा + उदर) = गणेश

याद रखने का खास तरीका (Final Secret): पर्यायवाची शब्द

​हमेशा पर्यायवाची शब्दों को जोड़ों (Pairs) में याद करें। जैसे जब आप ‘आग’ याद करें, तो साथ में ‘हवा’ भी देखें, क्योंकि आग और हवा का संबंध है (अनिल – हवा, अनल – आग)। इससे भ्रम (Confusion) दूर होता है।

पर्यायवाची शब्दों का वर्गीकरण (Classification of hindi synonyms)

( पर्यायवाची शब्द)

पर्यायवाची शब्द वर्गीकरण चार्ट

पर्यायवाची शब्दों को श्रेणियों में बांटकर पढ़ना आसान रहता है।अतः हम पर्यायवाची शब्दों को निम्नलिखित श्रेणियों में विभाजित करेंगे –

  1. प्रकृति एवं ब्रह्मांड (Nature & Universe)
  2. देवी-देवता एवं पौराणिक पात्र (Deities & Mythology)
  3. जीव-जंतु और पशु-पक्षी (Animals, Birds & Insects)
  4. मानव शरीर और सामाजिक संबंध (Human Body & Relationships)
  5. मानवीय भावनाएं और अवस्थाएं (Emotions & States)
  6. वस्तुएं और अन्य महत्वपूर्ण शब्द (Objects & Miscellaneous)
  7. विशेष कठिन एवं परीक्षा उपयोगी शब्द (Most Important Exam Words)

( पर्यायवाची शब्द )

पहली श्रेणी ‘प्रकृति एवं ब्रह्मांड’ के अंतर्गत आने वाले सबसे महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द यहाँ विस्तार से दिए गए हैं। इनमें उन सभी शब्दों को शामिल किया गया है जो अक्सर परीक्षाओं (REET, SI, SSC) में पूछे जाते हैं।

1. प्रकृति एवं ब्रह्मांड (Nature & Universe) पर्यायवाची शब्द

  • आकाश: नभ, गगन, अम्बर, व्योम, अनन्त, शून्य, तारापथ, अभ्र, अंतरिक्ष, खगोल।
  • पृथ्वी: धरा, भूमि, वसुधा, अवनि, मेदिनी, अचला, इला, उर्वी, क्षिति, वसुंधरा।
  • सूर्य: रवि, दिनकर, भास्कर, दिवाकर, भानु, आदित्य, मार्तण्ड, अंशुमाली, सविता, पतंग।
  • चंद्रमा: शशि, मयंक, राकेश, सुधांशु, इंदु, मृगांक, हिमांशु, कलाधर, निशाकर, सोम।
  • बादल: मेघ, जलद, वारिद, नीरद, पयोधर, घन, अंबुद, बलाहक, पयोध।
  • समुद्र: सागर, रत्नाकर, वारिधि, उदधि, नदीश, जलधि, सिंधु, पारावार, अब्धि, पयोधि।
  • नदी: सरिता, तटिनी, तरंगिणी, आपगा, निर्झरिणी, कूलंकषा, शैलजा, स्रोतस्विनी।
  • पर्वत: शैल, नग, गिरि, भूधर, अचल, महीधर, धरणीधर, शिखर, अद्रि।
  • वायु (हवा): पवन, समीर, अनिल, वात, मारुत, प्रकंपन, समीरण, बयार।
  • अग्नि (आग): पावक, अनल, हुताशन, कृशानु, दहन, वैश्वानर, ज्वाला, रोहिताश्व।
  • जल (पानी): नीर, वारि, अंबु, तोय, पय, सलिल, उदक, जीवन, मेघपुष्प।
  • वन (जंगल): कानन, विपिन, अरण्य, कांतार, अटवी, दाव।
  • रात: रात्रि, निशा, रजनी, विभावरी, यामिनी, तमी, शर्वरी, राका।
  • दिन: दिवस, वार, वासर, अहन्, दिवा।
  • तारा: नक्षत्र, उडु, तारक, नखत।
  • बिजली: चपला, चंचला, सौदामिनी, तड़ित, दामिनी, बिजली, घनवल्ली।
  • कमल: जलज, पंकज, नीरज, वारिज, सरोज, इंदीवर (नीला कमल), पुण्डरीक (सफेद कमल), कोकनद (लाल कमल), राजीव, अरविन्द, शतदल।
  • तालाब: सरोवर, जलाशय, सर, पुष्कर, तड़ाग, पद्माकर, हृद, सरसी।
  • झरना: प्रपात, निर्झर, स्रोत, उत्स, प्रस्त्रवण।
  • लहर: तरंग, वीचि, हिलोर, लहरी।
  • ओस: तुषार, कण, हिमसीकर, शबनम, ओसकण।
  • अंधेरा: तम, तिमिर, अंधकार, तमस, ध्वांत।
  • धूप: घाम, आतप, द्योत, प्रभा।
  • संसार: जगत, जग, विश्व, दुनिया, लोक, भव।
  • फूल: पुष्प, सुमन, कुसुम, प्रसून, पुहुप।
  • किनारा: तट, तीर, कूल, पुलिन, पर्यन्त।
  • मिट्टी: मृदा, मृत्तिका, रेणु, माटी।
  • पत्थर: पाषाण, पाहन, उपल, अश्म, प्रस्तर, शिला।
  • यमुना (नदी विशेष): कालिंदी, सूर्यजा, अर्कजा, रवितनया, कृष्णा, तरणि-तनूजा, भानुजा।
  • गंगा (नदी विशेष): भागीरथी, मंदाकिनी, सुरसरि, देवपगा, विष्णुपदी, त्रिपथगा, सुरधुनी।
  • भोर (सुबह): अरुणोदय, प्रभात, प्रातःकाल, उषा, तड़का, विहान।
  • संध्या (शाम): सायंकाल, गोधूलि, प्रदोष काल, दिनांत, सायं।
  • बगीचा: उपवन, वाटिका, उद्यान, निकुंज, फुलवारी, कुंज।
  • बर्फ: हिम, तुषार, तुहिन, नीहार।
  • गर्त (गड्ढा): खात, गड़हा, कोटर, विवर।
  • अमृत: पीयूष, सुधा, सोम, अमिय, सुरभोग।
  • विष (जहर): हलाहल, गरुल, कालकूट, जहर।
  • मार्ग (रास्ता): पथ, राह, डगर, मग, पंथ, बाट।
  • आँधी: अंधड़, प्रभंजन, महावात, झंझावात।
  • वर्षा: पावस, वृष्टि, मेहा, बरखा, चौमासा।
  • द्वीप: टापू, अंतरीप, द्वीप, यजमान।
  • घास: दूर्वा, दूब, तृण, कुश, शाद।
  • भ्रमर (भँवरा – प्रकृति का हिस्सा): अलि, मधुकर, मधुप, चंचरीक, द्विरेफ, मिलिंद, सिलिमुख।
  • मृग (हिरण): सारंग, कुरंग, कृष्णसार, चमरी, वातप्रमी।
  • पेड़ (वृक्ष): तरु, विटप, पादप, द्रुम, दरख्त, शाखी, आगम।
  • लता (बेल): वल्लरी, वल्ली, लतिका, प्रतान।
  • पल्लव (कोमल पत्ता): किसलय, कोपल, नवपल्लव, पात।
  • भूकंप: भूचाल, महिकंप, कंपन, जलजला।
  • अन्तरिक्ष: खगोल, नभमण्डल, गगनमण्डल, शून्य।
  • किरण: रश्मि, मयूख, मरीचि, अंशु, कर, अर्चि, गो।
  • प्रकाश: आलोक, उजाला, दीप्ति, छवि, ज्योति, प्रभा।
  • पक्षी (नभचर): खग, विहग, पखेरू, नभचर, द्विज, अण्डज, शकुनि।
  • तट (किनारा): कूल, पुलिन, तीर, कगार, तट।
  • मैदान: प्रांगण, परिसर, अहाता, थल।
  • दिशा: ककुभ, आशा, काष्ठा, दिक्।
  • भोर/प्रभात (सुबह): प्रत्यूष, ब्रह्ममुहूर्त, सवेरा, तड़का, अरुणोदय।
  • वन (जंगल): गहन, बीहड़, विटप (समूह), झाड़ी, झाड़-झंखाड़।
  • समुद्र के अन्य नाम: वारानिधि, सरित्पति (नदियों का स्वामी), पारावार, अर्णव, तोयनिधि।
  • पृथ्वी के प्राचीन नाम: अनन्ता, धात्री, रसा, क्षमा, कु, जगती।
  • वायु (हवा) के सूक्ष्म नाम: प्रवात, मरुत, नभप्राण, गंधवह (खुशबू ले जाने वाला)।
  • बिजली के विशेष नाम: शम्पा, ऐरावती, क्षणप्रभा (क्षण भर के लिए चमकने वाली), कौंधा।
  • पहाड़ की चोटियाँ: कूट, श्रृंग, तुंग, शिखर।
  • ब्रह्मांड/आकाशमंडल: व्योममण्डल, अनंत, नभस्तल।
  • नदी के विशेष नाम: निम्नगा, कूलवती, धुन, तरंगिणी।
  • पत्ता (लीफ): दल, पर्ण, पत्र, पल्लव।
  • फूल के सूक्ष्म नाम: मंजरी, गुल, प्रसून।
  • ओले (Hail): करका, उपल, मेघपुष्प (कठोर)।
  • कीचड़ (Mud): पंक, कर्दम, चहला, गारा।

यहाँ देवी-देवता एवं पौराणिक पात्रों के समस्त महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द दिए गए हैं:

