समास और समास विग्रह | 100+ उदाहरण | PDF Download Now
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समास की परिभाषा (Definition)
दो या दो से अधिक शब्दों के मेल से जब एक नया और सार्थक शब्द बनता है, तो उस मेल को समास कहते हैं।
- सामासिक शब्द (समस्त पद): समास के नियमों से बना शब्द।
- समास-विग्रह: सामासिक शब्द के बीच के संबंध को स्पष्ट करना या उन्हें अलग-अलग करना ‘विग्रह’ कहलाता है।
समास की सरल परिभाषा
”दो या दो से अधिक शब्दों (पदों) को मिलाकर एक नया, छोटा और अर्थपूर्ण शब्द बनाने की प्रक्रिया को समास कहते हैं।”
इसका मुख्य उद्देश्य शब्दों को संक्षिप्त (छोटा) करना होता है, ताकि कम शब्दों में बड़ी बात कही जा सके।
उदाहरण के माध्यम से समझें:
| विग्रह (विस्तृत रूप) | समस्त पद (समास) |
|---|---|
| रसोई के लिए घर | रसोईघर |
| घोड़े पर सवार | घुड़सवार |
| कमल के समान नयन | कमलनयन |
| चार राहों का समूह | चौराहा |
समास के मुख्य भेद
हिंदी व्याकरण में समास और समास विग्रह की प्रक्रिया को समझने के लिए इसके छह प्रकारों का गहराई से अध्ययन करना आवश्यक है। प्रत्येक समास की अपनी विशिष्ट पहचान और नियम होते हैं।
अव्ययीभाव समास (Avyayibhav Samas) –
परिभाषा:
जिस समास में पहला पद (पूर्व पद) प्रधान हो और वह अव्यय हो, उसे अव्ययीभाव समास कहते हैं। समास होने के बाद पूरा शब्द (समस्त पद) भी अव्यय की तरह ही व्यवहार करता है।
अव्यय का अर्थ: ऐसे शब्द जिन पर लिंग, वचन, कारक या काल का कोई प्रभाव नहीं पड़ता और वे हमेशा एक जैसे रहते हैं (जैसे: यथा, प्रति, भर, आ)।
अव्ययीभाव समास की मुख्य पहचान (Tips & Tricks)
इस समास को पहचानने के कुछ आसान तरीके हैं:
- उपसर्ग का प्रयोग: शब्द की शुरुआत अक्सर उपसर्गों से होती है जैसे- यथा, प्रति, आ, भर, हर, नि, अनु, बे, उप आदि।
- शब्दों की पुनरावृत्ति: जब एक ही शब्द दो बार आए, तो वहाँ भी अव्ययीभाव समास होता है (जैसे: घर-घर, साफ-साफ)।
- क्रिया विशेषण: समस्त पद वाक्य में क्रिया की विशेषता बताता है।
समास और समास विग्रह के प्रमुख उदाहरण
यहाँ अव्ययीभाव समास के उदाहरणों को विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है:
A. ‘यथा’ उपसर्ग वाले उदाहरण (के अनुसार)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| यथाशक्ति | शक्ति के अनुसार |
| यथाविधि | विधि के अनुसार |
| यथासंभव | जैसा संभव हो |
| यथामति | मति (बुद्धि) के अनुसार |
B. ‘प्रति’ उपसर्ग वाले उदाहरण (हर/प्रत्येक)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| प्रतिदिन | प्रत्येक दिन (हर दिन) |
| प्रत्येक | एक-एक |
| प्रतिमास | हर महीने |
| प्रत्यक्ष | आँखों के सामने (अक्षि के आगे) |
C. अन्य महत्वपूर्ण उपसर्ग वाले उदाहरण
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| आजन्म | जन्म से लेकर |
| आमरण | मृत्यु तक |
| भरपेट | पेट भरकर |
