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पाचन तंत्र (Digestive System): जाने कैसे बनती है ऊर्जा और कहां काम आती है? MCQs [ PDF Download]

पाचन तंत्र | digestive system | Power House of body | MCQs | PDF

Table of Contents

पाचन तंत्र chart 📉

पाचन तंत्र: प्रक्रिया और कार्य करने वाले अंग

1. अंतर्ग्रहण (Ingestion) – भोजन ग्रहण करना

​यह प्रक्रिया का पहला चरण है जब हम भोजन को अपने मुँह (Mouth) में लेते हैं। यहाँ दाँत भोजन को पीसते हैं और लार ग्रंथियाँ (Saliva) उसे गीला करती हैं।

सरल शब्दों में, बाहरी वातावरण से भोजन को शरीर के भीतर (मुख मार्ग से) ले जाने की क्रिया को अंतर्ग्रहण कहते हैं। यह पाचन का सबसे पहला चरण है।

इसमें शामिल मुख्य अंग और उनकी भूमिका:

जीभ chart

पाचन तंत्र में मुख (Mouth) केवल एक द्वार नहीं है, बल्कि यह एक जटिल प्रयोगशाला है जहाँ भोजन के पाचन की नींव रखी जाती है। आइए इसे विस्तार से समझते हैं:

मुख (The Mouth): पाचन का प्रवेश द्वार

पाचन तंत्र

​मुख को जीव विज्ञान की भाषा में मुख गुहा (Buccal Cavity) कहा जाता है। यहाँ भोजन का यांत्रिक और रासायनिक—दोनों प्रकार से रूपांतरण शुरू होता है।

1. दाँत (Teeth) – यांत्रिक पाचन

​दाँतों का मुख्य कार्य भोजन को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ना है। मनुष्य के मुँह में चार प्रकार के दाँत होते हैं:

  • कृंतक (Incisors): भोजन को काटने के लिए (सामने के दाँत)।
  • रदनक (Canines): भोजन को चीरने-फाड़ने के लिए (नुकीले दाँत)।
  • अग्रचवर्णक (Premolars): भोजन को कुचलने के लिए।
  • चवर्णक (Molars): भोजन को अच्छी तरह पीसने के लिए।
दांत चार्ट

2. लार ग्रंथियाँ (Salivary Glands) – रासायनिक पाचन

पाचन तंत्र

​जैसे ही हम भोजन देखते हैं या खाते हैं, मुँह में तीन जोड़ी लार ग्रंथियों से ‘लार’ (Saliva) निकलना शुरू हो जाती है।

  • लुब्रिकेशन: लार भोजन को गीला और फिसलन भरा बनाती है ताकि उसे निगलने में आसानी हो।
  • टायलिन या लार एमाइलेज (Salivary Amylase): यह सबसे महत्वपूर्ण एंजाइम है जो भोजन में मौजूद स्टार्च (Complex Carbohydrate) को सरल शर्करा (Maltose) में बदलना शुरू कर देता है। यही कारण है कि रोटी को देर तक चबाने पर वह मीठी लगने लगती है।

3. जीभ (Tongue) – स्वाद और मिश्रण

पाचन तंत्र

​जीभ एक मांसपेशीय अंग है जिसके कई महत्वपूर्ण कार्य हैं:

  • स्वाद: जीभ पर ‘स्वाद कलिकाएँ’ (Taste Buds) होती हैं जो मीठा, कड़वा, खट्टा और नमकीन पहचानने में मदद करती हैं।
  • मिक्सिंग: यह भोजन को लार के साथ अच्छी तरह मिलाने का काम करती है।
  • बोलस निर्माण: चबाए हुए भोजन को एक नरम गोले (बोलस) में बदलकर गले की ओर धकेलती है।

4. तालु (Palate)

पाचन तंत्र

​मुख गुहा की ऊपरी छत को तालु कहते हैं। इसका अगला हिस्सा कठोर होता है जो भोजन को चबाते समय सहारा देता है, और पिछला हिस्सा कोमल होता है जो भोजन निगलते समय नासिका मार्ग को बंद कर देता है।

मुख में पाचन का निष्कर्ष:

पाचन तंत्र

​मुख में भोजन का पाचन पूरी तरह नहीं होता, बल्कि यहाँ कार्बोहाइड्रेट का आंशिक पाचन (लगभग 30%) शुरू हो जाता है। इसके बाद यह ‘बोलस’ ग्रासनली (Esophagus) की ओर बढ़ जाता है।

पाचन की पहली सीढ़ी मुँह है—जहाँ एंजाइम और दाँत मिलकर भोजन को शरीर के अनुकूल बनाना शुरू करते हैं।”

अंतर्ग्रहण का अंत:

पाचन तंत्र

​जब भोजन अच्छी तरह चब जाता है और लार के साथ मिलकर एक नरम गोले का रूप ले लेता है, तो उसे बोलस (Bolus) कहा जाता है। इसके बाद जीभ इसे निगल लेती है, जहाँ से यह ग्रासनली के माध्यम से आमाशय (Stomach) की ओर बढ़ जाता है।

मुख्य बिंदु (Quick Summary for Post):

  • प्रक्रिया: भोजन को मुँह में लेना।
  • माध्यम: दाँत और लार।
  • महत्व: पाचन की नींव यहीं रखी जाती है।

ग्रासनली (Esophagus): संरचना और कार्य

पाचन तंत्र

1. भौतिक संरचना (Physical Structure)

  • लंबाई: यह एक पेशीय नली (Muscular Tube) है जिसकी लंबाई लगभग 25 सेंटीमीटर (10 इंच) होती है।
  • स्थिति: यह श्वासनली (Trachea) के ठीक पीछे और हृदय के सामने से होकर गुजरती है। यह गले (Pharynx) से शुरू होकर डायाफ्राम को पार करती हुई आमाशय में खुलती है।
  • बनावट: यह मांसपेशियों की बनी होती है और इसके अंदर की परत श्लेष्मा (Mucus) से ढकी रहती है, जिससे भोजन आसानी से नीचे फिसल सके।

2. पेरिस्टालसिस (Peristalsis) – सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया

पाचन तंत्र

​ग्रासनली में भोजन गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे नहीं गिरता, बल्कि मांसपेशियों की एक विशेष गति के कारण जाता है।

  • ​जब हम भोजन निगलते हैं, तो ग्रासनली की मांसपेशियाँ बारी-बारी से सिकुड़ती और फैलती हैं।
  • ​इस लहरदार गति को क्रमाकुंचन (Peristalsis) कहते हैं। इसी गति की वजह से अगर आप उल्टे लटककर भी कुछ खाएँ, तो भोजन पेट में ही जाएगा।

3. पाचन में भूमिका (Role in Digestion)

पाचन तंत्र

  • कोई पाचन नहीं: ग्रासनली में किसी भी प्रकार का पाचन (Digestion) नहीं होता। यहाँ न तो कोई पाचक एंजाइम निकलता है और न ही पोषक तत्वों का अवशोषण होता है।
  • कार्य: इसका एकमात्र मुख्य कार्य ‘बोलस’ (चबाए हुए भोजन) को मुख से आमाशय तक सुरक्षित पहुँचाना है।

4. स्फिंक्टर (Sphincter) – गेटकीपर

पाचन तंत्र

​ग्रासनली के निचले सिरे पर, जहाँ यह पेट से जुड़ती है, एक गोलाकार मांसपेशी होती है जिसे लोअर एसोफेजियल स्फिंक्टर (LES) कहते हैं।

  • कार्य: यह एक वाल्व की तरह काम करता है। यह भोजन को पेट में जाने के लिए खुलता है और फिर बंद हो जाता है ताकि पेट का एसिड और भोजन वापस ग्रासनली में न आए।
  • नोट: जब यह वाल्व सही से बंद नहीं होता, तब हमें ‘एसिडिटी’ या ‘सीने में जलन’ (Heartburn) महसूस होती है।

ग्रासनली से जुड़े मुख्य तथ्य (Key Facts for Post):

पाचन तंत्र

  1. उपस्थिति: गर्दन से पेट तक।
  2. माध्यम: केवल परिवहन का काम (Transportation only)।
  3. सुरक्षा: एपिग्लॉटिस (Epiglottis) नामक एक ढक्कन होता है जो भोजन करते समय श्वासनली को बंद कर देता है ताकि भोजन फेफड़ों में न जाए।
पाचन तंत्र chart 📉