2. देवी-देवता एवं पौराणिक पात्र (Deities & Mythology) पर्यायवाची शब्द

  • गणेश: गजानन, लंबोदर, विनायक, एकदंत, गणाधिप, वक्रतुंड, गौरीसुत, मोदकप्रिय, मूषकवाहन, सिद्धिनायक, भालचंद्र।
  • शिव: महादेव, नीलकंठ, त्रिलोचन, शंभु, पशुपति, चंद्रशेखर, गिरीश, आदिदेव, कैलाशपति, रुद्र, महेश, पिनाकी।
  • विष्णु: जनार्दन, चक्रपाणि, नारायण, माधव, उपेंद्र, चतुर्भुज, पीतांबर, अच्युत, गरुड़ध्वज, लक्ष्मीपति, कमलनयन।
  • ब्रह्मा: आत्मभू, चतुरानन, पितामह, हिरण्यगर्भ, लोकेश, विधाता, सृष्टिकर्ता, प्रजापति, विरंचि, कमलासन।
  • इंद्र: सुरेश, देवेंद्र, देवराज, शचिपति, वासव, मघवा, पुरंदर, वज्रधर, सहस्राक्ष, सुरपति।
  • कृष्ण: वासुदेव, सारथि, मुरलीधर, माधव, गिरिधर, गोपीनाथ, श्याम, नंदलाल, चक्रधर, यदुनंदन।
  • राम: राघव, रघुपति, सीतापति, कौशल्यानंदन, दशरथनंदन, पुरुषोत्तम, रघुनंदन।
  • हनुमान: पवनसुत, बजरंगबली, महावीर, मारुति, अंजनीपुत्र, कपीश्वर, संकटमोचन, केसरीनंदन।
  • कामदेव: मनोज, मन्मथ, अनंग, पंचशर, रतिपति, कंदर्प, कुसुमेषु, प्रद्युम्न, मार, स्मर।
  • लक्ष्मी: रमा, कमला, चंचला, पद्मजा, हरप्रिया, सिंधुजा, इंदिरा, लोकमाता, क्षीरोदतनया।
  • सरस्वती: शारदा, वीणापाणि, वाणी, भारती, वागीश्वरी, महाश्वेता, ज्ञानदा, हंसवाहिनी।
  • दुर्गा: चंडी, भवानी, सिंहवाहिनी, कालिका, अष्टभुजी, नारायणी, महामाया, सुभद्रा।
  • पार्वती: उमा, गौरी, शिवा, गिरिजा, भवानी, शैलसुता, अंबिका, आर्या, सती।
  • यमराज: धर्मराज, कीनाश, शमन, अंतक, सूर्यपुत्र, दंडधर, पितृपति।
  • कुबेर: धनद, यक्षराज, धनाधिप, राजराज, किन्नेश।
  • कार्तिकेय (शिव के पुत्र): कुमार, स्कंद, षडानन (छह मुख वाले), मयूरवाहन, शक्तिधर, सरभव।
  • इंद्र (विशिष्ट नाम): बिडौजा, सुनासीर, जिष्णु, अमरपति, शतमन्यु, पुरुहूत, आखण्डल।
  • विष्णु (विशिष्ट नाम): विश्वम्भर, हृषीकेश, दामोदर, विधु, विभु, वनमाली, मुकुंद।
  • लक्ष्मी (दुर्लभ नाम): भार्गवी, श्री, हरिप्रिया, रमा, विष्णुपत्नी, पदमा, वारिजा।
  • कुबेर (धन के देवता): यक्षराज, अल्काधिपति, निधिश, वैश्रवण, एकपिंगल।
  • यमराज (मृत्यु के देवता): यम, काल, जीवितेश, यमुनाभ्राता (यमुना के भाई), रौद्र।
  • अश्विनी कुमार (देवताओं के वैद्य): नासत्य, दस्त्र, अश्विदेव।
  • गंगा (देवताओं की नदी के रूप में): सुरसरि, देवपगा, विष्णुपदी, सुरधुनी, जह्नुतनया।
  • यमुना (सूर्य पुत्री के रूप में): कालिंदी, अर्कजा, भानुजा, सूर्यतनया।
  • कामदेव (सूक्ष्म नाम): मनसिज, मीनकेतु, झषकेतु, कुसुमायुध, पंचबाण।
  • अग्नि (देवता के रूप में): जातवेदस, वैश्वानर, धनंजय, हव्यवाहन।
  • राक्षस (दैत्य): असुर, दनुज, निशाचर, रजनीचर, तमीचर, यातुधान, सुरारि (देवताओं के शत्रु)।
  • बलराम (कृष्ण के भाई): हलधर, बलभद्र, रेवतीरमण, मूसली, रोहिणेय (रोहिणी के पुत्र), संकर्षण।
  • अभिमन्यु: सौभद्र (सुभद्रा के पुत्र), फाल्गुनिपुत्र, कुरुनंदन।
  • अर्जुन: पार्थ, धनंजय, कौन्तेय, गुड़ाकेश (नींद को जीतने वाला), गांडीवधारी, सव्यसाची, कपिध्वज।
  • द्रौपदी: पांचाली, याज्ञसेनी (यज्ञ से जन्मी), कृष्णा, द्रुपदसुता, सैरंध्री।
  • सीता: वैदेही, जानकी, भूमिजा, मैथिली, जनकतनया, रामप्रिया।
  • राधा: वृषभानुजा, राधिका, ब्रज्रानी, कृष्णप्रिया, हरिप्रिया।
  • शनिदेव: कोणस्थ, पिंगल, बभ्रु, सौरि, मन्द, शनैश्चर।
  • नारद: देवर्षि, ब्रह्मपुत्र, कलहप्रिय (झगड़ा प्रिय), पारद।
  • गरुड़: खगेश, पन्नगारि (साँपों का शत्रु), वैनतेय, वातनेय, हरियान।
  • शेषनाग: धरणीधर, फणीश, सहस्रफण, अनन्त, अहिराज।
  • अश्विनी कुमार: नासत्य, दस्त्र, देववैद्य, अश्विद्वय।
  • असुर (विस्तृत): दनुज, दैत्य, राक्षस, तमीचर, निशाचर, यातुधान, सुरारि, मनुजाद।
  • कुबेर (विशिष्ट नाम): राजराज, श्रीद, किन्नरेश, वैश्रवण, एकपिंगल, गुह्यकेश्वर, निधिपति।
  • शनिदेव: छायामार्तण्ड (सूर्य और छाया के पुत्र), मन्द, शनैश्चर, सौरि, असित।
  • कार्तिकेय (विशेष): शरभ, विशाख, अंबिकेय, बाहुलेय, महासेन।
  • इंद्र की पत्नी (शचि): इंद्राणी, पुलोमजा, शक्रप्रिया, महेंद्रणी, पौलोमी।
  • इंद्र का हाथी/घोड़ा: ऐरावत (हाथी), उच्चैःश्रवा (घोड़ा)।
  • इंद्र का अस्त्र: पवि, वज्र, कुलिश, भिदुर, शतकोटि।
  • वरुण (जल के देवता): पाशी, प्रचेता, यादस्पति, अप्पति, वारिधि।
  • विश्वकर्मा (शिल्प देव): त्वष्टा, सुधन्वा, शिल्पी, विश्वकृत।
  • अश्विनी कुमार: दस्त्र, नासत्य, देववैद्य, वैश्रवण (कदाचित)।
  • कामदेव के बाण: पुष्पधन्वा, कुसुमबाण, पंचशर, अधम।
  • यमराज की दिशा/वाहन: दक्षिणपति (दक्षिण दिशा के स्वामी), महिषवाहन (भैंसे की सवारी)।
  • असुर (विशिष्ट): दितिज, शुक्रशिष्य (शुक्राचार्य के शिष्य), देवारि (देवताओं के शत्रु), कय्याद।

​यहाँ श्रेणी 3 के समस्त महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द विस्तार से दिए गए हैं:

3. जीव-जंतु और पशु-पक्षी (Animals & Birds) पर्यायवाची शब्द

  • सिंह (शेर): केसरी, वनराज, मृगेंद्र, शार्दूल, व्याघ्र, पंचमुख, केहरी, नखायुध, महावीर।
  • घोड़ा: अश्व, हय, बाजी, तुरंग, घोटक, सैंधव, रविपुत्र।
  • हाथी: गज, मतंग, कुंजर, हस्ती, द्विरद, करी, वारण, दंती, वितुण्ड।
  • साँप: सर्प, भुजंग, विषधर, व्याल, पन्नग, उरग, फणी, चक्षुश्रवा (आँखों से सुनने वाला)।
  • भ्रमर (भँवरा): अलि, मधुकर, मधुप, चंचरीक, द्विरेफ, मिलिंद, सिलिमुख।
  • कोयल: पिक, कोकिला, श्यामा, वनप्रिया, मदनशलाका, कलघोष।
  • मोर: मयूर, केकी, शिखी, नीलकंठ, कलापी, सारंग, ध्वजी।
  • मृग (हिरण): सारंग, कुरंग, कृष्णसार, चमरी, वातप्रमी।
  • पक्षी: खग, विहग, पखेरू, नभचर, द्विज, अण्डज, शकुनि।
  • गाय: गौ, धेनु, सुरभी, भद्रा, दोघी, पयस्विनी, गवि।
  • बंदर: कपि, वानर, मर्कट, कीश, शाखामृग, हरि।
  • मछली: मत्स्य, झष, मीन, जलजीवन, सफरी।
  • कुत्ता: श्वान, कुक्कुर, सुनक, सारमेय।
  • बिल्ली: मार्जार, विडाल, दीप्ताक्ष।
  • गधा: खर, गर्दभ, वैशाखनंदन, रासभ, धूसर, बेसर।
  • ऊँट: उष्ट्र, लंबोष्ठ, क्रमेलक, महाग्रीव।
  • हंस: मराल, मानसौक, कलहंस, सितपक्ष, श्वेतगरुत।
  • तोता: शुक, कीर, सुआ, सुग्गा, रक्ततुण्ड (लाल चोंच वाला), दाड़िमप्रिय (अनार जिसे प्रिय हो)।
  • कबूतर: कपोत, रक्तलोचन (लाल आँखों वाला), पारावत, कलरव, हारिल।
  • भैंस: महिषी, कासरी, सैरिभी, लुलापा।
  • चूहा: मूषक, मुसक, आखु, गणेशवाहन, इंदुर।
  • बगुला: वक, कंक, बलाका, तीरवासी।
  • मक्खी: मक्षिका, माछी, भिनभिनानी।
  • मधुमक्खी: भ्रामरी, मधुकर, मधुप, मधुमक्षिका।
  • बाज: श्येन, ससादन, कपोतारी (कबूतर का शत्रु)।
  • मेंढक: मंडूक, दादुर, भेक, वर्षाभू (वर्षा में उत्पन्न होने वाला), शालूर।
  • कछुआ: कूर्म, कच्छप, कमठ।
  • मगरमच्छ: नक्र, ग्राह, जलराज, कुम्भीर।
  • बाघ: व्याघ्र, शार्दूल, चित्रक (धारियों वाला)।
  • बकरा: अज, छाग, मेष, छैल।
  • भेड़: मेष, भेड़, उरण, गाडर।
  • उल्लू: लक्ष्मीवाहन, उलूक, कौशिका, निशिचर (रात में घूमने वाला), चुगद।
  • गीदड़: श्रृंगाल, सियार, जम्बुक, शिवाल।
  • कौआ: काक, वायस, एकाक्ष (एक आँख वाला), करठ, पिशुन।
  • नेवला: नकुल, सर्पारि (साँप का शत्रु), वत्साद।
  • तितली: चित्रपतंग, तितलिका, शलभ (कीट पतंग)।
  • बंदर (विशिष्ट): हरि, कीश, शाखामृग, मर्कट, लंगूर।
  • मधुमक्खी: सरघा, मधुमक्षिका, भ्रामरी।
  • बिच्छू: वृश्चिक, अलि, विषधं्र।
  • नरकंकाल/हड्डी: अस्थि, कंकाल, हड़।
  • छिपकली: गोधिका, विसतुल्या, मुसली।
  • जैकल (सियार): फेरु, श्रृंगाल, सियार।
  • शुतुरमुर्ग: उष्ट्रपक्षी।
  • गेंडा: खड्गी, गंडक।
  • जुगनू: खद्योत, प्रभाकीट, ज्योतिरिंगण।
  • मकड़ी: लूता, मर्कटक, तन्तुनाभ।
  • नेवला (विस्तृत): नकुल, सर्पारि, बभ्रु, शिव।
  • भैंस (विस्तृत): महिषी, कासरी, सैरिभी, लुलापा।
  • बछड़ा: वत्स, कलोल, औक्ष।
  • मुर्गा: ताम्रचूड़, अरुणशिखा, कुक्कुट, चरणायुध।
  • चींटी: पिपीलिका, सिमिका, लूता (कभी-कभी सूक्ष्म कीट के लिए प्रयोग होता है)।
  • मच्छर: मशक, डांस, मक्ष।
  • जुआं (Louse): यूका, केशाकीट।
  • शकरखोरा (Hummingbird): मधुपा, चंचरीक।
  • टिड्डी: शलभ, पतंग।
  • खटमल: मत्कुण, शय्याकीट।
  • दीमक: वम्री, श्वेतचींटी।

