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Human Respiratory System: मानव श्वसन तंत्र क्या है, संरचना, अंग और कार्यप्रणाली MCQs, [PDF Download]

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Table of Contents

मानव श्वसन तंत्र Human respiratory system chart 📉

1. श्वसन (Respiration) क्या है?

(मानव श्वसन तंत्र)

​श्वसन वह प्रक्रिया है जिसमें जीव वायुमंडल से ऑक्सीजन (O_2) ग्रहण करते हैं और कोशिकाओं में मौजूद भोजन (ग्लूकोज) को तोड़कर ऊर्जा प्राप्त करते हैं। इस प्रक्रिया में कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) उप-उत्पाद के रूप में बाहर निकलती है।

रासायनिक समीकरण:

C6H12O6+6O26CO2+6H2O+ऊर्जा (ATP)C_6H_{12}O_6 + 6O_2 \rightarrow 6CO_2 + 6H_2O + \text{ऊर्जा (ATP)}

श्वसन के प्रकार :

श्वसन को मुख्य रूप से ऑक्सीजन की उपलब्धता और ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया के आधार पर दो प्रमुख प्रकारों में विभाजित किया गया है। इसके अलावा, स्थान के आधार पर भी इसके दो भेद होते हैं।

​यहाँ श्वसन के प्रकारों का विस्तृत विवरण दिया गया है:

1. कोशिकीय श्वसन के प्रकार (Based on Oxygen)

(मानव श्वसन तंत्र)

​कोशिकाओं के अंदर ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया को दो भागों में बाँटा जाता है:

क) वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration)

​यह श्वसन ऑक्सीजन (O_2) की उपस्थिति में होता है। अधिकांश उच्च श्रेणी के जीवों (मनुष्य, पशु, पक्षी) में यही श्वसन पाया जाता है।

स्थान: यह कोशिका के साइटोप्लाज्म (कोशिका द्रव्य) और माइटोकॉन्ड्रिया में पूरा होता है।

उत्पाद: इसमें ग्लूकोज पूरी तरह ऑक्सीकृत होकर कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2), जल (H_2O) और भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त करता है।

ऊर्जा: इसमें लगभग 38 ATP ऊर्जा के अणु बनते हैं।

समीकरण:

C6H12O6+6O26CO2+6H2O+38 ATPC_6H_{12}O_6 + 6O_2 \rightarrow 6CO_2 + 6H_2O + 38 \text{ ATP}

ख) अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration)

​यह श्वसन ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। यह मुख्य रूप से यीस्ट, जीवाणुओं और कभी-कभी हमारी मांसपेशियों में होता है।

स्थान: यह केवल साइटोप्लाज्म में होता है।

उत्पाद: इसमें ग्लूकोज का पूर्ण विखंडन नहीं होता। इसके उप-उत्पाद जीव के अनुसार अलग-अलग होते हैं:

  • यीस्ट में: एथिल अल्कोहल और CO_2 बनता है (किण्वन प्रक्रिया)।
  • मांसपेशियों में: जब हम भारी कसरत करते हैं, तो ऑक्सीजन की कमी होने पर मांसपेशियों में लैक्टिक एसिड बनता है (जिससे दर्द या ऐंठन होती है)।

ऊर्जा: इसमें बहुत कम ऊर्जा (2 ATP) प्राप्त होती है।

समीकरण:

C6H12O62 Lactic Acid+2 ATPC_6H_{12}O_6 \rightarrow 2\text{ Lactic Acid} + 2 \text{ ATP}
aerobic vs. anaerobic bacteria diagram

2. प्रक्रिया के स्थान के आधार पर प्रकार

(मानव श्वसन तंत्र)

​श्वसन प्रक्रिया शरीर के किस स्तर पर हो रही है, इस आधार पर भी इसके दो भाग हैं:

क) बाह्य श्वसन (External Respiration)

​इसे ‘साँस लेना’ (Breathing) भी कहते हैं। यह जीवों और पर्यावरण के बीच गैसों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया है।

  • ​इसमें फेफड़ों के माध्यम से वायुमंडल से O_2 ली जाती है और CO_2 छोड़ी जाती है।
  • ​यह एक भौतिक प्रक्रिया है, इसमें कोई एंजाइम काम नहीं करता।

ख) आंतरिक या कोशिकीय श्वसन (Internal Respiration)

​यह रक्त और शरीर की कोशिकाओं के बीच होने वाली प्रक्रिया है।

  • ​रक्त कोशिकाओं तक ऑक्सीजन पहुँचाता है और वहाँ से CO_2 लेकर वापस फेफड़ों तक आता है।
  • ​यह एक जैव-रासायनिक प्रक्रिया है जिसमें ऊर्जा मुक्त होती है।

मुख्य अंतर: एक नजर में

(मानव श्वसन तंत्र)

विशेषतावायवीय (Aerobic)अवायवीय (Anaerobic)
ऑक्सीजनअनिवार्य हैआवश्यकता नहीं
ऊर्जा उत्पादनबहुत अधिक (38 ATP)बहुत कम (2 ATP)
अंतिम उत्पादCO_2 और जलअल्कोहल या लैक्टिक एसिड
उदाहरणमनुष्य, कुत्ता, आम का पेड़यीस्ट, कुछ जीवाणु, मांसपेशियां

मानव श्वसन तंत्र:

मानव श्वसन तंत्र (Human Respiratory System) अंगों का एक ऐसा समूह है जो शरीर की कोशिकाओं और बाहरी वातावरण के बीच गैसों (ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड) के आदान-प्रदान के लिए जिम्मेदार है।

​नीचे इसके प्रमुख अंगों का विस्तार से विवरण दिया गया है:

नासिका (The External Nose)

(मानव श्वसन तंत्र)

​यह चेहरे पर उभरी हुई एक त्रिकोणीय संरचना है, जो मुख्य रूप से उपास्थि (Cartilage) और हड्डियों से बनी होती है।

  • नासा द्वार (Nostrils): नाक के निचले हिस्से में दो छिद्र होते हैं जिनसे वायु प्रवेश करती है। इन्हें ‘एक्सटर्नल नेयर्स’ भी कहते हैं।
  • नासा पट (Nasal Septum): नाक के बीच में एक दीवार होती है जो नासिका को दो बराबर भागों (दाएं और बाएं) में विभाजित करती है।

2. नासा गुहा (The Nasal Cavity)

(मानव श्वसन तंत्र)

​नासिका के छिद्र अंदर की ओर एक खाली स्थान में खुलते हैं, जिसे नासा गुहा कहा जाता है। यह ग्रसनी (Pharynx) तक फैली होती है। इसकी संरचना और कार्य बहुत महत्वपूर्ण हैं:

इसके मुख्य हिस्से और विशेषताएं:

  • नासिका रोम (Nasal Hair): नासा द्वार के पास छोटे-छोटे बाल होते हैं। इनका मुख्य कार्य धूल के बड़े कणों, मिट्टी और कीटों को अंदर जाने से रोकना है।
  • श्लेष्म झिल्ली (Mucous Membrane): पूरी नासा गुहा एक गीली झिल्ली से ढकी होती है, जो ‘म्यूकस’ (चिपचिपा पदार्थ) पैदा करती है। यह सूक्ष्म कीटाणुओं और बारीक धूल को चिपका लेती है।
  • रक्त वाहिकाओं का जाल: नासा गुहा की दीवारों में रक्त का संचार बहुत अधिक होता है। यह बहता हुआ गर्म रक्त बाहर से आने वाली ठंडी हवा को शरीर के तापमान के बराबर ले आता है।
  • घ्राण क्षेत्र (Olfactory Region): नासा गुहा के सबसे ऊपरी हिस्से में विशेष कोशिकाएं होती हैं जो हमें गंध (Smell) का अनुभव कराती हैं।