| निडर | डर के बिना |
| बेकाम | बिना काम के |
| अनुरूप | रूप के योग्य |
D. शब्दों की पुनरावृत्ति (Doubling of Words)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| घर-घर | प्रत्येक घर |
| रातोंरात | रात ही रात में |
| हाथोंहाथ | एक हाथ से दूसरे हाथ में |
| साफ-साफ | बिल्कुल साफ |
त्वरित सूची
| श्रेणी | उदाहरण | विग्रह का तरीका |
|---|---|---|
| समय सूचक | यथासमय | समय के अनुसार |
| स्थान सूचक | प्रत्यक्ष | आँखों के सामने |
| अभाव सूचक | बेरहम | रहम के बिना |
| पुनरावृत्ति | पल-पल | प्रत्येक पल |
2. तत्पुरुष समास (Tatpurush Samas) –
परिभाषा:
जिस समास में दूसरा पद (उत्तर पद) प्रधान होता है तथा प्रथम पद गौण होता है, उसे तत्पुरुष समास कहते हैं। इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि सामासिक पद बनाते समय दोनों पदों के बीच की कारक विभक्ति (Case endings) का लोप हो जाता है।
उदाहरण:
- समस्त पद: राजपुत्र
- समास विग्रह: राजा का पुत्र (यहाँ ‘का’ विभक्ति का लोप हुआ है)
तत्पुरुष समास के भेद (विभक्तियों के आधार पर)
कारक चिन्हों के अनुसार तत्पुरुष समास के मुख्य 6 उपभेद होते हैं। समास और समास विग्रह करते समय इन चिन्हों को पहचानना अनिवार्य है:
(क) कर्म तत्पुरुष (विभक्ति: ‘को’ का लोप)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| गगनचुंबी | गगन को चूमने वाला |
| जेबकतरा | जेब को कतरने वाला |
| यशप्राप्त | यश को प्राप्त |
(ख) करण तत्पुरुष (विभक्ति: ‘से’, ‘के द्वारा’ का लोप)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| करुणापूर्ण | करुणा से पूर्ण |
| तुलसीकृत | तुलसी द्वारा कृत (रचित) |
| भयाकुल | भय से आकुल |
(ग) संप्रदान तत्पुरुष (विभक्ति: ‘के लिए’ का लोप)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| प्रयोगशाला | प्रयोग के लिए शाला |
| देशभक्ति | देश के लिए भक्ति |
| गौशाला | गौओं के लिए शाला |
(घ) अपादान तत्पुरुष (विभक्ति: ‘से’ – अलग होने का भाव)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| ऋणमुक्त | ऋण से मुक्त |
| धनहीन | धन से हीन |
| पथभ्रष्ट | पथ से भ्रष्ट |
(ङ) संबंध तत्पुरुष (विभक्ति: ‘का’, ‘के’, ‘की’ का लोप)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| राजआज्ञा | राजा की आज्ञा |
| पराधीन | पर (दूसरों) के अधीन |
| सेनापति | सेना का पति (स्वामी) |
(च) अधिकरण तत्पुरुष (विभक्ति: ‘में’, ‘पर’ का लोप)
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| शोकग्न | शोक में मग्न |
| आपबीती | आप (स्वयं) पर बीती |
| कलाप्रवीण | कला में प्रवीण |
समास और समास विग्रह के अंतर्गत तत्पुरुष समास के 6 मुख्य भेदों (विभक्ति आधारित) के अलावा 4 अन्य महत्वपूर्ण उपभेद भी होते हैं। उच्च स्तर की व्याकरणिक समझ और प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए इन्हें जानना बहुत जरूरी है।