यहाँ मानव शरीर और सामाजिक संबंध के समस्त महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द विस्तार से दिए गए हैं:

4. मानव शरीर और सामाजिक संबंध (Human Body & Social Relationships) पर्यायवाची शब्द

A. मानव शरीर के अंग (Body Parts)

  • आँख: नयन, लोचन, चक्षु, दृग, अक्षि, अंबक, प्रेक्षण, चश्म, विलोचन।
  • हाथ: हस्त, कर, पाणि, भुजा, बाहु।
  • शरीर: तन, काया, देह, गात, वपु, कलेवर, बदन, अंग।
  • मुख: मुँह, आनन, वदन, वक्त्र, चेहरा।
  • कान: कर्ण, श्रवण, श्रोत्र, श्रुतिपटल।
  • दाँत: दशन, रद, रदन, द्विज, मुखक्षुर।
  • बाल: केश, कच, कुंतल, चिकुर, अलक, शिरोरूह।
  • खून (रक्त): लहू, रुधिर, शोणित, रक्त, लोहित।
  • हृदय: हिय, हिया, उर, वक्ष, मन, चित्त।

B. सामाजिक संबंध एवं व्यक्ति (Social Relations & People)

  • राजा: नृप, भूपति, महीप, नरेश, नरपाल, भूप, अवनीश, नृपति, महिपाल।
  • शत्रु: अरि, रिपु, वैरी, दुश्मन, विपक्षी, अराति, अमित्र।
  • स्त्री: नारी, वनिता, महिला, रमणी, कामिनी, प्रमदा, ललना, वामा, अबला।
  • पुत्र: तनय, सुत, बेटा, आत्मज, वत्स, नंदन, लाल।
  • पुत्री: तनया, सुता, बेटी, आत्मजा, दुहिता, नंदिनी।
  • माता: माँ, जननी, अंबा, धात्री, प्रसू, मैया, जन्मदात्री।
  • पिता: जनक, तात, जन्मदाता, पित्र, बाप।
  • पति: भरता, वल्लभ, स्वामी, आर्यपुत्र, कांत, ईश, प्राणनाथ।
  • पत्नी: भार्या, दारा, अर्धांगिनी, वामा, वामांगी, गृहणी, बहु, वधू, प्राणप्रिया।
  • मित्र: सखा, दोस्त, सहचर, सुहृद, मीत, साथी।
  • मनुष्य: मानव, मनुज, मानुष, इंसान, नर।

A. व्यक्तित्व और मानवीय गुण (Human Qualities & Status)

  • पंडित (विद्वान): सुधी, कोविद, बुध, धीर, मनीषी, प्राज्ञ, विचक्षण।
  • मूर्ख: अज्ञ, जड़, मूढ़, अज्ञानी, निर्बुद्धि।
  • चोर: तस्कर, दस्यु, रजनीचर, मोषक, कुंभिल, खनक, साहसिक।
  • दास (सेवक): भृत्य, किंकर, अनुचर, परिचारक, खादिम, चेला।
  • अतिथि: पाहुन, अभ्यागत, आगंतुक, मेहमान।
  • वृद्ध (बूढ़ा): जरठ, वयोवृद्ध, स्थविर, प्रवृद्ध।
  • युवती: किशोरी, तरुणी, श्यामा, नवयौवना।
  • पलक: निमेष, पक्ष्म, पलक, विलोचन-छद।
  • पसीना: स्वेद, पसीझ, श्रमवारि (मेहनत का पानी), श्रमसीकर।
  • भौं (Eyebrow): भ्रू, भृकुटी, त्यौरी, भ्रुकुटि।
  • हथेली: करतल, थपकी, चपेटा।
  • कंठ (गला): ग्रीवा, गला, शिरोधरा।
  • नाक: नासिका, नासिका, घ्राण, नथुने।
  • कोख (Garv): कुक्षी, उदर, जठर।
  • नाड़ी (Vein): शिरा, धमनी, नस, तंतु।
  • मस्तिष्क: मगज, भेजा, धी, बुद्धि-केंद्र।
  • हड्डी: अस्थि, कीकस, कंकाल।
  • पैर का तलवा: पदतल, पादतल, तलुवा।
  • पैर की उँगली: पद-अंगुलि।
  • हाथ की उँगली: अंगुलि, करशाखा।
  • ठोड़ी (Chin): चिबुक, हनु।
  • गर्दन की हड्डी: हँसली, अक्षक।
  • पुतली (Eyeball): कनीनिका, तारा, पुतलिका।
  • हथेली के पीछे का हिस्सा: करपृष्ठ।
  • पैर की एड़ी: पाणि, एड़ी।
  • रोम (Body Hair): लोम, रोंआ, तनुरुह।
  • गाल: कपोल, गाल।
  • नाक का छेद: नासारंध्र।

B. शरीर के अन्य विशिष्ट अंग (Specific Body Parts)

  • जीभ: रसना, रसज्ञा, जिव्हा, चंचला, रसिका।
  • पैर: पद, पाद, पाँव, डग, चरण।
  • नाखून: नख, करज, कररुह।
  • स्तन: कुच, पयोधर, उरोज, वक्षोज।
  • कमर: कटि, लंक, मध्यभाग।
  • कंधा: स्कंध, अंस।
  • हड्डी: अस्थि, कंकाल, हड़।
  • पड़ोसी: प्रतिवेशी, प्रातिवेशिक, सामंत (पुराने अर्थ में)।
  • वैद्य (Doctor): चिकित्सक, भिषक्, आयुर्वेदज्ञ, धन्वंतरि।
  • भाग्यशाली: धन्य, बड़भागी, सौभाग्यशाली, नियतिवान।
  • विधवा: अनाथा, पतिहीना, राँड (तद्भव), पतिशून्या।
  • विदुर (जिसकी पत्नी मर गई हो): पत्नीहीन, मृतभार्य।
  • साधु/संन्यासी: यति, त्यागी, विरक्त, दंडी, वैरागी, मुनि, भिक्षु।
  • मछुआरा: धीवर, केवट, जलजीवी, मत्स्यजीवी।
  • राजा (विशिष्ट): क्षितीश, चक्रवर्ती, शास्ता, अधिपति, दंडधर।
  • पुरोहित: कर्मकांडी, कुलगुरु, याजक, पुरोधा।
  • भक्त: उपासक, अर्चक, अनुरागी, सुधि।
  • दुश्मन (विशिष्ट): प्रतिपक्षी, अमित्र, अराति, शात्रव।
  • बाँझ (Infertility): वंध्या, अफला, निस्संतान।
  • सौत (Co-wife): सपत्नी, प्रतिद्वंद्वी (पारिवारिक अर्थ में)।
  • कुंवारी कन्या: कुमारी, अविवाहिता, अनूढ़ा, कन्या।
  • विवाहिता स्त्री: ऊढ़ा, परिणीता, वधू।
  • राजा (अत्यंत दुर्लभ): इन, विदु, कांत (कभी-कभी नायक हेतु), क्षितिपाल, नरदेव।
  • नौकरानी: दासी, परिचारिका, किंकरी, चेटी।
  • वेश्या: वारंगना, गणिका, रूपजीवा, पणिस्त्री, कसबी।
  • कुलटा (चरित्रहीन स्त्री): पुंश्चली, स्वैरिणी, असाध्वी।
  • दुष्ट (बुरा व्यक्ति): खल, पामर, नीच, दुर्जन, अधम, कुटिल।
  • सज्जन (अच्छा व्यक्ति): साधु, भद्र, सुजन, आर्य, शिष्ट।
  • पड़ोसी (शुद्ध तत्सम): प्रतिवासी, प्रतिवेशी।
  • यात्री: पंथी, बटोही, पथिक, मुसाफिर, राही।

C. अन्य सामाजिक संबंध (Other Social Relations)

  • भाई: भ्राता, सहोदर (एक ही पेट से जन्मा), तात, अनुज (छोटा भाई), अग्रज (बड़ा भाई)।
  • बहन: भगिनी, सहोदरा, दीदी, जीजी, स्वसा।
  • अध्यापक: गुरु, आचार्य, शिक्षक, प्रवक्ता, उपाध्याय।
  • शिष्य: छात्र, अंतेवासी (गुरु के समीप रहने वाला), शागिर्द, चेला।
  • स्वामी: प्रभु, ईश, नाथ, अधिपति, मालिक।
  • शिशु: अर्भक, बालक, वत्स, किशोर, छोकरा।
  • गर्भिणी: अंतर्वत्नी, गर्भाधान, पेट से।
  • मृतक: शव, लाश, मिट्टी, मृतदेह, पंचत्व।
  • अंधा: नेत्रहीन, चक्षुविहीन, प्रज्ञाचक्षु (सम्मानजनक शब्द), सूरदास।
  • बहरा: बधिर, श्रवणविहीन।
  • गूंगा: मूक, वाक्-विहीन।
  • लंगड़ा: पंगु, विकलांग (अब दिव्यांग), चरणहीन।
  • धनी: धनवान, समृद्ध, रईस, श्रीमान, संपन्न, अढ्य।
  • निर्धन (गरीब): अकिंचन, दरिद्र, कंगाल, दीन, रंक।
  • बाँझ स्त्री (दुर्लभ): वंध्या, शिखी, निष्फला।
  • गर्भवती: गर्भिणी, सत्ववंती, गुर्विणी, दोहदवती।
  • सुहागिन: सौभाग्यवती, सधवा, अविवाहिता (विपरीत)।
  • बौना (Short person): वामन, खर्व, नाटा।
  • गूंगा: मूक, अवाक, वाक्-रहित।

यहाँ मानवीय भावनाएं और अवस्थाएं के समस्त महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द विस्तार से दिए गए हैं:

5. मानवीय भावनाएं और अवस्थाएं (Emotions & States) पर्यायवाची शब्द

A. सकारात्मक भावनाएं (Positive Emotions)

  • प्रेम: स्नेह, प्यार, दुलार, प्रीति, अनुराग, अनुरक्ति, लाड़, प्रणय।
  • सुख: आनंद, हर्ष, प्रसन्नता, मोद, प्रमोद, उल्लास, आह्लाद, चैन, सुखद।
  • इच्छा: चाह, अभिलाषा, कामना, आकांक्षा, ईप्सा, मनोरथ, स्पृहा, लालसा, वांछा।
  • उत्साह: जोश, उमंग, हौसला, उबाल, सरगर्मी।
  • दया: करुणा, कृपा, अनुकंपा, संवेदना, सहानुभूति, रहम।
  • शांति: अमन, चैन, खामोशी, सुकूँ, नीरवता।
  • लज्जा (शर्म): हया, व़िडा, संकोच, लाज, ठिठक।
  • आश्चर्य: अचरज, विस्मय, अचम्भा, कौतूहल, हैरानी।
  • गर्व: गौरव, मान, बड़प्पन, स्वाभिमान (सकारात्मक), दर्प (नकारात्मक)।
  • धीरज: धैर्य, धीरता, संतोष, सब्र, तसल्ली, सहनशीलता।
  • विवशता: मजबूरी, बेबसी, लाचारी, लाचारी, परवशता।
  • उदारता: दरियादिली, दानशीलता, महानता, औदार्य, सहृदयता।
  • करुणा (गहरी दया): अनुकंपा, दया, रहम, संवेदना, सहानुभूति, कारुण्य।
  • असूया (दूसरों के गुणों में दोष निकालना): डाह, ईर्ष्या, मत्सर, जलन।
  • उदासीनता: विरक्ति, वैराग्य, तटस्थता, निस्पृहता, वीतराग।
  • मोह: ममता, आसक्ति, अनुराग, लगाव, ममत्व, मय।
  • उद्वेग (मानसिक हलचल): घबराहट, व्याकुलता, अशांति, क्षोभ, उथल-पुथल।

B. नकारात्मक भावनाएं (Negative Emotions)

  • क्रोध: गुस्सा, कोप, अमर्ष, रोष, तैश, कोह, प्रतिघात।
  • दुख: शोक, व्यथा, कष्ट, पीड़ा, संताप, खेद, यातना, क्लेश, यंत्रणा।
  • ईर्ष्या: जलन, डाह, कुढ़न, द्वेष, मत्सर, स्पर्द्धा (कभी-कभी नकारात्मक संदर्भ में)।
  • भय: डर, खौफ, त्रास, भीति, आतंक, दहशत।
  • घृणा: नफरत, जुगुप्सा, अरुचि, घिन, विरक्ति।
  • अहंकार: गर्व, दर्प, दंभ, मद, घमंड, मान, अभिमान।
  • तल्लीनता: एकाग्रता, मग्नता, ध्यानस्थ, लयबद्धता।
  • उदासीनता: वैराग्य, विरक्ति, अनासक्ति, तटस्थता, मंदी।
  • भ्रम: संशय, संदेह, दुविधा, शंका, व़ांति।
  • साहस: हिम्मत, दिलेरी, निर्भीकता, वीरता, प्रगल्भता।
  • ममता: स्नेह, वात्सल्य, मोह, ममत्व, लगाव।
  • विनय (नम्रता): नम्रता, शालीनता, शिष्टता, विनीत, हया।
  • पाप: अधर्म, अघ, पातक, दुष्कर्म, अपकर्म, कल्मष।
  • पुण्य: सुकृत, धर्म, पवित्रता, पावन, शुभ।
  • सत्य: यथार्थ, तथ्य, वास्तवािकता, ऋत (प्राचीन वैदिक शब्द)।
  • मिथ्या (झूठ): असत्य, अनृत, मृषा, अनर्गल, झूठा।

C. अवस्थाएं (States of Being)

  • अवस्था: दशा, स्थिति, हालत, दौर, परिस्थिति।
  • बुढ़ापा: वृद्धत्व, जरठता, जीर्णावस्था, जरावस्था।
  • जवानी: युवावस्था, यौवन, तारुण्य, निखार।
  • बचपन: बालपन, लड़कपन, बाल्यावस्था।
  • मृत्यु: निधन, देहावसान, पंचतत्व विलीन, निर्वाण, मोक्ष, अंत, मरण।
  • थकावट: थकान, क्लांति, श्रांति, थकावट।
  • बेचैनी: व्याकुलता, बेकली, उद्विग्नता, अशांति, तड़प।
  • स्वस्थ: नीरोग, तंदुरुस्त, चंगा, अक्षय, भला-चंगा।
  • बीमार: रुग्ण, व्याधिग्रस्त, अस्वस्थ, अस्वच्छ।
  • निद्रा: नींद, शयन, सुप्ति, तंद्रा (झपकी), सुुप्तावस्था।
  • जागरण: जागृति, चेतना, प्रबोध, जागरण।
  • उन्माद (पागलपन): विक्षिप्तता, पागलपन, जुनून, मतिभ्रम, सौदा।
  • मूर्च्छा (बेहोशी): बेहोशी, अचेतनावस्था, संज्ञाहीनता।
  • तृप्ति (संतोष): तुष्टि, संतुष्टि, तृषा-निवृत्ति, अघाना।

यहाँ श्रेणी 6 के समस्त महत्वपूर्ण पर्यायवाची शब्द विस्तार से दिए गए हैं:

6. विविध (Miscellaneous) पर्यायवाची शब्द

A. धातुएं और रत्न (Metals & Gems)

  • सोना: कंचन, कनक, स्वर्ण, हाटक, कुंदन, हेम, जातरूप, चामीकर।
  • चाँदी: रजत, रूपा, रूपक, रौप्य, चंद्रहास।
  • ताँबा: ताम्र, ताँबा, रक्तधातु।
  • लोहा: अयस, लौह, सार।
  • मणि: रत्न, रत्नजटित, माणिक्य, मुक्ता, हीरा।

B. वस्त्र और आभूषण (Clothes & Jewelry)

  • कपड़ा: वस्त्र, वसन, पट, चीर, अंबर, परिधान, कुचैल (पुराना)।
  • आभूषण: गहना, जेवर, अलंकार, भूषण, आभरण।

C. युद्ध और शस्त्र (War & Weapons)

  • युद्ध: रण, संग्राम, समर, विग्रह, लड़ाई, मोर्चा।
  • तलवार: असि, करवाल, चंद्रहास, खड्ग, कृपाण, शमशीर।
  • बाण (Arrow): तीर, शर, विशिख, शिलीमुख, इषु, नाराच।
  • धनुष: चाप, कोदंड, शरासन, पिनाक, सारंग, कमान।

D. शिक्षा और ज्ञान (Education & Knowledge)

  • ज्ञान: बोध, जानकारी, इल्म, बुद्धिमत्ता, प्रज्ञा।
  • किताब: पुस्तक, ग्रंथ, पोथी, विद्या।
  • शिक्षक: गुरु, आचार्य, उपाध्याय, अध्यापक।

E. अन्य महत्वपूर्ण शब्द (General)

  • अमृत: पीयूष, सुधा, सोम, अमिय, सुरभोग।
  • विष: जहर, हलाहल, गरुल, कालकूट।
  • झूठ: असत्य, मिथ्या, मृषा, अनृत।
  • सत्य: यथार्थ, तथ्य, ऋत, वास्तविक।
  • नगर: शहर, पुर, पुरी, पट्टन, नगरी।
  • रास्ता: मार्ग, पथ, राह, डगर, बाट, पंथ।

विविध (Part 2) पर्यायवाची शब्द

A. खाद्य पदार्थ और पेय (Food & Drinks)

  • अमृत: पीयूष, सुधा, अमिय, सोम, सुरभोग, शुभ्र।
  • दूध: दुग्ध, पय, क्षीर, गोरस, स्तन्य।
  • अन्न (अनाज): धान्य, गल्ला, दाना, शस्य।
  • घी: घृत, नवनीत (मक्खन हेतु भी), अमृतसार।
  • शहद: मधु, कुसुमासव, पुष्पासव, मकरंद।

B. प्रकाश और अंधकार (Light & Darkness)

  • प्रकाश: ज्योति, चमक, प्रभा, छवि, दीप्ति, आलोक, उजियारा।
  • अंधकार: तम, तिमिर, अंधेरा, ध्वान्त, तमस, अंधियारा।
  • किरण: रश्मि, मयूख, अंशु, कर, मरीचि, अर्चि।

C. समय और दिशा (Time & Directions)

  • समय: काल, वक्त, वेला, अवधि, समयावधि।
  • दिन: दिवस, वार, वासर, अह्न, दिवा।
  • रात: निशा, रात्रि, रैन, रजनी, यामिनी, विभावरी, क्षणदा, शर्वरी।
  • दिशा: ओर, तरफ, जानिब, दिक्, काष्ठा।

D. भवन और स्थान (Buildings & Places)

  • घर: गृह, सदन, आवास, निकेतन, शाला, निलय, आलय, गेह, निकेत।
  • महल: प्रासाद, राजभवन, हर्म्य।
  • झोपड़ी: कुटी, कुटिया, मड़वा, पर्णकुटी।
  • रास्ता: मार्ग, पथ, राह, डगर, बाट, पंथ, वीथी।

विविध (Part 3) पर्यायवाची शब्द

A. यात्रा और वाहन (Travel & Vehicles)

  • नाव: नौका, तरणि, जलयान, तरी, बेड़ा, डोंगी, पतंग।
  • झंडा (ध्वज): पताका, केतु, निशान, ध्वजा, वैजयंती।
  • रास्ता (विशिष्ट): पथ, डगर, बाट, मार्ग, आयन, वीथी (तंग गली)।

B. पेय और पदार्थ (Liquids & Substances)

  • मदिरा (शराब): सुरा, वारुणी, मद्य, हला (काव्य में), कादंबरी, मधु।
  • नमक: लवण, रामरस, लोण, नून।
  • आग (अग्नि): पावक, अनल, हुताशन, कृशानु, वैश्वानर, जातवेदस, दहन।
  • धुआँ: धूम, धूम्र, धूँआ।

C. अन्य संज्ञाएं (Miscellaneous Nouns)

  • तीर्थ: धाम, पुण्यस्थान, देवस्थान, तीर्थराज (प्रयाग हेतु)।
  • यश (कीर्ति): ख्याति, प्रतिष्ठा, नेकनामी, शोहरत।
  • मोक्ष: मुक्ति, निर्वाण, परमपद, कैवल्य, सद्गति, अपवर्ग।
  • संसार: जग, जगत, भव, लोक, दुनिया, विश्व, ब्रह्मांड।
  • सेना: चमू, अनीकिनी, वाहिनी, कटक, दल, फौज, लश्कर।

विविध (Final Part) पर्यायवाची शब्द

A. प्रकृति के कुछ सूक्ष्म तत्व

  • धूल (Dust): रेणु, रज, धूलि, मृत्तिका (मिट्टी हेतु), धूर।
  • कीचड़: पंक, कर्दम, चहला, गारा।
  • बर्फ: हिम, तुषार, नीहार, प्रालेय।
  • ओस: शबनम, तुहिन-कण, ओस-कण, मिहिका।