3. नासा गुहा के प्रमुख कार्य (Functions)

(मानव श्वसन तंत्र)

  1. वायु का शुद्धिकरण (Filtration): बाल और म्यूकस मिलकर हवा को छानते हैं ताकि फेफड़ों तक साफ हवा पहुँचे।
  2. तापमान नियंत्रण (Thermoregulation): चाहे बाहर कड़ाके की ठंड हो या गर्मी, नासा गुहा हवा के तापमान को शरीर के अनुकूल (लगभग 37°C) बना देती है।
  3. नमी प्रदान करना (Humidification): सूखी हवा फेफड़ों के ऊतकों को नुकसान पहुँचा सकती है। नासा गुहा हवा में नमी घोलकर उसे गीला बनाती है।
  4. स्वाद और गंध: गंध की पहचान करने के अलावा, यह भोजन के स्वाद को महसूस करने में भी मदद करती है।

महत्वपूर्ण तथ्य (Quick Facts)

(मानव श्वसन तंत्र)

  • साइनस (Sinuses): नासा गुहा के चारों ओर हड्डियों में कुछ खाली स्थान होते हैं जिन्हें साइनस कहते हैं। ये आवाज को गूँज (Resonance) प्रदान करते हैं और सिर के वजन को हल्का रखते हैं।
  • छींक आना: जब नासा गुहा में कोई बाहरी कण या उत्तेजक पदार्थ फंस जाता है, तो शरीर उसे बाहर निकालने के लिए छींक की प्रक्रिया अपनाता है।

ग्रसनी (pharynx) :

श्वसन और पाचन तंत्र के संगम स्थल के रूप में ग्रसनी (Pharynx) एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है। यह नासा गुहा के पीछे और भोजन नली (Esophagus) व श्वासनली (Trachea) के ऊपर स्थित होती है।

​नीचे ग्रसनी की संरचना और उसके कार्यों का विस्तार से विवरण दिया गया है:

ग्रसनी (Pharynx) की संरचना

(मानव श्वसन तंत्र)

​ग्रसनी लगभग 12 से 13 सेंटीमीटर लंबी एक पेशीय नली (Muscular Tube) होती है। इसे मुख्य रूप से तीन भागों में विभाजित किया गया है:

1. नासाग्रसनी (Nasopharynx)

​यह ग्रसनी का सबसे ऊपरी हिस्सा है, जो नासा गुहा (Nasal Cavity) के ठीक पीछे स्थित होता है।

  • कार्य: इसका उपयोग केवल श्वसन के लिए होता है।
  • विशेषता: यहाँ यूस्टेशियन ट्यूब (Eustachian Tube) खुलती है, जो मध्य कान को गले से जोड़ती है और कान के पर्दे के दोनों ओर हवा के दबाव को संतुलित करती है।

2. मुखग्रसनी (Oropharynx)

​यह ग्रसनी का मध्य भाग है, जो मुँह के पिछले हिस्से में स्थित होता है।

  • कार्य: यहाँ से भोजन और हवा दोनों गुजरते हैं।
  • विशेषता: इसमें टॉन्सिल्स (Tonsils) पाए जाते हैं, जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) का हिस्सा हैं और संक्रमण से लड़ने में मदद करते हैं।

3. अधोग्रसनी या स्वरयंत्रग्रसनी (Laryngopharynx)

​यह ग्रसनी का सबसे निचला हिस्सा है।

  • कार्य: यहाँ से मार्ग दो हिस्सों में बंट जाता है—एक हिस्सा भोजन नली में जाता है और दूसरा स्वरयंत्र (Larynx) के माध्यम से श्वासनली में।

ग्रसनी के प्रमुख कार्य (Functions of Pharynx)

(मानव श्वसन तंत्र)

  1. साझा मार्ग (Common Passage): यह पाचन तंत्र और श्वसन तंत्र दोनों के लिए एक साझा मार्ग के रूप में कार्य करता है। हवा को श्वासनली तक और भोजन को ग्रासनली तक पहुँचाना इसका काम है।
  2. भोजन निगलना (Swallowing): जब हम भोजन निगलते हैं, तो ग्रसनी की मांसपेशियां संकुचित होकर भोजन को नीचे धकेलती हैं।
  3. सुरक्षा (Protection): ग्रसनी में स्थित एपिग्लोटिस (Epiglottis) यह सुनिश्चित करता है कि भोजन गलती से भी श्वासनली में न जाए।
  4. ध्वनि गूँज (Resonance): यह स्वरयंत्र से निकलने वाली ध्वनि को गूँज प्रदान करके बोलने में सहायता करती है।
  5. प्रतिरक्षा (Immunity): टॉन्सिल्स के माध्यम से यह मुँह या नाक से प्रवेश करने वाले हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करने में मदद करती है।

स्वरयंत्र (Larynx):

स्वरयंत्र (Larynx), जिसे सामान्य भाषा में ‘वॉइस बॉक्स’ (Voice Box) भी कहा जाता है, श्वसन तंत्र का वह हिस्सा है जो ग्रसनी (Pharynx) और श्वासनली (Trachea) को जोड़ता है। यह न केवल हवा के मार्ग का काम करता है, बल्कि मनुष्य की बोलने की क्षमता के लिए भी जिम्मेदार है।

​नीचे स्वरयंत्र की संरचना और कार्यों का विस्तार से विवरण दिया गया है:

1. स्वरयंत्र की स्थिति और संरचना

(मानव श्वसन तंत्र)

​स्वरयंत्र गले के सामने वाले हिस्से में स्थित होता है। पुरुषों में यह थोड़ा उभरा हुआ दिखाई देता है, जिसे ‘एडम्स एप्पल’ (Adam’s Apple) कहा जाता है।

प्रमुख हिस्से:

  • उपास्थि (Cartilages): स्वरयंत्र मुख्य रूप से 9 उपास्थियों (Cartilages) से बना होता है। इनमें थायरॉयड उपास्थि सबसे बड़ी होती है जो इसे सामने से सुरक्षा प्रदान करती है।
  • एपिग्लोटिस (Epiglottis): यह स्वरयंत्र के सबसे ऊपरी भाग पर एक लोचदार ढक्कन की तरह होता है। भोजन निगलते समय यह स्वरयंत्र को ढक लेता है ताकि भोजन श्वासनली में न जाए।
  • वाक् तंतु (Vocal Cords): स्वरयंत्र के अंदर दो मांसपेशीय रेशे या झिल्लियाँ होती हैं जिन्हें वाक् तंतु कहते हैं। इनके बीच एक संकीर्ण द्वार होता है जिसे ‘ग्लोटिस’ (Glottis) कहा जाता है।

2. स्वरयंत्र के मुख्य कार्य (Functions of Larynx)

(मानव श्वसन तंत्र)

  1. ध्वनि उत्पादन (Phonation): जब फेफड़ों से हवा बाहर निकलती है और इन वाक् तंतुओं से टकराती है, तो उनमें कंपन (Vibration) पैदा होता है। इसी कंपन से ध्वनि उत्पन्न होती है। हमारी जीभ, होंठ और दाँत इस ध्वनि को शब्दों में बदलते हैं।
  2. श्वसन मार्ग की सुरक्षा: इसका सबसे महत्वपूर्ण कार्य निचले श्वसन मार्ग (फेफड़ों) में भोजन या पानी को जाने से रोकना है। यदि कुछ भी गलत मार्ग में जाता है, तो स्वरयंत्र तीव्र ‘खांसी’ (Cough Reflex) पैदा करता है ताकि वह पदार्थ बाहर निकल जाए।
  3. वायु मार्ग: यह ग्रसनी से आने वाली हवा को श्वासनली तक पहुँचाने का एक सुरक्षित रास्ता प्रदान करता है।
  4. हवा को छानना: स्वरयंत्र की आंतरिक दीवार पर बारीक रोम (Cilia) और म्यूकस होता है जो हवा में बचे हुए धूल के कणों को फँसा लेता है।

3. एडम्स एप्पल (Adam’s Apple) क्या है?