आमाशय (Stomach): शरीर की मुख्य पाचन प्रयोगशाला

पाचन तंत्र

1. स्थिति और संरचना (Location & Structure)

  • स्थिति: यह उदर गुहा (Abdominal Cavity) के ऊपरी बाएं हिस्से में, डायाफ्राम के ठीक नीचे स्थित होता है।
  • क्षमता: एक वयस्क व्यक्ति के आमाशय में लगभग 1.5 से 2 लीटर तक भोजन और तरल समा सकता है।
  • बनावट: इसकी दीवारें मांसपेशियों की तीन परतों से बनी होती हैं, जो भोजन को अच्छी तरह मथने (Churning) में मदद करती हैं।

2. जठर ग्रंथियाँ (Gastric Glands)

​आमाशय की आंतरिक दीवार (Mucosa) में लाखों सूक्ष्म ग्रंथियाँ होती हैं, जिन्हें जठर ग्रंथियाँ कहते हैं। इनसे ‘जठर रस’ (Gastric Juice) निकलता है, जिसमें मुख्य रूप से तीन चीजें होती हैं:

  1. हाइड्रोक्लोरिक एसिड (HCl):
    • ​यह भोजन के साथ आए हानिकारक जीवाणुओं (Bacteria) को मारता है।
    • ​यह माध्यम को अम्लीय (Acidic) बनाता है, ताकि एंजाइम काम कर सकें।
  2. पेप्सिन एंजाइम (Pepsin):
    • ​इसका मुख्य काम प्रोटीन को छोटे टुकड़ों (Peptones) में तोड़ना है। यह केवल अम्लीय माध्यम में ही सक्रिय होता है।
  3. म्यूकस (Mucus/श्लेष्मा):
    • ​यह आमाशय की आंतरिक दीवार पर एक सुरक्षा परत बनाता है ताकि शक्तिशाली HCl तेजाब से पेट की दीवारें न जलें।

3. पाचन की प्रक्रिया (Process in Stomach)

पाचन तंत्र

  • काइम (Chyme) का निर्माण: आमाशय में भोजन लगभग 3 से 4 घंटे तक रहता है। यहाँ मांसपेशियाँ भोजन को जठर रस के साथ मथकर एक गाढ़े पेस्ट में बदल देती हैं, जिसे ‘काइम’ कहा जाता है।
  • प्रोटीन का पाचन: यहाँ मुख्य रूप से प्रोटीन का पाचन शुरू होता है। (नोट: कार्बोहाइड्रेट का पाचन पेट में रुक जाता है क्योंकि यहाँ का माध्यम अम्लीय होता है)।

4. आमाशय के मुख्य भाग

पाचन तंत्र

  • कार्डिएक (Cardiac): जहाँ ग्रासनली पेट से जुड़ती है।
  • फंडस (Fundus): ऊपरी हिस्सा जहाँ गैस जमा होती है।
  • पाइलोरिक (Pyloric): अंतिम हिस्सा जो छोटी आँत (Duodenum) में खुलता है।

आमाशय से जुड़े रोचक तथ्य (Post Highlights):

पाचन तंत्र

  • अम्लता (Acidity): पेट में मौजूद HCl इतना शक्तिशाली होता है कि वह धातु (जैसे छोटी ब्लेड) को भी गला सकता है, लेकिन ‘म्यूकस’ की परत हमारे पेट को सुरक्षित रखती है।
  • अवशोषण: यहाँ भोजन का पूर्ण पाचन नहीं होता, लेकिन पानी, कुछ दवाओं और अल्कोहल का अवशोषण यहीं से शुरू हो जाता है।
मानव आमाशय आंतरिक संरचना और कार्य

छोटी आँत: पाचन और अवशोषण का मुख्य केंद्र

पाचन तंत्र

1. संरचना और स्थिति (Structure & Location)