B. वस्तुएं और सामग्री

  • सोना (अति-दुर्लभ): हिरण्य, कर्त्तस्वर, कलधौत, महाधुति।
  • दूध (साहित्यिक): क्षीर, पीयूष (कभी-कभी अमृत के समान), स्तन्य।
  • दर्पण (शीशा): आरसी, आईना, मुकुर, प्रतिमान, आदर्श।
  • झंडा (दुर्लभ): वैजयंती, केतन, केतु, ध्वज, पताका।

C. कुछ विशेष संज्ञाएं

  • मदिरा (अन्य नाम): हाला, आसव, मद्य, सुरा, कादंबरी।
  • वृक्ष: तरु, द्रुम, पादप, विटप, अगम, गाछ।
  • छाया: छाँह, परछाईं, साया, प्रतिबिंब।
  • किरण (विस्तृत): अर्चि, मरीचि, मयूख, अंशु, रश्मि, कर।

D. समय के सूक्ष्म विभाजन

  • प्रातःकाल: भोर, प्रभात, अरुणोदय, तड़का, विहान।
  • संध्या: साँझ, गोधूलि, प्रदोष काल, दिनांत, सायंकाल।
  • दोपहर: मध्याह्न, मार्तंड-काल।

प्रतियोगी परीक्षाओं में बार-बार पूछे जाने वाले 50+ अति-महत्वपूर्ण पर्यायवाची ( परिक्षा ब्रह्मास्त्र)

पर्यायवाची शब्द अभ्यास प्रश्न और  प्रश्नावली एवं पीडीएफ चार्ट
क्र.सं.शब्दप्रमुख पर्यायवाची (जो परीक्षा में आते हैं)
1अग्निपावक, अनल, हुताशन, कृशानु, वैश्वानर
2अतिथिअभ्यागत, आगंतुक, पाहुन, मेहमान
3अमृतपीयूष, सुधा, अमिय, सोम, सुरभोग
4अश्वहय, बाजी, तुरंग, घोटक, सैंधव
5आकाशव्योम, शून्य, अनन्त, अंबर, नभ
6आँखदृग, लोचन, चक्षु, अक्षि, अंबक
7इच्छाअभिलाषा, आकांक्षा, ईप्सा, स्पृहा, वांछा
8इंद्रसुरपति, मघवा, शक्र, पुरंदर, देवराज
9कमलइंदीवर, पुण्डरीक, राजीव, सरोज, पंकज
10कपड़ावसन, अंबर, पट, परिधान, चीर
11कामदेवमनोज, कंदर्प, मार, अतनु, मन्मथ
12किरणरश्मि, मयूख, अंशु, मरीचि, कर
13कुबेरयक्षराज, धनद, किनरेश, राजराज
14गंगाभागीरथी, त्रिपथगा, सुरसरि, देवपगा
15गणेशविनायक, लंबोदर, गणाधिप, एकदंत
16घरनिकेतन, निलय, आलय, गेह, शाला
17चन्द्रमाशशांक, मृगांक, राकापति, हिमांशु, इंदु
18जलवारि, नीर, तोय, अंबु, सलिल
19जहर (विष)हलाहल, कालकूट, गरुल, विष
20तलवारअसि, करवाल, खड्ग, चंद्रहास, कृपाण
21तालाबजलाशय, सर, तड़ाग, पुष्कर, सरोवर
22दिनवासर, अह्न, वार, दिवस, दिवा
23देवताविबुध, निर्जर, गीर्वाण, सुर, अमर
24नदीसरिता, तटिनी, तरंगिणी, आपगा, निम्नगा
25नौकातरणी, तरी, जलयान, डोंगी, नाव
26पक्षीविहग, खग, पखेरू, परिंदा, द्विज
27पर्वतभूधर, अचल, महीधर, नग, शैल
28पवनसमीर, वात, मारुत, अनिल, प्रकम्पन
29पत्नीभार्या, दारा, अर्धांगिनी, वामा, कलत्र
30पुष्पकुसुम, सुमन, प्रसून, पुहुप
31पृथ्वीवसुंधरा, अचला, मही, इला, मेदिनी
32बाणशर, विशिख, शिलीमुख, इषु, नाराच
33बिजलीचपला, चंचला, दामिनी, तड़ित, क्षणप्रभा
34भ्रमरअलि, द्विरेफ, मधुकर, चंचरीक, सिलिमुख
35महादेवपशुपति, धूर्जटि, आशुतोष, हर, त्रिलोचन
36मछलीझष, मीन, मत्स्य, सफरी
37मेघवारिद, जीमूत, पयोधर, नीरद, अंबुद
38मोरमयूर, केकी, शिखी, नीलकंठ, कलापी
39यमराजकृतांत, जीवितेश, दंडधर, धर्मराज
40रात्रिविभावरी, रजनी, यामिनी, क्षणदा, त्रियामा
41राजानृप, भूप, महीप, नरेश, नरपाल
42लक्ष्मीरमा, कमला, भार्गवी, सिंधुसुता, हरिप्रिया
43विष्णुअच्युत, जनार्दन, चक्रपाणि, चतुर्भुज
44वृक्षविटप, द्रुम, तरु, पादप, साखी
45शत्रुअराति, रिपु, वैरी, अमित्र, अरि
46शेरशार्दूल, केसरी, मृगेंद्र, वनराज, पंचमुख
47समुद्रजलधि, उदधि, पारावार, रत्नाकर, वारिधि
48सरस्वतीशारदा, भारती, वीणापाणि, वागीशा
49साँपपन्नग, उरग, भुजंग, व्याल, फणी
50सूर्यमार्तण्ड, सविता, आदित्य, अर्क, अंशुमाली
51सोनाहाटक, हेम, जातरूप, कनक, हिरण्य
52हाथीद्विरद, कुंजर, मतंग, करी, वारण

कुछ कठिन शब्दों का विस्तार

1. अकिंचन (गरीब)

  • अर्थ: जिसके पास कुछ भी न हो।
  • विश्लेषण: यह ‘किंचन’ शब्द से बना है, जिसका अर्थ होता है “थोड़ा सा भी”। जिसके पास ‘थोड़ा सा भी’ कुछ न बचा हो, वह अकिंचन कहलाता है। दरिद्र से भी ऊपर की अवस्था को यह दर्शाता है।

2. चक्षुश्रवा (साँप)

  • अर्थ: आँखों से सुनने वाला।
  • विश्लेषण: ‘चक्षु’ का अर्थ है आँख और ‘श्रवा’ का अर्थ है सुनना। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार साँप के कान नहीं होते, वह अपनी आँखों से ही ध्वनियों के कंपन को महसूस करता है, इसलिए उसे चक्षुश्रवा कहते हैं।

3. द्विज (पक्षी, दाँत, ब्राह्मण)

  • अर्थ: जिसका जन्म दो बार हुआ हो।
  • विश्लेषण: * पक्षी: एक बार अंडे के रूप में, दूसरी बार अंडे से बाहर।
    • दाँत: एक बार दूध के दाँत, दूसरी बार स्थायी दाँत।
    • ब्राह्मण: एक बार गर्भ से जन्म, दूसरी बार उपनयन संस्कार (ज्ञान) के बाद जन्म।

4. पुण्डरीक और इंदीवर (कमल)

  • अर्थ: सफेद और नीला कमल।
  • विश्लेषण: अक्सर हम ‘कमल’ के लिए पंकज या सरोज याद करते हैं, लेकिन परीक्षा में रंगों के आधार पर पूछा जाता है:
    • पुण्डरीक: सफेद रंग का कमल।
    • इंदीवर: नीले रंग का कमल।
    • कोकनद: लाल रंग का कमल।

5. शशांक (चन्द्रमा)

  • अर्थ: जिसकी गोद में खरगोश हो।
  • विश्लेषण: ‘शश’ का अर्थ है खरगोश और ‘अंक’ का अर्थ है गोद। चन्द्रमा के भीतर जो काला धब्बा दिखाई देता है, प्राचीन कवियों ने उसे खरगोश की आकृति माना, इसलिए उसे शशांक कहा गया।

6. आशुतोष (भगवान शिव)

  • अर्थ: जो शीघ्र प्रसन्न हो जाए।
  • विश्लेषण: ‘आशु’ का अर्थ है शीघ्र (Fast) और ‘तोष’ का अर्थ है संतुष्ट या प्रसन्न होना। चूँकि शिव जी बहुत जल्दी मनोकामना पूरी करते हैं, इसलिए उन्हें आशुतोष कहते हैं।

7. वैशाखनंदन (गधा)

  • अर्थ: वैशाख के महीने में खुश रहने वाला।
  • विश्लेषण: यह एक व्यंग्यात्मक नाम है। कहा जाता है कि वैशाख (गर्मी) के महीने में जब घास सूख जाती है, तो गधा पीछे मुड़कर देखता है और उसे लगता है कि उसने सब चर लिया (मैदान साफ देखकर), इस भ्रम में वह खुश होकर मोटा हो जाता है।

8. गुड़ाकेश (अर्जुन)

  • अर्थ: नींद को जीतने वाला।
  • विश्लेषण: ‘गुड़ाका’ का अर्थ है नींद और ‘ईश’ का अर्थ है स्वामी। अर्जुन ने अपनी नींद पर विजय प्राप्त कर ली थी, इसलिए उनका एक नाम गुड़ाकेश पड़ा। (ध्यान रहे, शिव जी को भी गुड़ाकेश कहा जाता है)।

9. तितिक्षा (धैर्य/सहनशीलता)

  • अर्थ: दुख सहने की शक्ति।
  • विश्लेषण: प्रतिकूल परिस्थितियों में भी विचलित न होना और कष्टों को चुपचाप सह लेना तितिक्षा कहलाता है। यह ‘धैर्य’ का एक बहुत ही उच्च और कठिन स्तर है।

10. अभ्र (आकाश/बादल)

  • अर्थ: जो पानी न गिराए या जो चमकता हो।
  • विश्लेषण: संस्कृत में ‘भ्र’ का अर्थ चमकने से भी है। आकाश की शून्यता और बादलों की परत को अभ्र कहा जाता है। इसी से ‘अभ्रक’ (Mica) शब्द भी बना है।

11. वारिवाह (बादल)

  • अर्थ: जल को धारण करने वाला या ले जाने वाला।
  • विश्लेषण: ‘वारि’ का अर्थ है जल और ‘वाह’ का अर्थ है वाहन (ढोने वाला)। चूँकि बादल आकाश में जल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ढोकर ले जाते हैं, इसलिए उन्हें वारिवाह कहा जाता है।

12. पन्नगारि (गरुड़)

  • अर्थ: साँपों का शत्रु।
  • विश्लेषण: यह दो शब्दों से बना है: ‘पन्नग’ (साँप) + ‘अरि’ (शत्रु)। पौराणिक कथाओं के अनुसार गरुड़ और साँपों की स्वाभाविक शत्रुता है, इसलिए उन्हें पन्नगारि या खगेन्द्र (पक्षियों का राजा) कहते हैं।

13. अतनु (कामदेव)