(मानव श्वसन तंत्र)

​किशोरावस्था (Puberty) के दौरान पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन के प्रभाव से थायरॉयड उपास्थि का आकार बढ़ जाता है और यह बाहर की ओर निकल आता है। इसी कारण पुरुषों की आवाज महिलाओं की तुलना में अधिक भारी और गहरी होती है।

4. स्वरयंत्र से जुड़ी सामान्य समस्याएँ

(मानव श्वसन तंत्र)

  • लैरिंजाइटिस (Laryngitis): स्वरयंत्र में सूजन या संक्रमण होने पर आवाज बैठ जाती है या भारी हो जाती है।
  • वाक् तंतुओं पर दबाव: बहुत अधिक चिल्लाने या गाने से वाक् तंतुओं पर छाले (Nodules) पड़ सकते हैं।

मानव श्वसन तंत्र (महत्वपूर्ण तथ्य):

  • ​स्वरयंत्र की लंबाई पुरुषों में लगभग 44 mm और महिलाओं में 36 mm होती है।
  • कंठ द्वार (Glottis): यह वाक् तंतुओं के बीच का वह स्थान है जहाँ से हवा गुजरती है।
  • ​पक्षियों में स्वरयंत्र की जगह ‘सिरिंक्स’ (Syrinx) पाया जाता है जिससे वे चहचहाते हैं।

श्वासनली (Trachea):

श्वासनली (Trachea) श्वसन तंत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह एक पाइप की तरह कार्य करती है जो स्वरयंत्र (Larynx) से आने वाली वायु को फेफड़ों तक पहुँचाती है। इसे सामान्य भाषा में ‘विंड पाइप’ (Windpipe) भी कहा जाता है।

​नीचे श्वासनली की संरचना और उसके कार्यों का विस्तार से विवरण दिया गया है:

1. श्वासनली की स्थिति और आकार

(मानव श्वसन तंत्र)

  • लंबाई: एक वयस्क मनुष्य में श्वासनली की लंबाई लगभग 10 से 12 सेंटीमीटर होती है।
  • व्यास: इसका व्यास लगभग 2 से 2.5 सेंटीमीटर होता है।
  • स्थान: यह गले में स्वरयंत्र के ठीक नीचे से शुरू होकर वक्ष गुहा (Chest Cavity) के मध्य तक जाती है, जहाँ यह दो भागों (Bronchi) में विभाजित हो जाती है।

2. श्वासनली की संरचना (Structure)

​श्वासनली की बनावट बहुत विशिष्ट होती है जो इसे अन्य नलियों से अलग बनाती है:

  • C-आकार के छल्ले (C-shaped Rings): श्वासनली में 16 से 20 ‘C’ आकार के छल्ले होते हैं जो हाइलाइन उपास्थि (Hyaline Cartilage) से बने होते हैं।
    • महत्व: ये छल्ले श्वासनली को मजबूती प्रदान करते हैं और इसे पिचकने (Collapse) से बचाते हैं, जिससे हवा का मार्ग हमेशा खुला रहता है (चाहे गले में हवा का दबाव कम ही क्यों न हो)।
    • C-आकार ही क्यों?: ये छल्ले पीछे से अधूरे होते हैं ताकि इसके ठीक पीछे स्थित भोजन नली (Esophagus) को भोजन निगलते समय फैलने के लिए जगह मिल सके।
  • आंतरिक परत (Inner Lining): श्वासनली की आंतरिक दीवार पर पक्ष्माभी उपकला (Ciliated Epithelium) कोशिकाएं होती हैं।
    • ​इसमें श्लेष्मा (Mucus) पैदा करने वाली कोशिकाएं होती हैं जो धूल और सूक्ष्मजीवों को चिपका लेती हैं।
    • ​इसके छोटे-छोटे बाल जैसे सीलिया (Cilia) लगातार ऊपर की ओर गति करते हैं, जिससे फंसी हुई गंदगी और बलगम गले की ओर धकेला जाता है ताकि उसे बाहर थूका जा सके या निगला जा सके।

3. श्वासनली के प्रमुख कार्य (Functions)

(मानव श्वसन तंत्र)

  1. वायु मार्ग: इसका मुख्य कार्य वायुमंडल से आने वाली ऑक्सीजन युक्त हवा को फेफड़ों तक पहुँचाना और फेफड़ों से आने वाली कार्बन डाइऑक्साइड को बाहर निकालना है।
  2. सुरक्षा (Filter): यह हवा को छानने का दूसरा स्तर है। जो धूल के कण नाक से बच निकलते हैं, उन्हें श्वासनली का म्यूकस और सीलिया रोक लेते हैं।
  3. तापमान और नमी: यह फेफड़ों में पहुँचने वाली हवा को और अधिक नम और शरीर के तापमान के अनुकूल बनाने में मदद करती है।
  4. खांसी की प्रक्रिया: यदि कोई बाहरी वस्तु श्वासनली में प्रवेश करती है, तो यहाँ की तंत्रिकाएं सक्रिय हो जाती हैं और ‘खांसी’ पैदा करती हैं ताकि वह वस्तु बाहर निकल जाए।

4. श्वासनली से जुड़ी सामान्य समस्याएं

  • ट्रैकाइटिस (Tracheitis): जीवाणु संक्रमण के कारण श्वासनली में सूजन।
  • अवरोध (Obstruction): भोजन के किसी टुकड़े या बाहरी वस्तु के फंसने से सांस रुकना (Choking)।

शिक्षक डायरी नोट (महत्वपूर्ण बिंदु):

  • ​श्वासनली का विभाजन वक्ष के 5वीं थोरैसिक वर्टिब्रा (T5) के स्तर पर होता है।
  • ​जहाँ श्वासनली दो भागों में बंटती है, उस बिंदु को ‘कैरिना’ (Carina) कहते हैं।

श्वसनी (Bronchi) और श्वसनिका (Bronchioles):

(मानव श्वसन तंत्र)

श्वसनी (Bronchi) और श्वसनिका (Bronchioles) श्वासनली (Trachea) और फेफड़ों के बीच के वे मार्ग हैं जो वायु को अंतिम छोर यानी वायु कोष्ठिकाओं (Alveoli) तक पहुँचाने का काम करते हैं। इन्हें ‘श्वसन वृक्ष’ (Respiratory Tree) भी कहा जाता है क्योंकि इनकी संरचना एक पेड़ की टहनियों जैसी होती है।

​नीचे इनका विस्तार से विवरण दिया गया है:

1. श्वसनी (Bronchi):

(मानव श्वसन तंत्र)

​जब श्वासनली (Trachea) वक्ष गुहा (Chest Cavity) के मध्य में पहुँचती है, तो यह दो मुख्य शाखाओं में विभाजित हो जाती है। इन्हें प्राथमिक श्वसनी (Primary Bronchi) कहते हैं।

  • दायां और बायां श्वसनी: दाईं श्वसनी बाएं की तुलना में अधिक चौड़ी, छोटी और अधिक सीधी (Vertical) होती है। इसी कारण यदि कोई बाहरी वस्तु श्वासनली में गिरती है, तो उसके दाएं फेफड़े में जाने की संभावना अधिक होती है।
  • संरचना: श्वासनली की तरह इनमें भी उपास्थि (Cartilage) के छल्ले पाए जाते हैं, जो इन्हें खुला रखने में मदद करते हैं।
  • विभाजन: फेफड़ों के अंदर प्रवेश करने के बाद ये और छोटी शाखाओं में बंट जाती हैं:
    1. द्वितीयक श्वसनी (Secondary Bronchi): जो फेफड़ों के प्रत्येक खंड (Lobe) में जाती हैं।
    2. तृतीयक श्वसनी (Tertiary Bronchi): जो और भी छोटे खंडों में विभाजित होती हैं।

2. श्वसनिका (Bronchioles)

​जब तृतीयक श्वसनी और भी अधिक सूक्ष्म शाखाओं में विभाजित हो जाती है और उनमें उपास्थि (Cartilage) के छल्ले समाप्त हो जाते हैं, तो उन्हें श्वसनिका (Bronchioles) कहा जाता है।

  • संरचना: इनमें उपास्थि नहीं होती, बल्कि इनकी दीवारें चिकनी मांसपेशियों (Smooth Muscles) से बनी होती हैं। ये मांसपेशियां वायु मार्ग को सिकोड़ने या फैलाने की क्षमता रखती हैं।
  • अंतिम श्वसनिका (Terminal Bronchioles): यह श्वसनिकाओं का सबसे अंतिम सिरा होता है जो वायु को श्वसन मार्ग के अंतिम छोर तक ले जाता है।
  • श्वसन श्वसनिका (Respiratory Bronchioles): ये सीधे वायु कोष्ठिकाओं (Alveoli) से जुड़ी होती हैं, जहाँ से गैसों का विनिमय शुरू हो सकता है।

3. श्वसनी और श्वसनिका के मुख्य कार्य

(मानव श्वसन तंत्र)

  1. वायु का वितरण: ये फेफड़ों के हर कोने तक ऑक्सीजन युक्त हवा पहुँचाने और कार्बन डाइऑक्साइड को वापस लाने का काम करती हैं।
  2. वायु मार्ग का नियंत्रण: श्वसनिकाएं अपनी मांसपेशियों के संकुचन और शिथिलन द्वारा यह नियंत्रित करती हैं कि फेफड़ों में कितनी हवा जाएगी। (अस्थमा के दौरान ये मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं जिससे सांस लेने में कठिनाई होती है)।
  3. सफाई और सुरक्षा: इनकी आंतरिक दीवारों पर भी ‘सीलिया’ (Cilia) और ‘म्यूकस’ होते हैं जो सूक्ष्म धूल के कणों को ऊपर की ओर धकेलते हैं ताकि फेफड़े सुरक्षित रहें।

4. मुख्य अंतर: एक नजर में

विशेषताश्वसनी (Bronchi)श्वसनिका (Bronchioles)
आकारआकार में बड़ी होती हैं।अत्यंत सूक्ष्म और पतली होती हैं।
उपास्थि (Cartilage)C-आकार के छल्ले पाए जाते हैं।उपास्थि अनुपस्थित होती है।
दीवारेंकठोर और मजबूत होती हैं।कोमल और मांसपेशियों वाली होती हैं।
स्थानश्वासनली के ठीक बाद शुरू होती हैं।श्वसन मार्ग के अंतिम छोर पर होती हैं।

परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण (Exam Fact):

  • ब्रोंकाइटिस (Bronchitis): जब श्वसनी (Bronchi) की आंतरिक परत में संक्रमण के कारण सूजन आ जाती है, तो उसे ब्रोंकाइटिस कहते हैं, जिससे बहुत अधिक खांसी और बलगम बनता है।

वायु कोष्ठिका (Alveoli):

वायु कोष्ठिका (Alveoli) श्वसन तंत्र की सबसे छोटी और कार्यात्मक इकाई (Functional Unit) है। यह फेफड़ों के श्वसन मार्ग का अंतिम सिरा है, जहाँ वास्तव में गैसों का विनिमय (Exchange of Gases) होता है। सरल शब्दों में कहें तो, यही वह जगह है जहाँ रक्त को ऑक्सीजन मिलती है और वह कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है।

​नीचे वायु कोष्ठिका की संरचना और कार्यों का विस्तृत विवरण दिया गया है:

1. संरचना (Structure)

​वायु कोष्ठिकाएं सूक्ष्म, अंगूर के गुच्छों जैसी छोटी-छोटी थैलियाँ होती हैं।

  • संख्या: एक वयस्क मनुष्य के दोनों फेफड़ों में लगभग 300 से 500 मिलियन वायु कोष्ठिकाएं होती हैं।
  • सतह का क्षेत्रफल: यदि इन सभी कोष्ठिकाओं को फैलाया जाए, तो इनका क्षेत्रफल लगभग 70 से 100 वर्ग मीटर (एक टेनिस कोर्ट के बराबर) होगा। यह विशाल क्षेत्रफल गैसों के तेजी से विनिमय में मदद करता है।
  • पतली दीवारें: इनकी दीवारें मात्र एक कोशिका जितनी पतली (Simple Squamous Epithelium) होती हैं, ताकि गैसें आसानी से आर-पार जा सकें।
  • रक्त वाहिकाओं का जाल: प्रत्येक कोष्ठिका चारों ओर से सूक्ष्म रक्त कोशिकाओं (Blood Capillaries) के जाल से घिरी होती है।

2. कार्यविधि (How it Works)

​वायु कोष्ठिकाओं में गैसों का आदान-प्रदान विसरण (Diffusion) प्रक्रिया द्वारा होता है:

  1. ऑक्सीजन का प्रवेश: जब हम सांस लेते हैं, तो कोष्ठिकाओं में ऑक्सीजन की सांद्रता (Concentration) रक्त की तुलना में अधिक होती है। इसलिए, ऑक्सीजन कोष्ठिका की पतली दीवार से होकर रक्त में चली जाती है।
  2. CO2 का बाहर निकलना: शरीर की कोशिकाओं से लाया गया रक्त कार्बन डाइऑक्साइड से भरा होता है। रक्त में CO_2 की सांद्रता कोष्ठिका की तुलना में अधिक होती है, इसलिए CO_2 रक्त से निकलकर कोष्ठिका में आ जाती है।
  3. सफाई: कोष्ठिकाओं में विशेष प्रकार की कोशिकाएं (Alveolar Macrophages) होती हैं जो वहाँ पहुँचने वाले धूल के सूक्ष्म कणों या बैक्टीरिया को नष्ट कर देती हैं।

3. सर्फैक्टेंट (Surfactant): एक विशेष पदार्थ

(मानव श्वसन तंत्र)