  • लंबाई: यह लगभग 6 से 7 मीटर (20-22 फीट) लंबी होती है। यह उदर गुहा के मध्य में एक कुंडलित (Coiled) रूप में व्यवस्थित होती है।
  • व्यास: इसका व्यास (चौड़ाई) कम होने के कारण इसे ‘छोटी’ आँत कहा जाता है।

2. छोटी आँत के तीन मुख्य भाग

​छोटी आँत को तीन भागों में विभाजित किया गया है:

  1. ग्रहणी (Duodenum): यह ‘C’ आकार का शुरुआती हिस्सा है जो आमाशय से जुड़ा होता है। यहाँ यकृत (Liver) से पित्त रस और अग्न्याशय (Pancreas) से अग्न्याशयी रस आकर मिलते हैं।
  2. जेजुनम (Jejunum): यह मध्य भाग है जहाँ पाचन की प्रक्रिया जारी रहती है।
  3. इलियम (Ileum): यह अंतिम और सबसे लंबा हिस्सा है जो बड़ी आँत से जुड़ता है। यहाँ विटामिन B_{12} और पित्त लवणों का अवशोषण होता है।

3. पाचन की प्रक्रिया (Digestion in Small Intestine)

​यहाँ भोजन का पूर्ण पाचन होता है:

  • वसा (Fat) का पाचन: पित्त रस वसा को छोटी बूंदों में तोड़ता है (Emulsification)।
  • कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का अंतिम पाचन: अग्न्याशय और आँत की ग्रंथियों से निकलने वाले एंजाइम भोजन को ग्लूकोज, अमीनो एसिड और फैटी एसिड में बदल देते हैं।

4. अवशोषण (Absorption) और विली (Villi)

​यह छोटी आँत की सबसे बड़ी विशेषता है। इसकी आंतरिक दीवार पर लाखों सूक्ष्म, उँगली जैसी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें विली (Villi) या रसांकुर कहते हैं।

  • कार्य: विली अवशोषण के लिए ‘सतह क्षेत्र’ (Surface Area) को कई गुना बढ़ा देती हैं।
  • प्रक्रिया: पचे हुए पोषक तत्व विली के माध्यम से रक्त वाहिकाओं में चले जाते हैं और वहाँ से पूरे शरीर में पहुँचते हैं।
अवशोषण और villi

छोटी आँत से जुड़े मुख्य तथ्य (Key Points for Post):

  • पूर्ण पाचन: भोजन का पाचन छोटी आँत में पहुँचकर समाप्त हो जाता है।
  • शाकाहारी बनाम मांसाहारी: शाकाहारी जीवों में सेलुलोज को पचाने के लिए छोटी आँत लंबी होती है, जबकि मांसाहारियों में यह छोटी होती है।
  • क्षारीय माध्यम: आमाशय का अम्लीय भोजन यहाँ आकर अग्न्याशयी रस की मदद से क्षारीय (Alkaline) हो जाता है।

बड़ी आँत: जल अवशोषण और अपशिष्ट प्रबंधन

1. संरचना और स्थिति (Structure & Location)

  • लंबाई: यह लगभग 1.5 मीटर (5 फीट) लंबी होती है। यह लंबाई में छोटी आँत से कम है, लेकिन इसका व्यास (चौड़ाई) अधिक होता है, इसलिए इसे ‘बड़ी’ आँत कहा जाता है।
  • आकार: यह छोटी आँत को घेरे हुए एक ‘उल्टे U’ के आकार में व्यवस्थित होती है।

2. बड़ी आँत के मुख्य भाग

​बड़ी आँत को तीन प्रमुख भागों में बाँटा जा सकता है:

  1. सीकम (Caecum): यह शुरुआती थैली जैसा हिस्सा है जहाँ छोटी आँत जुड़ती है। यहीं पर अपेंडिक्स (Appendix) स्थित होता है, जो मनुष्यों में एक अवशेषी अंग (Vestigial Organ) है।
  2. कोलन (Colon): यह सबसे बड़ा हिस्सा है। इसके चार भाग होते हैं—ऊपर जाने वाला (Ascending), आड़ा (Transverse), नीचे आने वाला (Descending) और सिग्मॉइड (Sigmoid)।
  3. मलाशय (Rectum): यहाँ अपचित भोजन मल (Feces) के रूप में अस्थायी रूप से जमा होता है।