  • अर्थ: जिसका शरीर न हो (अशरीरी)।
  • विश्लेषण: ‘अ’ (नहीं) + ‘तनु’ (शरीर)। कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने अपनी तीसरी आँख से कामदेव को भस्म कर दिया था, तब वे बिना शरीर के हो गए थे। इसीलिए कामदेव का एक नाम अतनु या अनंग है।

14. द्विरद (हाथी)

  • अर्थ: जिसके दो दाँत हों।
  • विश्लेषण: ‘द्वि’ (दो) + ‘रद’ (दाँत)। हाथी के बाहर निकले हुए दो बड़े दाँतों (गजदंत) के कारण इसे द्विरद कहा जाता है। इसी तरह इसे द्विप भी कहते हैं (दो बार पानी पीने वाला—एक बार सूँड में भरकर, फिर मुँह में डालकर)।

15. विभावरी (रात्रि)

  • अर्थ: तारों वाली चमकती रात।
  • विश्लेषण: ‘विभा’ का अर्थ है चमक या प्रकाश। ऐसी रात जो तारों के प्रकाश से चमक रही हो, उसे विभावरी कहते हैं। (प्रसिद्ध कविता है— “बीती विभावरी जाग री” )।

16. प्रज्ञाचक्षु (अंधा व्यक्ति)

  • अर्थ: जिसकी बुद्धि ही उसकी आँखें हों।
  • विश्लेषण: ‘प्रज्ञा’ (बुद्धि) + ‘चक्षु’ (आँख)। जो व्यक्ति शारीरिक रूप से देख नहीं सकता, वह अपनी बुद्धि और अंतर्दृष्टि से संसार को समझता है। यह अंधे व्यक्ति के लिए एक अत्यंत सम्मानजनक पर्यायवाची है।

17. पाथेय (रास्ते का भोजन/संबल)

  • अर्थ: मार्ग के लिए उपयोगी सामग्री।
  • विश्लेषण: ‘पथ’ (रास्ता) से बना शब्द है। पुराने समय में जब लोग लंबी यात्रा पर जाते थे, तो रास्ते के लिए जो भोजन या साधन साथ रखते थे, उसे पाथेय कहा जाता था। साहित्य में इसे “जीवन के अनुभवों” के संदर्भ में भी प्रयोग किया जाता है।

18. सिन्धुसुता (लक्ष्मी जी)

  • अर्थ: समुद्र की पुत्री।
  • विश्लेषण: ‘सिन्धु’ (समुद्र) + ‘सुता’ (पुत्री)। समुद्र मंथन के दौरान लक्ष्मी जी की उत्पत्ति समुद्र से हुई थी, इसलिए उन्हें सिन्धुसुता, सागरजा या क्षीरोदतनया कहा जाता है।

19. मार्तण्ड (सूर्य)

  • अर्थ: मृत अंडे से जन्मा (तेजपुंज)।
  • विश्लेषण: पौराणिक कथाओं के अनुसार, अदिति के मृत अंड (Egg) से उत्पन्न होने के कारण और बाद में प्रचंड तेज के साथ प्रकाशित होने के कारण सूर्य का नाम मार्तण्ड पड़ा। यह सूर्य के सबसे तेजस्वी रूप को दर्शाता है।

20. कलोल (बछड़ा या लहर)

  • अर्थ: उछल-कूद करने वाला।
  • विश्लेषण: इस शब्द का प्रयोग दो जगह होता है। पानी की छोटी लहरों की हलचल को भी कलोल कहते हैं और गाय के बछड़े की चंचलता के कारण उसे भी इस नाम से पुकारा जाता है।

21. शशधर और शशिधर (भ्रम दूर करने वाला युग्म)

  • शशधर (चन्द्रमा): ‘शश’ (खरगोश) को ‘धर’ (धारण करने वाला)। चन्द्रमा की गोद में खरगोश का चिह्न होने के कारण उसे शशधर कहते हैं।
  • शशिधर (शिव): ‘शशि’ (चन्द्रमा) को ‘धर’ (सिर पर धारण करने वाला)। शिव जी ने चन्द्रमा को अपने मस्तक पर स्थान दिया है, इसलिए वे शशिधर कहलाते हैं।

22. सरसिज (कमल)

  • अर्थ: तालाब में जन्म लेने वाला।
  • विश्लेषण: ‘सरसि’ (तालाब/सरोवर) + ‘ज’ (जन्मा)। यद्यपि ‘जलज’ और ‘पंकज’ सरल शब्द हैं, लेकिन सरसिज शब्द का प्रयोग उच्च स्तरीय कविताओं और परीक्षाओं में अधिक होता है।

23. उर्वी (पृथ्वी)

  • अर्थ: विस्तार वाली या विस्तृत।
  • विश्लेषण: यह ‘उरु’ शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है ‘विशाल’। पृथ्वी के असीमित विस्तार के कारण इसे उर्वी कहा जाता है। इसी से ‘उर्वर’ (उपजाऊ) शब्द भी निकला है।

24. रजनीचर (चोर, राक्षस, उल्लू)

  • अर्थ: रात में विचरण करने वाला।
  • विश्लेषण: ‘रजनी’ (रात) + ‘चर’ (चलने वाला)। यह एक अनेकार्थी शब्द है। जो भी अंधेरे का लाभ उठाकर सक्रिय होता है (चाहे वह चोर हो, उल्लू हो या पौराणिक राक्षस), उसे रजनीचर कहते हैं।

25. वैश्वानर (अग्नि)

  • अर्थ: जो समस्त विश्व के नर (प्राणियों) में विद्यमान हो।
  • विश्लेषण: ‘विश्व’ + ‘नर’। शास्त्रों के अनुसार, यह वह अग्नि है जो हर प्राणी के भीतर ‘जठराग्नि’ (पाचन शक्ति) के रूप में निवास करती है। अग्नि का यह नाम उसकी सर्वव्यापकता को दर्शाता है।

26. द्विरद और द्विप (हाथी)

  • द्विरद: जिसके दो ‘रद’ (दाँत) बाहर हों।
  • द्विप: जो दो बार पानी पीता हो। (हाथी पहले अपनी सूँड में पानी भरता है, फिर उसे मुँह में डालता है, इस ‘दो बार’ की प्रक्रिया के कारण उसे द्विप कहते हैं)।

27. कादम्बरी (मदिरा/सरस्वती/मैना)

  • अर्थ: मदमस्त करने वाली या विशेष ध्वनि वाली।
  • विश्लेषण: यह शब्द बहुत कठिन माना जाता है। साहित्य में कादम्बरी का अर्थ ‘मदिरा’ भी है और ‘कोयल’ या ‘मैना’ की मीठी आवाज़ भी। बाणभट्ट की प्रसिद्ध रचना का नाम भी यही है।

28. पुलोमजा (इन्द्राणी)

  • अर्थ: पुलोमा ऋषि की पुत्री।
  • विश्लेषण: इंद्र की पत्नी ‘शची’ का नाम पुलोमजा है क्योंकि वे पुलोमा दैत्य/ऋषि की पुत्री थीं। परीक्षाओं में ‘इन्द्राणी’ के सरल शब्दों के बजाय यह कठिन शब्द अक्सर पूछा जाता है।

29. शिलीमुख (भ्रमर/बाण)

  • अर्थ: पत्थर जैसा मुख या नुकीला सिरा।
  • विश्लेषण: यह एक रोचक शब्द है:
    • बाण: जिसका मुख पत्थर (शिल) जैसा कठोर और नुकीला हो।
    • भ्रमर (भँवरा): जिसका मुख फूलों को छेदने में सक्षम हो।

30. ऋत (सत्य)

  • अर्थ: ब्रह्मांड का शाश्वत नियम।
  • विश्लेषण: यह ‘सत्य’ का सबसे शुद्ध और प्राचीन वैदिक रूप है। ‘ऋत’ वह सत्य है जो बदला नहीं जा सकता (जैसे सूरज का पूर्व से निकलना)। इसी का विलोम ‘अनृत’ (झूठ) होता है।

31. अजा (बकरी/माया/अजन्मा)

  • अर्थ: जिसका जन्म न हुआ हो।
  • विश्लेषण: ‘अ’ (नहीं) + ‘जा’ (जन्मा)। आध्यात्मिक रूप से ‘माया’ को अजा कहा जाता है क्योंकि वह अनादि है। वहीं, व्यावहारिक भाषा में बकरी को भी अजा कहते हैं। (इसका पुल्लिंग ‘अज’ यानी बकरा या ब्रह्मा जी होता है)।

32. शिखंडी (मोर)

  • अर्थ: शिखा (कलगी) धारण करने वाला।
  • विश्लेषण: मोर के सिर पर जो सुंदर कलगी होती है, उसे ‘शिखा’ कहते हैं। इसी कारण मोर का एक नाम शिखंडी या शिखी पड़ा। महाभारत के पात्र ‘शिखंडी’ का नाम भी इसी विशेषता के कारण था।

33. कपाली (शिव)

  • अर्थ: हाथ में कपाल (खोपड़ी) धारण करने वाला।
  • विश्लेषण: तंत्र शास्त्र और पौराणिक कथाओं में शिव के ‘भैरव’ रूप का वर्णन है जो हाथ में कपाल धारण करते हैं। इसीलिए उन्हें कपाली या कपालभृत कहा जाता है।

34. द्विरदगामिनी (हाथी जैसी चाल वाली स्त्री)

  • अर्थ: जिसकी चाल में हाथी जैसी गरिमा और मस्तानी सादगी हो।
  • विश्लेषण: ‘द्विरद’ (हाथी) + ‘गामिनी’ (चलने वाली)। हिंदी साहित्य में सुंदर नायिका की चाल की तुलना हाथी की मस्त चाल से की जाती है, जिसे द्विरदगामिनी या गजगामिनी कहते हैं।

35. प्रस्तर (पत्थर)

  • अर्थ: फैला हुआ या कठोर तल।
  • विश्लेषण: यह ‘स्तृ’ धातु से बना है जिसका अर्थ है ‘फैला हुआ’। पहाड़ के फैले हुए कठोर हिस्सों को प्रस्तर कहा जाता है। इसी से तद्भव शब्द ‘पत्थर’ बना है। इसके अन्य कठिन पर्याय पाषाण, उपल और ग्रावा हैं।

36. कलधौत (सोना/चाँदी)

  • अर्थ: जो धोया गया हो या निर्मल हो।
  • विश्लेषण: ‘कल’ (सुंदर) + ‘धौत’ (धोया हुआ)। जो धातु धोने पर चमक उठे, उसे कलधौत कहते हैं। मुख्य रूप से यह सोने के लिए प्रयोग होता है, लेकिन कुछ स्थानों पर ‘चाँदी’ के लिए भी इसका उपयोग मिलता है।

37. निर्झरिणी (नदी)

  • अर्थ: झरनों से बनी हुई।
  • विश्लेषण: ‘निर्झर’ (झरना) से जो निकलती है, वह निर्झरिणी है। यह शब्द नदी की गतिशीलता और उसके उद्गम (Source) की सुंदरता को दर्शाता है।

38. सरसिज और मनसिज (तुलनात्मक अंतर)