यहाँ तत्पुरुष समास के उन अन्य चार भेदों का विस्तार से वर्णन है:
1. नञ् तत्पुरुष समास (Nan Tatpurush)
जिस समस्त पद में पहला पद निषेधवाचक (नकारात्मक) हो, उसे नञ् तत्पुरुष समास कहते हैं। इसमें शब्द के प्रारंभ में ‘अ’, ‘अन’, ‘न’, ‘ना’ या ‘गैर’ जैसे नकारात्मक उपसर्ग जुड़े होते हैं।
- पहचान: ‘न’ का भाव होना।
- समास और समास विग्रह के उदाहरण:
- अधर्म: न धर्म
- अनदेखा: न देखा हुआ
- अनादि: जिसका न आदि हो (न आदि)
- नालायक: जो लायक न हो
- गैरहाजिर: जो हाजिर न हो
2. उपपद तत्पुरुष समास (Upapad Tatpurush)
इस समास में दूसरा पद (उत्तर पद) स्वतंत्र रूप से भाषा में प्रयोग नहीं होता, बल्कि वह पहले पद के साथ मिलकर एक विशेष अर्थ प्रकट करता है। विग्रह करने पर इसका दूसरा पद एक क्रिया के रूप में सामने आता है।
- पहचान: दूसरा पद कोई स्वतंत्र शब्द न होकर प्रत्यय जैसा कार्य करता है।
- समास और समास विग्रह के उदाहरण:
- जलज: जल में जन्म लेने वाला (ज = जन्म लेना)
- नभचर: नभ (आकाश) में विचरण करने वाला (चर = विचरण करना)
- स्वर्णकार: स्वर्ण का काम करने वाला (कार = करने वाला)
- कृतज्ञ: किए हुए उपकार को मानने वाला (ज्ञ = जानने/मानने वाला)
3. प्रादि तत्पुरुष समास (Pradi Tatpurush)
जिस तत्पुरुष समास का पहला पद ‘प्र’, ‘कु’, ‘सु’, ‘निर’ आदि उपसर्ग हो और वह शब्द की विशेषता बताए, उसे प्रादि तत्पुरुष कहते हैं। यह अक्सर कर्मधारय जैसा भी प्रतीत होता है।
- पहचान: विशेष अर्थ वाले उपसर्गों का प्रयोग।
- समास और समास विग्रह के उदाहरण:
- प्रगति: विशिष्ट गति (प्र = विशिष्ट)
- कुपुत्र: बुरा है जो पुत्र (कु = बुरा)
- सुपुरुष: अच्छा है जो पुरुष (सु = अच्छा)
- प्राचार्य: प्रगत (श्रेष्ठ) आचार्य
4. अलुक् तत्पुरुष समास (Aluk Tatpurush)
यह एक विशेष भेद है जिसमें समास होने पर भी पूर्व पद की विभक्ति का लोप नहीं होता (संस्कृत व्याकरण के प्रभाव वाले शब्द)। सामान्य तत्पुरुष में विभक्ति गायब हो जाती है, लेकिन यहाँ वह शब्द के साथ ही चिपकी रहती है।
- पहचान: विग्रह करने पर भी मूल शब्द का स्वरूप वैसा ही रहता है।
- समास और समास विग्रह के उदाहरण:
- युधिष्ठिर: युद्ध में स्थिर रहने वाला (यहाँ ‘युधि’ में ‘में’ विभक्ति छिपी है)
- मनसिज: मन में जन्म लेने वाला (कामदेव)
- खेचर: आकाश में विचरण करने वाला (‘खे’ का अर्थ आकाश में)
- आत्मनेपद: अपने लिए पद
त्वरित तुलना तालिका
| अन्य भेद | मुख्य विशेषता | उदाहरण |
|---|---|---|
| नञ् | नकारात्मकता (No/Not) | अयोग्य (न योग्य) |
| उपपद | दूसरा पद स्वतंत्र नहीं होता | पंकज (पंक में जन्म लेने वाला) |
| प्रादि | विशेष उपसर्ग (प्र, कु) | कुपात्र (बुरा पात्र) |
| अलुक् | विभक्ति का लोप न होना | युधिष्ठिर (युद्ध में स्थिर) |
3. कर्मधारय समास (Karmadharaya Samas) –
परिभाषा:
जिस समस्त पद का उत्तर पद (दूसरा पद) प्रधान हो तथा पूर्व पद व उत्तर पद में विशेषण-विशेष्य (Adjective-Noun) अथवा उपमान-उपमेय (Comparison) का संबंध हो, उसे कर्मधारय समास कहते हैं।
सरल शब्दों में, इसमें एक पद दूसरे पद की विशेषता बताता है या उसकी तुलना किसी और से करता है।
कर्मधारय समास की पहचान (Identify Tips)
- विग्रह करने पर दोनों पदों के बीच में ‘है जो’ या ‘के समान’ शब्द आते हैं।
- पहला पद अक्सर यह बताता है कि दूसरा पद ‘कैसा है’? (जैसे: नीला अंबर – अंबर कैसा है? नीला)।
समास और समास विग्रह के प्रमुख उदाहरण
इस समास को दो मुख्य श्रेणियों में बाँटकर समझा जा सकता है:
(क) विशेषण-विशेष्य आधारित (जो विशेषता बताए)
यहाँ पहला शब्द विशेषण होता है।
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| महादेव | महान है जो देव |
| नीलकमल | नीला है जो कमल |
| पीताम्बर | पीला है जो अम्बर (वस्त्र) |
| सज्जन | सत् (अच्छा) है जो जन |
| अधमरा | आधा है जो मरा हुआ |
(ख) उपमान-उपमेय आधारित (जहाँ तुलना हो)
यहाँ एक वस्तु की तुलना दूसरी प्रसिद्ध वस्तु से की जाती है।
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| चरणकमल | कमल के समान चरण |
| कनकलता | कनक (सोने) के समान लता |
| चंद्रमुख | चंद्र के समान मुख |
| मृगनयनी | मृग के समान नयन वाली |
| क्रोधग्नि | क्रोध रूपी अग्नि |
एक महत्वपूर्ण अंतर: कर्मधारय vs बहुब्रीहि
अक्सर परीक्षार्थी पीताम्बर या नीलकंठ जैसे शब्दों में भ्रमित हो जाते हैं।
- कर्मधारय: यदि आप विग्रह करते हैं—”नीला है जो कंठ”, तो यह कर्मधारय है।
- बहुब्रीहि: यदि आप विग्रह करते हैं—”नीला है कंठ जिनका (अर्थात शिव)”, तो यह बहुब्रीहि है। (नोट: यदि परीक्षा में दोनों विकल्प हों, तो बहुब्रीहि को प्राथमिकता दी जाती है।)
समास और समास विग्रह: अभ्यास के लिए अन्य उदाहरण
- लौहपुरुष: लोहे के समान (दृढ़) पुरुष।
- परमानंद: परम है जो आनंद।
- भलमानस: भला है जो मानस (मनुष्य)।
- मुखचंद्र: मुख रूपी चंद्रमा।
4. द्विगु समास (Dvigu Samas) – विस्तार से
परिभाषा:
जिस समस्त पद का पूर्व पद (पहला पद) संख्यावाचक विशेषण हो और वह समस्त पद किसी समूह (Group) या समाहार का बोध कराए, उसे द्विगु समास कहते हैं।
सरल शब्दों में, यदि किसी शब्द की शुरुआत गिनती (जैसे: एक, दो, त्रि, चौ, पंच) से हो रही है और वह एक ग्रुप की बात कर रहा है, तो वह द्विगु समास है।
द्विगु समास की पहचान (Quick Tips)
- विग्रह करते समय अंत में अक्सर ‘समूह’ या ‘समाहार’ शब्द का प्रयोग किया जाता है।
- इसमें पहला पद हमेशा संख्या (Number) को दर्शाता है।
समास और समास विग्रह के प्रमुख उदाहरण
यहाँ द्विगु समास के कुछ सबसे महत्वपूर्ण उदाहरण दिए गए हैं जो परीक्षाओं में अक्सर पूछे जाते हैं:
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| चौराहा | चार राहों का समूह |
| तिरंगा | तीन रंगों का समूह |
| नवग्रह | नौ ग्रहों का समूह |