​वायु कोष्ठिकाओं की आंतरिक सतह पर एक तरल पदार्थ की परत होती है जिसे सर्फैक्टेंट कहते हैं।

  • कार्य: यह कोष्ठिकाओं के ‘पृष्ठ तनाव’ (Surface Tension) को कम करता है।
  • महत्व: यह सांस छोड़ते समय कोष्ठिकाओं को आपस में चिपकने या पिचकने (Collapse) से रोकता है। समय से पहले पैदा हुए बच्चों (Premature babies) में इसकी कमी के कारण सांस लेने में दिक्कत होती है।

4. मुख्य कार्य (Functions)

  1. गैसीय विनिमय का केंद्र: शरीर को जीवनदायी ऑक्सीजन प्रदान करना और विषाक्त CO_2 को बाहर निकालना।
  2. रक्त के pH का नियंत्रण: CO_2 के स्तर को संतुलित रखकर यह शरीर के एसिड-बेस बैलेंस (pH) को बनाए रखने में मदद करती है।

5. वायु कोष्ठिकाओं से जुड़ी बीमारियाँ

  • एम्फिसीमा (Emphysema): अधिक धूम्रपान करने से कोष्ठिकाओं की दीवारें नष्ट हो जाती हैं, जिससे फेफड़ों का सतही क्षेत्रफल कम हो जाता है और सांस फूलने लगती है।
  • निमोनिया (Pneumonia): संक्रमण के कारण कोष्ठिकाओं में तरल पदार्थ या मवाद भर जाता है, जिससे ऑक्सीजन का विनिमय ठीक से नहीं हो पाता।

शिक्षक डायरी नोट (महत्वपूर्ण तथ्य):

  • ​वायु कोष्ठिका की दीवार की मोटाई लगभग 0.2 से 0.5 माइक्रोन होती है।
  • ​श्वसन तंत्र की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई ‘वायु कोष्ठिका’ है।

फेफड़े (Lungs):

फेफड़े (Lungs) मानव श्वसन तंत्र के सबसे मुख्य अंग हैं। ये वक्ष गुहा (Chest Cavity) में स्थित स्पंजी और गुलाबी रंग के अंगों का एक जोड़ा है, जो गैसों के आदान-प्रदान के लिए जिम्मेदार हैं।

​नीचे फेफड़ों की संरचना और उनकी कार्यप्रणाली का विस्तृत विवरण दिया गया है:

1. फेफड़ों की स्थिति और बनावट

(मानव श्वसन तंत्र)

  • संख्या और स्थान: मनुष्य में दो फेफड़े (दायां और बायां) होते हैं। ये हृदय के दोनों ओर पसलियों के पिंजरे (Rib Cage) के अंदर सुरक्षित रहते हैं।
  • रंग और बनावट: स्वस्थ फेफड़े गुलाबी रंग के और कोमल (स्पंजी) होते हैं। धूम्रपान या प्रदूषण के कारण इनका रंग काला या गहरा स्लेटी हो सकता है।
  • सुरक्षात्मक आवरण (Pleura): प्रत्येक फेफड़ा एक दोहरी झिल्ली से ढका होता है जिसे प्लूरा (Pleura) कहते हैं। इन दोनों झिल्लियों के बीच ‘प्लूरल द्रव’ भरा होता है, जो सांस लेते समय फेफड़ों को घर्षण (Friction) से बचाता है।

2. दाएं और बाएं फेफड़े में अंतर

​प्रकृति ने दोनों फेफड़ों को थोड़ा अलग बनाया है ताकि शरीर के अन्य अंगों (जैसे हृदय) के लिए जगह बन सके:

विशेषतादायां फेफड़ा (Right Lung)बायां फेफड़ा (Left Lung)
आकारयह चौड़ा और भारी होता है।यह थोड़ा लंबा और संकरा होता है।
खंड (Lobes)इसमें 3 खंड होते हैं (ऊपरी, मध्य, निचला)।इसमें केवल 2 खंड होते हैं।
हृदय की जगहयहाँ हृदय के लिए जगह नहीं होती।इसमें ‘कार्डियक नॉच’ (एक गड्ढा) होता है जहाँ हृदय फिट होता है।
वजनलगभग 625 ग्राम।लगभग 565 ग्राम।

3. फेफड़ों की आंतरिक संरचना

​फेफड़े अंदर से खोखले नहीं होते, बल्कि यह नलिकाओं और थैलियों का एक जाल है:

  • श्वसन वृक्ष: श्वासनली से शुरू होकर श्वसनी (Bronchi) और श्वसनिका (Bronchioles) फेफड़ों के कोने-कोने तक फैली होती हैं।
  • वायु कोष्ठिका (Alveoli): फेफड़ों का मुख्य काम इन्हीं सूक्ष्म थैलियों में होता है। फेफड़ों का अधिकांश आयतन इन्हीं कोष्ठिकाओं से बना होता है।
  • रक्त वाहिकाएं: फेफड़ों में ‘पल्मोनरी धमनी’ अशुद्ध रक्त लाती है और ‘पल्मोनरी शिरा’ शुद्ध (ऑक्सीजन युक्त) रक्त को वापस हृदय तक ले जाती है।

4. फेफड़ों के प्रमुख कार्य (Functions)

  1. गैसीय विनिमय: हवा से ऑक्सीजन लेकर उसे रक्त में मिलाना और रक्त से कार्बन डाइऑक्साइड लेकर उसे बाहर निकालना।
  2. रक्त का शुद्धिकरण: यह शरीर का एकमात्र ऐसा अंग है जहाँ रक्त को ताजी ऑक्सीजन मिलती है।
  3. pH संतुलन: शरीर में CO_2 की मात्रा को नियंत्रित करके यह रक्त के अम्लीय या क्षारीय स्तर को संतुलित रखता है।
  4. सुरक्षा: फेफड़ों में मौजूद बलगम (Mucus) और सूक्ष्म बाल (Cilia) धूल और कीटाणुओं को शरीर के अंदर जाने से रोकते हैं।

5. फेफड़ों की क्षमता (Lung Capacity)

  • टाईडल वॉल्यूम: सामान्य अवस्था में एक बार में हम लगभग 500 ml हवा अंदर लेते हैं।
  • कुल क्षमता (Total Lung Capacity): एक वयस्क मनुष्य के फेफड़ों में अधिकतम 5 से 6 लीटर हवा समा सकती है।

6. फेफड़ों से जुड़ी मुख्य बीमारियाँ

  • अस्थमा (Asthma): वायुमार्ग में सूजन के कारण सांस लेने में तकलीफ।
  • तपेदिक (Tuberculosis – TB): बैक्टीरिया के कारण फेफड़ों में होने वाला गंभीर संक्रमण।
  • फेफड़ों का कैंसर: मुख्य रूप से धूम्रपान के कारण होने वाली बीमारी।
  • ब्रोंकाइटिस: श्वसन नलिकाओं में सूजन और बहुत अधिक बलगम बनना।

शिक्षक डायरी नोट (महत्वपूर्ण तथ्य):

  • ​फेफड़ों के अध्ययन को पल्मोनोलॉजी (Pulmonology) कहा जाता है।
  • ​दायां फेफड़ा बाएं से लगभग 10% भारी होता है।
  • ​फेफड़े पानी पर तैर सकते हैं क्योंकि इनमें लाखों वायु कोष्ठिकाएं होती हैं जो हवा से भरी रहती हैं।

डायाफ्राम (Diaphragm):

(मानव श्वसन तंत्र)