  • सरसिज (कमल): ‘सरसि’ (तालाब) में जन्म लेने वाला।
  • मनसिज (कामदेव): ‘मन’ में जन्म लेने वाला। काम या इच्छा का जन्म मन में होता है, इसलिए कामदेव को मनसिज कहते हैं।

39. विहग और विहंगम (पक्षी)

  • अर्थ: आकाश में जाने वाला।
  • विश्लेषण: ‘विहायस’ (आकाश) + ‘गम’ (जाना)। जो शून्य या आकाश में गमन करे, वह विहग है। ‘विहंगम’ शब्द का प्रयोग अक्सर ‘विहंगम दृष्टि’ (Bird’s eye view) के लिए भी होता है, जिसका अर्थ है ऊँचाई से सब कुछ देख लेना।

40. आशुग (बाण/हवा)

  • अर्थ: तेज चलने वाला।
  • विश्लेषण: ‘आशु’ (शीघ्र) + ‘ग’ (गमन करने वाला)। जो बहुत तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, उसे आशुग कहते हैं। यह मुख्य रूप से बाण (Arrow) का पर्यायवाची है।

41. उर्वी (पृथ्वी)

  • अर्थ: विस्तृत या फैली हुई।
  • विश्लेषण: यह ‘उरु’ शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है ‘विशाल’। पृथ्वी के असीमित विस्तार के कारण इसे उर्वी कहा जाता है। इसी से ‘उर्वर’ (उपजाऊ) शब्द भी निकला है। इसके अन्य कठिन पर्याय इला, मेदिनी और अचला हैं।

42. रजनीचर (चोर, राक्षस, उल्लू)

  • अर्थ: रात में विचरण करने वाला।
  • विश्लेषण: ‘रजनी’ (रात) + ‘चर’ (चलने वाला)। यह एक अनेकार्थी शब्द है। जो भी अंधेरे का लाभ उठाकर सक्रिय होता है (चाहे वह चोर हो, उल्लू हो या पौराणिक राक्षस), उसे रजनीचर कहते हैं।

43. वैश्वानर (अग्नि)

  • अर्थ: जो समस्त विश्व के नर (प्राणियों) में विद्यमान हो।
  • विश्लेषण: ‘विश्व’ + ‘नर’। शास्त्रों के अनुसार, यह वह अग्नि है जो हर प्राणी के भीतर ‘जठराग्नि’ (पाचन शक्ति) के रूप में निवास करती है। अग्नि का यह नाम उसकी सर्वव्यापकता को दर्शाता है।

44. पुलोमजा (इन्द्राणी)

  • अर्थ: पुलोमा ऋषि की पुत्री।
  • विश्लेषण: इंद्र की पत्नी ‘शची’ का नाम पुलोमजा है क्योंकि वे पुलोमा दैत्य/ऋषि की पुत्री थीं। परीक्षाओं में ‘इन्द्राणी’ के सरल शब्दों के बजाय यह कठिन शब्द अक्सर पूछा जाता है।

45. शिलीमुख (भ्रमर/बाण)

  • अर्थ: पत्थर जैसा मुख या नुकीला सिरा।
  • विश्लेषण: यह एक रोचक शब्द है:
    • बाण: जिसका मुख पत्थर (शिल) जैसा कठोर और नुकीला हो।
    • भ्रमर (भँवरा): जिसका मुख फूलों को छेदने में सक्षम हो और जिसकी आकृति बाण जैसी तीव्र हो।

46. कादम्बरी (मदिरा/मैना/कोयल)

  • अर्थ: मदमस्त करने वाली ध्वनि या वस्तु।
  • विश्लेषण: यह शब्द बहुत कठिन माना जाता है। साहित्य में कादम्बरी का अर्थ ‘मदिरा’ भी है और कोयल की मीठी आवाज़ भी। बाणभट्ट की प्रसिद्ध रचना का नाम भी यही है।

47. आशुग (बाण/हवा)

  • अर्थ: तेज चलने वाला।
  • विश्लेषण: ‘आशु’ (शीघ्र) + ‘ग’ (गमन करने वाला)। जो बहुत तेजी से अपने लक्ष्य की ओर बढ़े, उसे आशुग कहते हैं। यह मुख्य रूप से बाण (Arrow) का पर्यायवाची है।

48. विहग और विहंगम (पक्षी)

  • अर्थ: आकाश में जाने वाला।
  • विश्लेषण: ‘विहायस’ (आकाश) + ‘गम’ (जाना)। जो शून्य या आकाश में गमन करे, वह विहग है। ‘विहंगम’ शब्द का प्रयोग अक्सर ‘विहंगम दृष्टि’ (Bird’s eye view) के लिए भी होता है।

49. सरसिज (कमल)

  • अर्थ: तालाब में जन्म लेने वाला।
  • विश्लेषण: ‘सरसि’ (तालाब/सरोवर) + ‘ज’ (जन्मा)। यद्यपि ‘जलज’ और ‘पंकज’ सरल शब्द हैं, लेकिन सरसिज शब्द का प्रयोग उच्च स्तरीय कविताओं और परीक्षाओं में अधिक होता है।

50. कलधौत (सोना/चाँदी)

  • अर्थ: जो धोया गया हो या निर्मल हो।
  • विश्लेषण: ‘कल’ (सुंदर) + ‘धौत’ (धोया हुआ)। जो धातु धोने पर चमक उठे, उसे कलधौत कहते हैं। मुख्य रूप से यह सोने के लिए प्रयोग होता है।

पर्यायवाची शब्द: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Practice Set-01)

निर्देश: नीचे दिए गए प्रश्नों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

प्रश्न 1. ‘अकिंचन’ शब्द का सही अर्थ/पर्यायवाची क्या है?

(A) ऋणी

(B) दरिद्र

(C) कंजूस

(D) नीच

उत्तर: (B) दरिद्र (जिसके पास कुछ भी न हो)

प्रश्न 2. ‘पुण्डरीक’ शब्द किस रंग के कमल का पर्यायवाची है?

(A) लाल

(B) नीला

(C) सफेद

(D) पीला

उत्तर: (C) सफेद (नीले कमल को ‘इंदीवर’ और लाल को ‘कोकनद’ कहते हैं)

प्रश्न 3. ‘शशांक’ का शाब्दिक अर्थ इनमें से क्या है?

(A) सूर्य की किरण

(B) मृग जैसी आँखों वाला

(C) खरगोश की गोद वाला

(D) रात का राजा

उत्तर: (C) खरगोश की गोद वाला (शश + अंक)

प्रश्न 4. इनमें से कौन सा शब्द ‘साँप’ का पर्यायवाची नहीं है?

(A) व्याल

(B) पन्नग

(C) अरि

(D) उरग

उत्तर: (C) अरि (अरि का अर्थ ‘शत्रु’ होता है)

प्रश्न 5. ‘द्विज’ शब्द इनमें से किसके लिए प्रयुक्त नहीं होता है?

(A) पक्षी

(B) दाँत

(C) ब्राह्मण

(D) आकाश

उत्तर: (D) आकाश (द्विज का अर्थ है ‘दो बार जन्म लेने वाला’)

प्रश्न 6. ‘अतनु’ शब्द किस देवता के लिए प्रयुक्त होता है?

(A) शिव

(B) कामदेव

(C) विष्णु

(D) इंद्र

उत्तर: (B) कामदेव (बिना शरीर के होने के कारण)

प्रश्न 7. ‘वारिवाह’ इनमें से किसका पर्यायवाची है?

(A) समुद्र

(B) बादल

(C) नाव

(D) मछली

उत्तर: (B) बादल (जल को ढोने वाला)

प्रश्न 8. ‘तरणि’ और ‘तरणी’ शब्द-युग्म का सही अर्थ क्या है?

(A) सूर्य और नाव

(B) नाव और सूर्य

(C) युवती और नदी

(D) किरण और लहर

उत्तर: (A) सूर्य और नाव (तरणि = सूर्य, तरणी = नाव)

प्रश्न 9. ‘वैश्वानर’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया जाता है?

(A) वायु

(B) अग्नि

(C) जल

(D) पृथ्वी

उत्तर: (B) अग्नि (समस्त प्राणियों के भीतर की अग्नि)

प्रश्न 10. ‘असोमा’ या ‘अमिय’ इनमें से किसका पर्यायवाची है?

(A) विष

(B) अमृत

(C) दूध

(D) शहद

उत्तर: (B) अमृत

पर्यायवाची शब्द: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Practice Set-02)

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के लिए सही विकल्प चुनें।

प्रश्न 1. ‘मृगेंद्र’ शब्द का सही पर्यायवाची क्या है?

(A) हिरण

(B) हाथी

(C) शेर

(D) घोड़ा

उत्तर: (C) शेर (मृगों का इंद्र यानी राजा)।

प्रश्न 2. इनमें से कौन सा शब्द ‘बिजली’ का पर्यायवाची नहीं है?

(A) तड़ित

(B) चंचला

(C) सौदामिनी

(D) मिलिंद

उत्तर: (D) मिलिंद (मिलिंद का अर्थ ‘भ्रमर’ या भँवरा होता है)।

प्रश्न 3. ‘कौतूहल’ शब्द का सही अर्थ/पर्यायवाची क्या है?

(A) आश्चर्य

(B) जिज्ञासा

(C) डर

(D) क्रोध

उत्तर: (B) जिज्ञासा (कुछ जानने की प्रबल इच्छा)।

प्रश्न 4. ‘विभावरी’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया जाता है?

(A) सुबह

(B) दोपहर

(C) शाम

(D) रात

उत्तर: (D) रात (विशेष रूप से तारों वाली रात)।

प्रश्न 5. ‘पन्नगारि’ इनमें से किसका पर्यायवाची शब्द है?

(A) साँप

(B) चूहा

(C) गरुड़

(D) मोर

उत्तर: (C) गरुड़ (पन्नग + अरि = साँपों का शत्रु)।

प्रश्न 6. ‘शिलीमुख’ शब्द इनमें से किसके लिए प्रयुक्त होता है?

(A) बाण

(B) तलवार

(C) ढाल

(D) धनुष

उत्तर: (A) बाण (इसका दूसरा अर्थ ‘भँवरा’ भी होता है)।

प्रश्न 7. ‘अम्बुज’ और ‘अम्बुद’ का सही अर्थ युग्म क्या है?

(A) बादल और समुद्र

(B) कमल और बादल

(C) जल और कमल

(D) समुद्र और बादल

उत्तर: (B) कमल और बादल (‘ज’ = जन्मा, ‘द’ = देने वाला)।

प्रश्न 8. ‘कलधौत’ शब्द का संबंध किस धातु से है?

(A) लोहा

(B) ताँबा

(C) चाँदी

(D) सोना

उत्तर: (D) सोना (निर्मल या सुंदर चमक वाली धातु)।

प्रश्न 9. इनमें से ‘कामदेव’ का पर्यायवाची कौन सा है?