3. मुख्य कार्य (Functions)

​बड़ी आँत में भोजन का पाचन नहीं होता, इसके कार्य इस प्रकार हैं:

  • जल का अवशोषण: इसका सबसे प्रमुख काम अपचित भोजन से पानी और कुछ खनिज लवणों (Salts) को सोखना है।
  • विटामिन का निर्माण: यहाँ मौजूद कुछ ‘मित्र बैक्टीरिया’ (जैसे E. coli) अपशिष्ट पर काम करते हैं और विटामिन K तथा कुछ B विटामिन का निर्माण करते हैं।
  • मल निर्माण: पानी सोखने के बाद अपशिष्ट ठोस हो जाता है, जिसे मल कहा जाता है।
  • स्नेहन (Lubrication): यह श्लेष्मा (Mucus) छोड़ती है जो मल को चिकना बनाता है ताकि वह आसानी से बाहर निकल सके।

4. निष्कासन (Egestion)

​अंत में, अपशिष्ट पदार्थ गुदा (Anus) के माध्यम से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

मुख्य तथ्य (Quick Notes):

  • ​बड़ी आँत में कोई पाचन एंजाइम नहीं निकलता।
  • ​यदि बड़ी आँत पानी का अवशोषण कम करे, तो ‘डायरिया’ (दस्त) की स्थिति पैदा होती है।
  • ​यदि यह बहुत अधिक पानी सोख ले, तो ‘कब्ज’ (Constipation) हो जाता है।
बड़ी आंत chart 📉

यकृत (Liver): शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि

​यकृत का पाचन में सबसे महत्वपूर्ण योगदान पित्त रस (Bile Juice) का निर्माण करना है।

  • पित्त रस का भंडारण: यकृत पित्त रस बनाता है, जो एक छोटी थैली पित्ताशय (Gallbladder) में जमा होता है।
  • वसा का पायसीकरण (Emulsification of Fats): हमारे द्वारा खाया गया वसा (Fat) बड़ी बूंदों के रूप में होता है। पित्त रस इन्हें छोटी-छोटी बूंदों में तोड़ देता है, ताकि एंजाइम उन पर आसानी से काम कर सकें।
  • माध्यम को क्षारीय बनाना: आमाशय से आने वाला भोजन अम्लीय (HCl के कारण) होता है। पित्त रस उसे क्षारीय (Alkaline) बनाता है, क्योंकि अग्न्याशय के एंजाइम केवल क्षारीय माध्यम में ही सक्रिय होते हैं।

अग्न्याशय (Pancreas): मिश्रित ग्रंथि

​अग्न्याशय आमाशय के ठीक नीचे स्थित होता है। यह अग्न्याशयी रस (Pancreatic Juice) छोड़ता है, जिसे ‘पूर्ण पाचक रस’ कहा जाता है क्योंकि इसमें हर प्रकार के पोषक तत्व को पचाने के एंजाइम होते हैं।

इसमें मौजूद प्रमुख एंजाइम:

  1. ट्रिप्सिन (Trypsin): यह प्रोटीन और पेप्टोन्स को ‘अमीनो एसिड’ में बदल देता है।
  2. अग्न्याशयी एमाइलेज (Pancreatic Amylase): यह बचे हुए कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च) को ग्लूकोज में तोड़ता है।
  3. लाइपेज (Lipase): यह पायसीकृत वसा (Emulsified Fat) को फैटी एसिड और ग्लिसरॉल में बदल देता है।

यकृत और अग्न्याशय का तालमेल

​जब भोजन आमाशय से छोटी आँत के पहले भाग (ग्रहणी/Duodenum) में पहुँचता है, तो यकृत और अग्न्याशय दोनों अपनी-अपनी नलिकाओं के माध्यम से एक साथ रस छोड़ते हैं।

अंगरस का नाममुख्य कार्य
यकृतपित्त रस (Bile)वसा को तोड़ना और अम्लता खत्म करना
अग्न्याशयअग्न्याशयी रसप्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा का पूर्ण पाचन

निष्कर्ष (Post Highlights):