डायाफ्राम (Diaphragm), जिसे ‘मध्यपट’ भी कहा जाता है, मानव श्वसन तंत्र की सबसे महत्वपूर्ण मांसपेशी है। यह वक्ष गुहा (Chest Cavity) और उदर गुहा (Abdominal Cavity) को एक-दूसरे से अलग करने वाली एक विभाजक दीवार की तरह कार्य करता है।

​नीचे डायाफ्राम की संरचना और श्वसन में इसकी भूमिका का विस्तृत विवरण दिया गया है:

1. संरचना (Structure)

(मानव श्वसन तंत्र)

  • आकार: यह गुंबद के आकार (Dome-shaped) की एक चौड़ी मांसपेशी है। जब यह विश्राम की स्थिति में होती है, तो ऊपर की ओर उभरी हुई दिखाई देती है।
  • बनावट: यह कंकाल पेशी (Skeletal Muscle) और रेशेदार ऊतकों से बना होता है। इसके बीच में एक मजबूत टेंडन होता है जिसे ‘सेंट्रल टेंडन’ कहते हैं।
  • स्थिति: यह फेफड़ों के ठीक नीचे और हृदय के आधार पर स्थित होता है। इसके नीचे लीवर, आमाशय और तिल्ली जैसे अंग होते हैं।

2. श्वसन में डायाफ्राम की भूमिका (Mechanism of Breathing)

(मानव श्वसन तंत्र)

​सांस लेने की प्रक्रिया पूरी तरह से डायाफ्राम की गति पर निर्भर करती है:

क) अंतःश्वसन (Inhalation – सांस अंदर लेना)

​जब हम सांस लेते हैं, तो डायाफ्राम की मांसपेशियां संकुचित (Contract) होती हैं।

  • प्रक्रिया: संकुचित होने पर डायाफ्राम नीचे की ओर खिंचता है और चपटा (Flat) हो जाता है।
  • परिणाम: इससे वक्ष गुहा (छाती) का आयतन बढ़ जाता है और फेफड़ों के अंदर वायु का दबाव कम हो जाता है। बाहर की हवा तेजी से फेफड़ों में भर जाती है।

ख) उच्छ्वसन (Exhalation – सांस बाहर छोड़ना)

​जब हम सांस छोड़ते हैं, तो डायाफ्राम शिथिल (Relax) हो जाता है।

  • प्रक्रिया: यह वापस अपनी मूल गुंबद जैसी स्थिति में ऊपर की ओर आ जाता है।
  • परिणाम: इससे छाती का आयतन कम हो जाता है और फेफड़ों पर दबाव बढ़ता है, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड युक्त हवा बाहर निकल जाती है।

3. डायाफ्राम के अन्य महत्वपूर्ण कार्य

(मानव श्वसन तंत्र)

  1. अंगों का विभाजन: यह छाती के नाजुक अंगों (फेफड़े, हृदय) को पेट के पाचन अंगों से अलग रखता है।
  2. दबाव का नियंत्रण: यह खाँसने, छींकने, उल्टी करने और मल त्याग के दौरान उदर के अंदर दबाव (Intra-abdominal pressure) बढ़ाने में मदद करता है।
  3. रक्त संचार: डायाफ्राम की गति हृदय की ओर रक्त के प्रवाह को बेहतर बनाने में भी सहायक होती है।

4. हिचकी (Hiccups) क्यों आती है?

(मानव श्वसन तंत्र)

​हिचकी का सीधा संबंध डायाफ्राम से है। जब डायाफ्राम में अचानक अनैच्छिक संकुचन (Involuntary contraction) होता है, तो हवा तेजी से अंदर आती है। यह हवा जब स्वरयंत्र (Larynx) से टकराती है, तो एपिग्लोटिस अचानक बंद हो जाता है, जिससे “हिक” (Hic) की ध्वनि निकलती है।

5. मुख्य बिंदु (मानव श्वसन तंत्र)

(मानव श्वसन तंत्र)

  • फ्रेनिक नर्व (Phrenic Nerve): यह वह मुख्य तंत्रिका है जो मस्तिष्क से डायाफ्राम तक संकेत पहुँचाती है और श्वसन को नियंत्रित करती है।
  • भोजन और श्वसन: अधिक भोजन करने पर आमाशय डायाफ्राम पर दबाव डालता है, जिससे कभी-कभी गहरी सांस लेने में कठिनाई होती है।
  • डायाफ्राम में चोट: यदि किसी दुर्घटना में डायाफ्राम क्षतिग्रस्त हो जाए, तो व्यक्ति की तुरंत मृत्यु हो सकती है क्योंकि सांस लेने की प्रक्रिया रुक जाती है।

मानव श्वसन तंत्र संबंधी अन्य महत्वपूर्ण अंग एवं विशेष:

(मानव श्वसन तंत्र)

श्वसन तंत्र में प्रमुख अंगों के अलावा कुछ ऐसी सहायक संरचनाएं और प्रक्रियाएं भी शामिल हैं, जो इस पूरे सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने में मदद करती हैं।

​यहाँ श्वसन से संबंधित अन्य महत्वपूर्ण अंग और शेष विवरण दिए गए हैं:

1. पसलियाँ और उनकी मांसपेशियां (Ribs and Intercostal Muscles)

(मानव श्वसन तंत्र)

​फेफड़े अपने आप नहीं फैल सकते, उन्हें फैलाने में डायाफ्राम के साथ पसलियों का बड़ा हाथ होता है।

  • पसलियां (Rib Cage): ये फेफड़ों को बाहरी चोट से बचाती हैं।
  • अंतरापर्शुक मांसपेशियां (Intercostal Muscles): ये पसलियों के बीच स्थित होती हैं।
    • ​जब ये सिकुड़ती हैं, तो पसलियां ऊपर और बाहर की ओर आती हैं, जिससे फेफड़ों में हवा भरने के लिए जगह बनती है।
Ribs and intercostal muscles

2. प्लूरा झिल्ली (Pleural Membrane)

​यह फेफड़ों के ऊपर पाया जाने वाला एक सुरक्षा कवच है।

  • ​यह दो परतों वाली झिल्ली होती है।
  • ​इनके बीच प्लूरल द्रव (Pleural Fluid) भरा होता है।
  • कार्य: यह द्रव सांस लेते समय फेफड़ों और पसलियों के बीच होने वाले घर्षण (Friction) को कम करता है और फेफड़ों को बाहरी झटकों से बचाता है।

3. श्वसन का नियंत्रण (Control of Respiration)

(मानव श्वसन तंत्र)

​हम चाहकर भी अपनी सांस को बहुत देर तक नहीं रोक सकते, क्योंकि इसका नियंत्रण मस्तिष्क द्वारा होता है।

  • मेडुला ओब्लांगेटा (Medulla Oblongata): मस्तिष्क का यह पिछला हिस्सा श्वसन की दर और लय को नियंत्रित करता है।
  • पॉन्स (Pons): यह मस्तिष्क का वह हिस्सा है जो सांस लेने की अवधि (जैसे गहरी सांस या छोटी सांस) को नियंत्रित करता है।

4. मानव श्वसन तंत्र संबंधी महत्वपूर्ण शब्दावली (Important Terms)