| त्रिलोक | तीन लोकों का समाहार |
| शताब्दी | सौ (शत) वर्षों का समूह |
| सप्तऋषि | सात ऋषियों का समूह |
| पंचवटी | पाँच वटों (वृक्षों) का समूह |
| दोपहर | दो पहरों का समाहार |
| अठन्नी | आठ आनों का समूह |
| त्रिभुज | तीन भुजाओं का समाहार |
द्विगु और बहुब्रीहि में अंतर (महत्वपूर्ण नोट)
कभी-कभी संख्यावाचक शब्द किसी तीसरे अर्थ की ओर संकेत करते हैं, तब वे द्विगु न रहकर बहुब्रीहि बन जाते हैं।
- दशानन: यदि विग्रह “दस आननों का समूह” है, तो यह द्विगु है। लेकिन यदि विग्रह “दस हैं आनन जिसके (अर्थात रावण)” है, तो यह बहुब्रीहि होगा।
- चतुर्भुज: चार भुजाओं का समूह (द्विगु) / चार हैं भुजाएँ जिसकी (अर्थात विष्णु – बहुब्रीहि)।
विशेष तथ्य (Pro-Content Tip)
‘द्विगु’ शब्द का अपना अर्थ भी एक समास है! ‘द्वि’ (दो) + ‘गु’ (गायों का समूह)। यानी द्विगु शब्द में भी द्विगु समास ही है।
द्विगु समास के अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण
| समस्त पद | समास विग्रह | अर्थ/पहचान |
|---|---|---|
| त्रिफला | तीन फलों का समूह | (आँवला, बहेड़ा और हरड़) |
| सतसई | सात सौ (दोहों) का समूह | बिहारी सतसई प्रसिद्ध है |
| चौमासा | चार मासों (महीनों) का समूह | वर्षा ऋतु का समय |
| पञ्चामृत | पाँच अमृतों का समाहार | (दूध, दही, घी, शहद, चीनी) |
| नवरत्न | नौ रत्नों का समूह | विशेष मूल्यवान रत्न |
| अष्टाध्यायी | आठ अध्यायों का समूह | पाणिनी की व्याकरण कृति |
| त्रिवेणी | तीन वेणियों (नदियों) का संगम | प्रयागराज की नदियाँ |
| दुअन्नी | दो आनों का समूह | पुरानी मुद्रा |
| षड्रस | छह रसों का समूह | भोजन के छह स्वाद |
| त्रिकाल | तीन कालों का समूह | (भूत, भविष्य, वर्तमान) |
| एकांकी | एक अंक वाला | नाटक का एक प्रकार |
| सप्ताह | सात अहन (दिनों) का समूह | सात दिनों का समय |
समास और समास विग्रह: कठिन उदाहरण (जो अक्सर पूछे जाते हैं)
- पसेरी: पाँच सेरों का समूह।
- षट्कोण: छह कोणों का समाहार।
- दशब्दी: दस वर्षों का समूह (Decade)।
- चौपाय: चार पैरों का समूह।
- त्रिनेत्र (समूह के अर्थ में): तीन नेत्रों का समाहार। (नोट: यदि शिव जी के लिए आए तो बहुब्रीहि होगा)।
नोट: उदाहरण: ‘एकता’ या ‘अकेला’ में संख्या है, लेकिन समूह का बोध न होने के कारण ये द्विगु समास नहीं हैं।
5. द्वंद्व समास (Dvandva Samas) – विस्तार से
परिभाषा:
जिस समस्त पद के दोनों पद प्रधान हों तथा विग्रह करने पर ‘और’, ‘अथवा’, ‘या’, ‘एवं’ लगता हो, उसे द्वंद्व समास कहते हैं।
पहचान (Quick Tips):
- दोनों पदों के बीच प्रायः योजक चिन्ह (-) लगा होता है।
- दोनों पद एक-दूसरे के विलोम (Opposite) हो सकते हैं या एक-दूसरे के पूरक होते हैं।
- विग्रह करने पर ‘और’ या ‘या’ का प्रयोग अनिवार्य रूप से होता है।
द्वंद्व समास के मुख्य तीन प्रकार
समास और समास विग्रह की गहराई में जाने पर पता चलता है कि द्वंद्व समास के भी तीन उपभेद होते हैं:
(क) इतरेतर द्वंद्व (जहाँ ‘और’ का प्रयोग हो)
इसमें दोनों पदों का अपना अलग अस्तित्व होता है।
- माता-पिता: माता और पिता
- भाई-बहन: भाई और बहन
- राम-कृष्ण: राम और कृष्ण
(ख) वैकल्पिक द्वंद्व (जहाँ ‘या’ अथवा ‘अथवा’ का प्रयोग हो)
इसमें दोनों पदों के बीच विकल्प (Choice) होता है, अक्सर ये एक-दूसरे के विरोधी होते हैं।
- पाप-पुण्य: पाप या पुण्य
- थोड़ा-बहुत: थोड़ा या बहुत
- हार-जीत: हार या जीत
(ग) समाहार द्वंद्व (जहाँ समूह या ‘आदि’ का भाव हो)
इसमें पद अपने अर्थ के अलावा अपने जैसे अन्य अर्थों का भी बोध कराते हैं।
- दाल-रोटी: दाल-रोटी आदि (अर्थात भोजन के सभी पदार्थ)
- हाथ-पाँव: हाथ-पाँव आदि (शरीर के अंग)
- कपड़ा-लत्ता: कपड़ा-लत्ता आदि
समास और समास विग्रह के प्रमुख उदाहरण
| समस्त पद | समास विग्रह | प्रकार |
|---|---|---|
| अन्न-जल | अन्न और जल | इतरेतर |
| सुख-दुःख | सुख और दुःख | इतरेतर |
| भला-बुरा | भला या बुरा | वैकल्पिक |
| ऊँच-नीच | ऊँच या नीच | वैकल्पिक |
| रुपया-पैसा | रुपया-पैसा आदि | समाहार |
| लेन-देन | लेना और देना | इतरेतर |
| देवासुर | देव और असुर | इतरेतर |
| कृष्णार्जुन | कृष्ण और अर्जुन | इतरेतर |
कुछ कठिन और महत्वपूर्ण उदाहरण
- शीतोष्ण: शीत या उष्ण (ठंडा या गरम)
- धर्मार्थ: धर्म और अर्थ
- पच्चीस: पांच और बीस (संख्याओं वाले द्वंद्व)
- जलवायु: जल और वायु
द्वंद्व समास के अन्य विशिष्ट उदाहरण
1. विलोम शब्दों वाले उदाहरण (वैकल्पिक द्वंद्व)
जहाँ दोनों पद एक-दूसरे के विपरीत अर्थ देते हैं:
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| यश-अपयश | यश या अपयश |
| आय-व्यय | आय और व्यय |
| जीवन-मरण | जीवन और मरण |
| ठंडा-गरम | ठंडा या गरम |
| आकाश-पाताल | आकाश और पाताल |
2. पूरक और संबंधित शब्दों वाले उदाहरण (इतरेतर द्वंद्व)
जहाँ दोनों पद मिलकर एक जोड़ा (Pair) बनाते हैं:
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| सीता-राम | सीता और राम |
| दूध-दही | दूध और दही |
| देश-विदेश | देश और विदेश |
| धनुर्बाण | धनुष और बाण |
| लोटा-डोर | लोटा और डोर |
3. समूह का बोध कराने वाले उदाहरण (समाहार द्वंद्व)
जहाँ शब्दों का प्रयोग एक विस्तृत अर्थ (आदि/इत्यादि) के लिए होता है:
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| चाय-वाय | चाय आदि (नाश्ता-पानी) |
| सेठ-साहूकार | सेठ-साहूकार आदि |
| कीड़े-मकोड़े | कीड़े-मकोड़े आदि |
| पड़ोसी-वड़ोसी | पड़ोसी आदि |
| धन-दौलत | धन-दौलत आदि |
4. संख्या वाले द्वंद्व (विशेष उदाहरण)
अक्सर छात्र इसमें भ्रमित हो जाते हैं और इन्हें द्विगु समास समझ लेते हैं, लेकिन यदि दोनों संख्याएँ अलग-अलग प्रधान हों, तो वह द्वंद्व होता है:
| समस्त पद | समास विग्रह |
|---|---|
| छब्बीस | छह और बीस |
| इकसठ | एक और साठ |
| अड़तीस | आठ और तीस |
समास और समास विग्रह: द्वंद्व समास की कुछ कठिन संधियाँ