  • यकृत वसा के पाचन का ‘मैनेजर’ है।
  • अग्न्याशय पाचन की ‘पूरी प्रयोगशाला’ है जो जटिल भोजन को सरल पोषक तत्वों में अंतिम रूप से बदल देती है।

पाचन तंत्र: 6 चरण

पाचन तंत्र एक लंबी प्रक्रिया है जो कई चरणों (Points) में पूरी होती है। अगर आप एक पोस्ट या नोट्स बना रहे हैं, तो इन 6 मुख्य बिंदुओं को क्रम अनुसार समझना सबसे जरूरी है:

1. अंतर्ग्रहण (Ingestion) – भोजन ग्रहण करना

​यह प्रक्रिया का पहला चरण है जब हम भोजन को अपने मुँह (Mouth) में लेते हैं। यहाँ दाँत भोजन को पीसते हैं और लार ग्रंथियाँ (Saliva) उसे गीला करती हैं।

2. पाचन (Digestion) – भोजन का टूटना

​यह वह प्रक्रिया है जहाँ जटिल भोजन सरल अणुओं में टूटता है। इसके दो हिस्से हैं:

  • यांत्रिक पाचन: दाँतों द्वारा चबाना और आमाशय (Stomach) द्वारा भोजन को मथना।
  • रासायनिक पाचन: एंजाइमों और रसायनों (जैसे HCl एसिड और पित्त रस) द्वारा भोजन को घोलना।

3. अवशोषण (Absorption) – पोषक तत्वों को सोखना

​जब भोजन पच जाता है, तो वह छोटी आँत (Small Intestine) में पहुँचता है। छोटी आँत की दीवारों पर छोटी-छोटी उँगलियों जैसी संरचनाएँ (Villi) होती हैं, जो भोजन से विटामिन, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट सोखकर उसे रक्त (Blood) में मिला देती हैं।

4. स्वांगीकरण (Assimilation) – ऊर्जा का उपयोग

​रक्त के माध्यम से सोखे गए पोषक तत्व शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुँचते हैं। यहाँ इनका उपयोग ऊर्जा बनाने, शरीर की मरम्मत करने और विकास (Growth) के लिए किया जाता है।

5. जल अवशोषण (Water Absorption)

​बचा हुआ अपशिष्ट पदार्थ बड़ी आँत (Large Intestine) में जाता है। यहाँ शरीर अतिरिक्त पानी और लवण (Salts) को वापस सोख लेता है ताकि शरीर में पानी की कमी न हो।

6. निष्कासन/मल त्याग (Egestion) – गंदगी बाहर निकालना

​अंत में, जो भोजन पच नहीं पाता, वह अर्ध-ठोस कचरे के रूप में मलाशय (Rectum) में जमा हो जाता है और गुदा (Anus) के माध्यम से शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

मानव पाचन तंत्र पर NCERT के नोट्स

निष्कर्ष: भोजन से ऊर्जा का सार

Human Digestive System – Wikipedia

​पाचन केवल पेट भरने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह परिवर्तन (Transformation) का विज्ञान है।

  • प्रक्रिया का समन्वय: पाचन तंत्र यह सुनिश्चित करता है कि जो भोजन हम ठोस रूप में लेते हैं, वह अत्यंत सूक्ष्म अणुओं (ग्लूकोज, अमीनो एसिड, फैटी एसिड) में टूट जाए ताकि हमारी कोशिकाएँ उन्हें सोख सकें।
  • अंगों की भूमिका: मुख से शुरू होकर गुदा तक, हर अंग का अपना एक विशिष्ट कार्य है। जहाँ आमाशय प्रोटीन को तोड़ता है, वहीं यकृत और अग्न्याशय वसा और अन्य जटिल तत्वों को सरल बनाते हैं।
  • अंतिम लक्ष्य: पाचन का अंतिम उद्देश्य शरीर को ऊर्जा (Energy) प्रदान करना, ऊतकों की मरम्मत करना और विकास को गति देना है।
  • स्वास्थ्य का आधार: “जैसा अन्न, वैसा मन” — एक स्वस्थ पाचन तंत्र ही स्वस्थ जीवन की नींव है। यदि हम अपने भोजन को सही तरीके से चबाकर खाएं और पाचन अंगों (विशेषकर यकृत और छोटी आँत) का ध्यान रखें, तो हम ऊर्जावान बने रह सकते हैं।