शब्दअर्थ
टाइडल वॉल्यूम (Tidal Volume)एक सामान्य सांस में ली गई या छोड़ी गई हवा की मात्रा (लगभग 500 ml)।
वाइटल कैपेसिटी (Vital Capacity)वह अधिकतम हवा जो एक व्यक्ति गहरी सांस लेने के बाद बाहर छोड़ सकता है।
रेसिड्यूअल वॉल्यूम (Residual Volume)फेफड़ों से पूरी ताकत लगाकर हवा बाहर निकालने के बाद भी जो हवा फेफड़ों में बच जाती है।
हाइपोक्सिया (Hypoxia)शरीर के ऊतकों में ऑक्सीजन की कमी होना।
एस्फिक्सिया (Asphyxia)हवा की कमी या किसी अवरोध के कारण दम घुटना।

5. मानव श्वसन तंत्र के रोग (Respiratory Disorders)

  1. अस्थमा (Asthma): श्वसनिकाओं (Bronchioles) में सूजन और संकुचन के कारण सांस लेने में घरघराहट होना।
  2. एम्फिसीमा (Emphysema): सिगरेट के धुएं या प्रदूषण से वायु कोष्ठिकाओं (Alveoli) का नष्ट हो जाना। इसमें गैसों के विनिमय के लिए जगह कम हो जाती है।
  3. व्यावसायिक श्वसन रोग (Occupational Diseases): पत्थर तोड़ने या कोयले की खान में काम करने वाले लोगों के फेफड़ों में धूल जमने से होने वाली बीमारी (जैसे- सिलिकोसिस)।
  4. साइनस (Sinusitis): नाक के पास की हड्डियों के खाली स्थानों (Sinuses) में सूजन और बलगम भरना।

6. श्वसन दर (Breathing Rate)

WHO Health Topics

  • नवजात शिशु: 30-60 बार प्रति मिनट।
  • वयस्क मनुष्य: 12-16 बार प्रति मिनट।
  • सोते समय: श्वसन दर कम हो जाती है।
  • कसरत करते समय: यह दर 25-30 बार प्रति मिनट तक पहुँच सकती है।

मानव श्वसन तंत्र (Quick Revision):

  • ​श्वसन एक अनैच्छिक प्रक्रिया है जिसे मस्तिष्क का ‘मेडुला’ नियंत्रित करता है।
  • ​रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर बढ़ना हमें सांस लेने के लिए प्रेरित करता है (न कि केवल ऑक्सीजन की कमी)।
  • ​शुद्ध हवा में 21% ऑक्सीजन होती है, जबकि छोड़ी गई हवा में लगभग 16% ऑक्सीजन और 4% CO2 होती है।

मानव श्वसन तंत्र: महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)

स्तर: सरल (Basic)

NCERT Class 11 Biology Chapter 17

  1. मानव शरीर में गैसों का विनिमय कहाँ होता है? (A) श्वासनली (B) ग्रसनी (C) वायु कोष्ठिका (D) स्वरयंत्र उत्तर: (C) वायु कोष्ठिका
  2. श्वसन किस प्रकार की प्रक्रिया है? (A) अपचयी (Catabolic) (B) उपचयी (Anabolic) (C) दोनों (D) इनमें से कोई नहीं उत्तर: (A) अपचयी
  3. सामान्य वयस्क की औसत श्वसन दर क्या है? (A) 72/मिनट (B) 12-16/मिनट (C) 20-30/मिनट (D) 5-10/मिनट उत्तर: (B) 12-16/मिनट
  4. ‘वॉयस बॉक्स’ किसे कहा जाता है? (A) ग्रसनी (B) श्वासनली (C) स्वरयंत्र (D) नासिका उत्तर: (C) स्वरयंत्र
  5. सांस छोड़ते समय डायाफ्राम की स्थिति क्या होती है? (A) चपटा (B) गुंबद के आकार का (C) संकुचित (D) नीचे की ओर उत्तर: (B) गुंबद के आकार का

स्तर: मध्यम (Intermediate)

  1. श्वसन के दौरान ऊर्जा किस रूप में मुक्त होती है? (A) ग्लूकोज (B) ATP (C) ADP (D) NADP उत्तर: (B) ATP
  2. रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन किसके द्वारा होता है? (A) प्लाज्मा (B) हीमोग्लोबिन (C) श्वेत रक्त कोशिकाएं (D) प्लेटलेट्स उत्तर: (B) हीमोग्लोबिन
  3. भोजन निगलते समय श्वासनली को कौन ढकता है? (A) ग्लोटिस (B) एपिग्लोटिस (C) फेरिंक्स (D) लैरिंक्स उत्तर: (B) एपिग्लोटिस
  4. फेफड़ों के चारों ओर पाई जाने वाली झिल्ली क्या कहलाती है? (A) पेरिकार्डियम (B) पेरिटोनियम (C) प्लूरा (D) म्यूकस उत्तर: (C) प्लूरा
  5. मांसपेशियों में ऑक्सीजन की कमी से कौन सा अम्ल बनता है? (A) एसिटिक अम्ल (B) लैक्टिक अम्ल (C) सिट्रिक अम्ल (D) ऑक्जेलिक अम्ल उत्तर: (B) लैक्टिक अम्ल

स्तर: कठिन (Advanced)

  1. कोशिकीय श्वसन का ‘पावरहाउस’ किसे कहते हैं? (A) राइबोसोम (B) लाइसोसोम (C) माइटोकॉन्ड्रिया (D) केंद्रक उत्तर: (C) माइटोकॉन्ड्रिया
  2. ग्लाइकोलाइसिस की प्रक्रिया कोशिका के किस भाग में होती है? (A) माइटोकॉन्ड्रिया (B) कोशिका द्रव्य (C) गॉल्जीकाय (D) रिक्तिका उत्तर: (B) कोशिका द्रव्य (Cytoplasm)
  3. वायवीय श्वसन में ग्लूकोज के एक अणु से कितने ATP बनते हैं? (A) 2 (B) 4 (C) 36 या 38 (D) 40 उत्तर: (C) 36 या 38
  4. मस्तिष्क का कौन सा भाग श्वसन दर को नियंत्रित करता है? (A) प्रमस्तिष्क (B) अनुमस्तिष्क (C) मेडुला ओब्लांगेटा (D) हाइपोथैलेमस उत्तर: (C) मेडुला ओब्लांगेटा
  5. फेफड़ों की कुल क्षमता (Total Lung Capacity) कितनी होती है? (A) 2-3 लीटर (B) 5-6 लीटर (C) 10 लीटर (D) 1 लीटर उत्तर: (B) 5-6 लीटर

मानव श्वसन तंत्र: अभ्यास प्रश्न (Part 2: प्रश्न 16-50)