(A) विडौजा

(B) मार

(C) लोकेश

(D) वासव

उत्तर: (B) मार (कामदेव के अन्य नाम मनोज, अनंग और कंदर्प भी हैं)।

प्रश्न 10. ‘नाराच’ शब्द किस अस्त्र/शस्त्र का पर्यायवाची है?

(A) बाण

(B) गदा

(C) त्रिशूल

(D) तलवार

उत्तर: (A) बाण (लोहे से बना विशेष बाण)।

पर्यायवाची शब्द: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Practice Set-03)

निर्देश: सही विकल्प का चयन करें। (प्रत्येक प्रश्न के साथ उसका सूक्ष्म अर्थ भी दिया गया है)।

प्रश्न 1. इनमें से ‘मार्तण्ड’ शब्द का सही पर्यायवाची क्या है?

(A) चन्द्रमा

(B) सूर्य

(C) तारा

(D) आकाश

उत्तर: (B) सूर्य (मार्तण्ड सूर्य के प्रचंड और तेजस्वी रूप को दर्शाता है)।

प्रश्न 2. भगवान शिव के लिए ‘आशुतोष’ शब्द का प्रयोग क्यों किया जाता है?

(A) तीसरी आँख होने के कारण

(B) विष पीने के कारण

(C) शीघ्र प्रसन्न होने के कारण

(D) मस्तक पर चन्द्रमा होने के कारण

उत्तर: (C) शीघ्र प्रसन्न होने के कारण (आशु = शीघ्र, तोष = संतुष्ट)।

प्रश्न 3. ‘पुलोमजा’ इनमें से किसका पर्यायवाची शब्द है?

(A) लक्ष्मी

(B) सरस्वती

(C) इन्द्राणी

(D) पार्वती

उत्तर: (C) इन्द्राणी (इंद्र की पत्नी शची को पुलोमा ऋषि की पुत्री होने के कारण पुलोमजा कहा जाता है)।

प्रश्न 4. इनमें से ‘बाण’ का सही पर्यायवाची कौन सा है?

(A) विशिख

(B) चाप

(C) असि

(D) केतु

उत्तर: (A) विशिख (चाप = धनुष, असि = तलवार, केतु = झंडा)।

प्रश्न 5. ‘पाथेय’ शब्द का सही अर्थ क्या है?

(A) पैर धोने का जल

(B) रास्ते का भोजन या संबल

(C) रास्ते का पत्थर

(D) नदी का किनारा

उत्तर: (B) रास्ते का भोजन (पथ के लिए उपयोगी सामग्री)।

प्रश्न 6. ‘वैशाखनंदन’ किस पशु का एक व्यंग्यात्मक पर्यायवाची है?

(A) बैल

(B) ऊँट

(C) गधा

(D) हाथी

उत्तर: (C) गधा (वैशाख के महीने में घास सूखने पर इसके प्रसन्न होने की पौराणिक मान्यता के कारण)।

प्रश्न 7. ‘इला’ और ‘मेदिनी’ किसके पर्यायवाची शब्द हैं?

(A) वन

(B) पृथ्वी

(C) बिजली

(D) वर्षा

उत्तर: (B) पृथ्वी (इला और मेदिनी धरती के कठिन तत्सम पर्याय हैं)।

प्रश्न 8. इनमें से ‘गरुड़’ का पर्यायवाची शब्द कौन सा है?

(A) वैनतेय

(B) पुरंदर

(C) पिनाक

(D) अमर्त्य

उत्तर: (A) वैनतेय (विनता का पुत्र होने के कारण)।

प्रश्न 9. ‘कादम्बरी’ शब्द का प्रयोग किसके लिए किया जाता है?

(A) नदी

(B) कोयल

(C) मदिरा

(D) कोकिल

उत्तर: (C) मदिरा (कादम्बरी का अर्थ शराब या मदमस्त करने वाली ध्वनि भी होता है)।

प्रश्न 10. इनमें से ‘चोर’ का सही पर्यायवाची शब्द कौन सा है?

(A) कुम्भील

(B) खल

(C) पामर

(D) दस्यु

उत्तर: (A) कुम्भील (खल = दुष्ट, पामर = नीच, दस्यु = डाकू)।

पर्यायवाची शब्द: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Practice Set-04)

निर्देश: प्रत्येक प्रश्न के लिए उपयुक्त विकल्प चुनें।

प्रश्न 1. ‘विडौजा’ शब्द इनमें से किसका पर्यायवाची है?

(A) विष्णु

(B) इंद्र

(C) कामदेव

(D) शिव

उत्तर: (B) इंद्र (विडौजा, मघवा, शक्र और पुरंदर इंद्र के प्रमुख पर्यायवाची हैं)।

प्रश्न 2. ‘सिंधुसुता’ और ‘भार्गवी’ किसके पर्यायवाची शब्द हैं?

(A) माँ पार्वती

(B) माँ सरस्वती

(C) माँ लक्ष्मी

(D) माँ दुर्गा

उत्तर: (C) माँ लक्ष्मी (समुद्र से उत्पन्न होने के कारण ‘सिंधुसुता’ और भृगु ऋषि की पुत्री होने के कारण ‘भार्गवी’)।

प्रश्न 3. ‘कंदर्प’ और ‘मनोज’ शब्द का संबंध किससे है?

(A) कुबेर

(B) वरुण

(C) कामदेव

(D) यमराज

उत्तर: (C) कामदेव (मन में जन्म लेने वाला)।

प्रश्न 4. इनमें से ‘धनुष’ का सही पर्यायवाची कौन सा है?

(A) विशिख

(B) कोदंड

(C) नाराच

(D) कृपाण

उत्तर: (B) कोदंड (विशिख और नाराच बाण के पर्यायवाची हैं, जबकि कृपाण तलवार का)।

प्रश्न 5. ‘शाखामृग’ शब्द किस जंतु के लिए प्रयुक्त होता है?

(A) हिरण

(B) बंदर

(C) गिलहरी

(D) नेवला

उत्तर: (B) बंदर (शाखाओं पर दौड़ने वाला मृग)।

प्रश्न 6. ‘अर्क’ और ‘सविता’ किसके पर्यायवाची शब्द हैं?

(A) चंद्रमा

(B) अग्नि

(C) सूर्य

(D) वायु

उत्तर: (C) सूर्य (छठ पूजा में ‘अर्क’ देना इसी शब्द से बना है)।

प्रश्न 7. ‘क्षणप्रभा’ और ‘चंचला’ इनमें से किसका बोध कराते हैं?

(A) बिजली

(B) नदी

(C) वर्षा

(D) रात्रि

उत्तर: (A) बिजली (क्षण भर के लिए चमकने वाली प्रभा)।

प्रश्न 8. ‘धूर्जटि’ शब्द किसके लिए प्रयुक्त होता है?

(A) ब्रह्मा

(B) रावण

(C) शिव

(D) हनुमान

उत्तर: (C) शिव (धुआँ जैसी जटाओं वाले या गंगा को जटा में धारण करने वाले)।

प्रश्न 9. ‘नखायुध’ इनमें से किसका पर्यायवाची है?

(A) हाथी

(B) बाघ/सिंह

(C) घोड़ा

(D) सांप

उत्तर: (B) बाघ/सिंह (जिसके नाखून ही उसके आयुध यानी शस्त्र हों)।

प्रश्न 10. ‘अही’ और ‘भुजंग’ शब्द किसके लिए आते हैं?

(A) मछली

(B) पक्षी

(C) सांप

(D) बिच्छू

उत्तर: (C) सांप (अही का शत्रु ‘अहिभुक’ यानी मोर होता है)।

पर्यायवाची शब्द: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (Practice Set-05)

निर्देश: विकल्पों को ध्यान से पढ़ें और सही उत्तर का चयन करें।

प्रश्न 1. ‘चंचरीक’ और ‘द्विरेफ’ इनमें से किसके पर्यायवाची शब्द हैं?

(A) हाथी

(B) भँवरा

(C) कोयल

(D) बंदर

उत्तर: (B) भँवरा (द्विरेफ इसलिए क्योंकि इसके नाम ‘भ्रमर’ में दो ‘र’ आते हैं)।

प्रश्न 2. इनमें से कौन सा शब्द ‘इंद्र’ का पर्यायवाची नहीं है?

(A) मघवा

(B) शक्र

(C) पुरंदर

(D) पुण्डरीक

उत्तर: (D) पुण्डरीक (पुण्डरीक का अर्थ ‘सफेद कमल’ होता है)।

प्रश्न 3. ‘कलत्र’ और ‘वामा’ शब्द का संबंध किससे है?

(A) पुत्री

(B) माता

(C) पत्नी

(D) बहन

उत्तर: (C) पत्नी (वामा इसलिए क्योंकि वे पुरुष के वाम यानी बाएं अंग की ओर स्थान ग्रहण करती हैं)।

प्रश्न 4. ‘क्रूर’ और ‘नृशंस’ के समानार्थक के रूप में ‘पामर’ का प्रयोग किस संदर्भ में होता है?

(A) महान व्यक्ति

(B) दानी व्यक्ति

(C) नीच या दुष्ट व्यक्ति

(D) ज्ञानी व्यक्ति

उत्तर: (C) नीच या दुष्ट व्यक्ति।

प्रश्न 5. ‘अरण्य’ का वह पर्यायवाची शब्द चुनिए जो ‘जंगल’ के घने और भयानक रूप को दर्शाता है:

(A) विपिन

(B) कानन

(C) कांतार

(D) वाटिका

उत्तर: (C) कांतार (विपिन और कानन सामान्य वन हैं, कांतार दुर्गम जंगल को कहते हैं)।

प्रश्न 6. ‘हेम’ और ‘जातरूप’ इनमें से किस धातु के पर्यायवाची हैं?

(A) चाँदी

(B) लोहा

(C) ताँबा

(D) सोना

उत्तर: (D) सोना (हाटक, कुंदन, और कनक भी इसी के पर्याय हैं)।

प्रश्न 7. ‘पयस्विनी’ शब्द मुख्य रूप से किसके लिए प्रयुक्त होता है?

(A) दुधारू गाय या नदी

(B) पर्वत

(C) आकाश

(D) बिजली

उत्तर: (A) दुधारू गाय या नदी (पय = दूध/जल, पयस्विनी = पय देने वाली)।

प्रश्न 8. ‘अति-सौरभ’ और ‘सहकार’ इनमें से किस फल के पर्यायवाची हैं?

(A) अनार

(B) केला

(C) आम

(D) अंगूर

उत्तर: (C) आम (आम्र, रसाल और पिकबंधु भी इसी के नाम हैं)।

प्रश्न 9. ‘क्षणदा’ और ‘रजनी’ के साथ ‘त्रियामा’ किसका पर्यायवाची है?

(A) रात

(B) दोपहर

(C) सुबह

(D) शाम

उत्तर: (A) रात (तीन याम यानी प्रहर वाली)।

प्रश्न 10. ‘वात’ और ‘प्रकम्पन’ इनमें से किसका बोध कराते हैं?

(A) आग

(B) पानी

(C) हवा

(D) मिट्टी

उत्तर: (C) हवा (समीर, अनिल और मारुत भी हवा के पर्याय हैं)।

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