पाचन तंत्र के 5 ‘Golden Facts’ :

How Your Digestive System Works – NIDDK

  1. शुरुआत: पाचन मुँह से ही शुरू हो जाता है, पेट से नहीं।
  2. लंबाई: आपकी छोटी आँत आपके कद से लगभग 4 गुना लंबी होती है।
  3. एसिड की शक्ति: आमाशय का एसिड धातु तक को गला सकता है, लेकिन म्यूकस हमें सुरक्षित रखता है।
  4. अवशोषण: शरीर के लिए आवश्यक 90% पोषक तत्व छोटी आँत में सोखे जाते हैं।
  5. मस्तिष्क का संबंध: पेट को शरीर का “दूसरा मस्तिष्क” कहा जाता है क्योंकि यह हमारे मूड और स्वास्थ्य को सीधा प्रभावित करता है।

“हम जो खाते हैं, वह नहीं बल्कि जो हम ‘पचाते’ हैं, वही हमें शक्ति देता है।”

भोजन का पूर्ण पाचन शरीर के किस अंग में होता है?

भोजन का पूर्ण पाचन और पोषक तत्वों का अवशोषण छोटी आँत (Small Intestine) में होता है। यहाँ कार्बोहाइड्रेट, वसा और प्रोटीन पूरी तरह सरल अणुओं में बदल जाते हैं।

पेट (Stomach) में प्रोटीन को पचाने वाला मुख्य एंजाइम कौन सा है?

आमाशय में मौजूद पेप्सिन (Pepsin) एंजाइम प्रोटीन के पाचन की शुरुआत करता है। यह अम्ल (HCl) की उपस्थिति में सक्रिय होता है।

‘पित्त रस’ (Bile Juice) कहाँ बनता है और कहाँ जमा होता है?

पित्त रस का निर्माण यकृत (Liver) में होता है, लेकिन यह पित्ताशय (Gallbladder) में जाकर जमा (Store) होता है।

लार (Saliva) में कौन सा एंजाइम पाया जाता है और इसका क्या काम है?

लार में टायलिन या लार एमाइलेज (Salivary Amylase) पाया जाता है। यह भोजन में मौजूद जटिल कार्बोहाइड्रेट (स्टार्च) को सरल शर्करा (माल्टोज) में बदलना शुरू करता है।

दूध को दही में बदलने वाला (दूध का पाचन करने वाला) एंजाइम कौन सा है?

रेनिन (Rennin) एंजाइम दूध के प्रोटीन (केसीन) को पचाने में मदद करता है। यह मुख्य रूप से बच्चों (शिशुओं) में पाया जाता है।

‘काइम’ (Chyme) किसे कहते हैं?

आमाशय (पेट) में जठर रसों और HCl के साथ मथा गया भोजन जब एक अर्ध-तरल (Semi-liquid) पेस्ट जैसा बन जाता है, तो उसे ‘काइम’ कहा जाता है।

मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि कौन सी है?

यकृत (Liver) मानव शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि है। जबकि अग्न्याशय (Pancreas) दूसरी सबसे बड़ी ग्रंथि है।

बड़ी आँत का मुख्य कार्य पाचन है या कुछ और?

नहीं, बड़ी आँत में भोजन का पाचन नहीं होता। इसका मुख्य कार्य अपचित भोजन से जल (Water) और खनिज लवणों का अवशोषण करना है।

  • ग्रासनली: इसमें कोई पाचन नहीं होता, यहाँ केवल ‘क्रमाकुंचन’ (Peristalsis) गति होती है।
  • ट्रिप्सिन: यह अग्न्याशय से निकलता है और छोटी आँत में प्रोटीन को अमीनो एसिड में बदलता है।
  • लाइपेज: यह एंजाइम वसा (Fat) के पाचन के लिए जिम्मेदार है।
  • इंसुलिन: यह अग्न्याशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) द्वारा स्रावित होता है, जो रक्त में शुगर को नियंत्रित करता है।


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