NIH Respiratory System Guide

  1. फेफड़ों की संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई क्या है? (A) नेफ्रॉन (B) न्यूरॉन (C) वायु कोष्ठिका (Alveoli) (D) पल्मोनरी धमनी उत्तर: (C)
  2. मछलियां किस अंग द्वारा श्वसन करती हैं? (A) त्वचा (B) गलफड़े (Gills) (C) फेफड़े (D) मुख गुहा उत्तर: (B)
  3. मनुष्य की श्वासनली (Trachea) की लंबाई लगभग कितनी होती है? (A) 5-7 सेमी (B) 10-12 सेमी (C) 20-25 सेमी (D) 15-18 सेमी उत्तर: (B)
  4. हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन के साथ जुड़कर क्या बनाता है? (A) कार्बोक्सीहीमोग्लोबिन (B) ऑक्सीहीमोग्लोबिन (C) मेथेमोग्लोबिन (D) इनमें से कोई नहीं उत्तर: (B)
  5. सांस लेते समय पसलियों की स्थिति क्या होती है? (A) नीचे गिरती हैं (B) स्थिर रहती हैं (C) ऊपर और बाहर की ओर खिंचती हैं (D) अंदर की ओर सिकुड़ती हैं उत्तर: (C)
  6. केंचुए (Earthworm) श्वसन किसके माध्यम से करते हैं? (A) फेफड़े (B) श्वासनली (C) नम त्वचा (Moist Skin) (D) गलफड़े उत्तर: (C)
  7. सामान्य श्वसन के दौरान जो हवा अंदर या बाहर की जाती है, उसे क्या कहते हैं? (A) वाइटल कैपेसिटी (B) टाइडल वॉल्यूम (C) रेसिड्यूअल वॉल्यूम (D) कुल क्षमता उत्तर: (B)
  8. श्वसन के दौरान CO_2 का अधिकांश परिवहन किस रूप में होता है? (A) बाईकार्बोनेट आयन (B) हीमोग्लोबिन (C) घुलित गैस (D) कार्बोनेट उत्तर: (A)
  9. ‘एडम्स एप्पल’ (Adam’s Apple) किसका उभरा हुआ भाग है? (A) श्वासनली (B) थायरॉयड उपास्थि (C) एपिग्लोटिस (D) मुख गुहा उत्तर: (B)
  10. कोशिकीय श्वसन का दूसरा नाम क्या है? (A) बाह्य श्वसन (B) आंतरिक श्वसन (C) सांस लेना (D) दहन उत्तर: (B)
  11. फेफड़ों में हवा भरने का मुख्य कारण क्या है? (A) फेफड़ों का खिंचाव (B) वायुमंडलीय दबाव में अंतर (C) हृदय की धड़कन (D) गुरुत्वाकर्षण उत्तर: (B)
  12. गैसों का विनिमय किस भौतिक प्रक्रिया द्वारा होता है? (A) परासरण (Osmosis) (B) विसरण (Diffusion) (C) अवशोषण (D) वाष्पीकरण उत्तर: (B)
  13. किण्वन (Fermentation) की प्रक्रिया में क्या बनता है? (A) पानी (B) लैक्टिक एसिड (C) एथिल अल्कोहल (D) साइट्रिक एसिड उत्तर: (C)
  14. एक बार में अधिकतम हवा बाहर निकालने के बाद फेफड़ों में बची हवा को क्या कहते हैं? (A) टाइडल वॉल्यूम (B) अवशेष आयतन (Residual Volume) (C) वाइटल वॉल्यूम (D) डेड स्पेस उत्तर: (B)
  15. श्वसन तंत्र में ‘C’ आकार के छल्ले कहाँ पाए जाते हैं? (A) श्वासनली (B) ग्रसनी (C) फेफड़े (D) नासिका उत्तर: (A)
  16. अस्थमा रोग में श्वसन तंत्र का कौन सा भाग प्रभावित होता है? (A) नासिका (B) स्वरयंत्र (C) श्वसनी और श्वसनिका (D) डायाफ्राम उत्तर: (C)
  17. दाएं फेफड़े में कितने खंड (Lobes) होते हैं? (A) 2 (B) 3 (C) 4 (D) 5 उत्तर: (B)
  18. बाएं फेफड़े में कितने खंड होते हैं? (A) 2 (B) 3 (C) 1 (D) 4 उत्तर: (A)
  19. ऊंचाई पर जाने पर श्वसन दर पर क्या प्रभाव पड़ता है? (A) घटती है (B) बढ़ती है (C) स्थिर रहती है (D) शून्य हो जाती है उत्तर: (B)
  20. फेफड़ों की कुल क्षमता कितनी होती है? (A) 3 लीटर (B) 4 लीटर (C) 5.8 से 6 लीटर (D) 10 लीटर उत्तर: (C)
  21. रक्त का शुद्धिकरण (ऑक्सीजनीकरण) कहाँ होता है? (A) हृदय (B) यकृत (C) फेफड़े (D) वृक्क (Kidney) उत्तर: (C)
  22. अनॉक्सी (Anaerobic) श्वसन में अंत में कितनी ऊर्जा प्राप्त होती है? (A) 38 ATP (B) 2 ATP (C) 10 ATP (D) 8 ATP उत्तर: (B)
  23. श्वसन मापन के लिए किस यंत्र का उपयोग किया जाता है? (A) बैरोमीटर (B) स्पाइरोमीटर (C) स्टेथोस्कोप (D) स्फिग्मोमैनोमीटर उत्तर: (B)
  24. एम्फिसीमा रोग का मुख्य कारण क्या है? (A) जल प्रदूषण (B) वायु प्रदूषण/धूम्रपान (C) शोर प्रदूषण (D) अनुवांशिकता उत्तर: (B)
  25. सर्फैक्टेंट (Surfactant) का निर्माण कहाँ होता है? (A) ग्रसनी (B) एल्वियोली (C) श्वासनली (D) स्वरयंत्र उत्तर: (B)
  26. प्लूरल द्रव (Pleural Fluid) का मुख्य कार्य क्या है? (A) ऊर्जा देना (B) घर्षण कम करना (C) ऑक्सीजन पहुँचाना (D) रक्त जमाना उत्तर: (B)
  27. कोशिका का ऊर्जा गृह (Powerhouse) किसे कहते हैं? (A) केंद्रक (B) माइटोकॉन्ड्रिया (C) राइबोसोम (D) क्लोरोप्लास्ट उत्तर: (B)
  28. फेफड़ों के अध्ययन को क्या कहा जाता है? (A) कार्डियोलॉजी (B) पल्मोनोलॉजी (C) नेफ्रोलॉजी (D) हेपेटोलॉजी उत्तर: (B)
  29. श्वसन के दौरान बाहर निकाली गई वायु में O_2 की मात्रा कितनी होती है? (A) 21% (B) 16% (C) 4% (D) 0.03% उत्तर: (B)
  30. बाहर निकाली गई वायु में CO_2 की मात्रा कितनी होती है? (A) 16% (B) 4% (C) 21% (D) 0.03% उत्तर: (B)
  31. हीमोग्लोबिन की सबसे अधिक बंधुता (Affinity) किस गैस के प्रति होती है? (A) ऑक्सीजन (B) कार्बन डाइऑक्साइड (C) कार्बन मोनोऑक्साइड (D) नाइट्रोजन उत्तर: (C)
  32. क्रैब्स चक्र (Kreb’s Cycle) की प्रक्रिया कहाँ संपन्न होती है? (A) कोशिका द्रव्य (B) माइटोकॉन्ड्रिया (C) राइबोसोम (D) लाइसोसोम उत्तर: (B)
  33. डायाफ्राम को तंत्रिका संकेत कौन सी तंत्रिका पहुँचाती है? (A) वेगस नर्व (B) फ्रेनिक नर्व (C) ऑप्टिक नर्व (D) ऑडिटरी नर्व उत्तर: (B)
  34. भोजन और वायु का उभयनिष्ठ मार्ग कौन सा है? (A) श्वासनली (B) ग्रसनी (C) स्वरयंत्र (D) नासिका उत्तर: (B)
  35. फेफड़ों के कैंसर का सबसे बड़ा जोखिम कारक क्या है? (A) शराब (B) तंबाकू धूम्रपान (C) मीठा भोजन (D) व्यायाम की कमी उत्तर: (B)


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