कभी-कभी द्वंद्व समास में संधि युक्त शब्द भी आते हैं, जिन्हें पहचानना जरूरी है:
- शीतोष्ण: शीत और उष्ण (ठंडा और गर्म)।
- लाभालाभ: लाभ या अलाभ (हानि)।
- शस्त्रास्त्र: शस्त्र और अस्त्र।
- कर्तव्याकर्तव्य: कर्तव्य या अकर्तव्य।
6. बहुब्रीहि समास (Bahuvrihi Samas) – विस्तार से
परिभाषा:
जिस समस्त पद में कोई भी पद प्रधान नहीं होता (न पहला, न दूसरा), बल्कि दोनों पद मिलकर किसी तीसरे पद (विशेष अर्थ) की ओर संकेत करते हैं, उसे बहुब्रीहि समास कहते हैं।
सरल शब्दों में, यहाँ शब्द का शाब्दिक अर्थ महत्वपूर्ण नहीं होता, बल्कि वह शब्द जिसके लिए रूढ़ (प्रसिद्ध) हो चुका है, वह अर्थ प्रधान होता है।
बहुब्रीहि समास की पहचान (Identify Tips)
- विग्रह करते समय अंत में ‘वाला’, ‘वाली’, ‘जिसका’, ‘जिसकी’, ‘जिसके’ या ‘वह’ जैसे शब्द आते हैं।
- इसके अधिकांश उदाहरण देवी-देवताओं के नाम, पौराणिक पात्रों या किसी विशिष्ट व्यक्ति के उपनाम होते हैं।
समास और समास विग्रह के प्रमुख उदाहरण
यहाँ बहुब्रीहि समास के उदाहरणों को उनकी प्रकृति के आधार पर समझा जा सकता है:
(क) देवी-देवताओं के नाम
| समस्त पद | समास विग्रह | तीसरा अर्थ (प्रधान पद) |
|---|---|---|
| गजानन | गज (हाथी) के समान मुख है जिनका | श्री गणेश |
| त्रिनेत्र | तीन नेत्र हैं जिनके | शिव |
| चक्रपाणि | चक्र है पाणि (हाथ) में जिनके | विष्णु |
| वीणापाणि | वीणा है हाथ में जिसके | सरस्वती |
| गिरिधर | गिरि (पर्वत) को धारण करने वाले | श्री कृष्ण |
(ख) विशेष संज्ञाएँ / उपनाम
| समस्त पद | समास विग्रह | तीसरा अर्थ (प्रधान पद) |
|---|---|---|
| दशानन | दस हैं आनन (मुख) जिसके | रावण |
| निशाचर | निशा (रात) में विचरण करने वाला | राक्षस |
| प्रधानमंत्री | मंत्रियों में प्रधान है जो | एक विशिष्ट पद |
| पंकज | पंक (कीचड़) में पैदा होता है जो | कमल |
| दिगंबर | दिशाएँ ही हैं वस्त्र जिनका | साधु/शिव |
समास और समास विग्रह: तुलनात्मक अंतर (Confusion Clearing)
ब्लॉग लिखते समय पाठकों को यह अंतर समझाना बहुत जरूरी है, क्योंकि यहीं सबसे ज्यादा गलतियाँ होती हैं:
- बहुब्रीहि vs कर्मधारय:
- नीलकंठ: नीला है जो कंठ (कर्मधारय – यहाँ विशेषता बताई जा रही है)।
- नीलकंठ: नीला है कंठ जिसका, अर्थात ‘शिव’ (बहुब्रीहि – यहाँ शिव की ओर संकेत है)।
- बहुब्रीहि vs द्विगु:
- चतुर्भुज: चार भुजाओं का समूह (द्विगु – यहाँ संख्या और समूह मुख्य है)।
- चतुर्भुज: चार भुजाएँ हैं जिसकी, अर्थात ‘विष्णु’ (बहुब्रीहि)।
अन्य महत्वपूर्ण उदाहरण (Miscellaneous)
- लंबोदर: लंबा है उदर (पेट) जिनका (गणेश)।
- अजातशत्रु: नहीं जन्मा है शत्रु जिसका (एक विशिष्ट राजा)।
- कुसुमायुध: कुसुम (फूल) हैं आयुध (शस्त्र) जिसके (कामदेव)।
- सुलोचना: सुंदर हैं लोचन (आँखें) जिसकी (विशेष स्त्री)।
समास और समास विग्रह
को अच्छी तरह समझने के लिए अभ्यास सबसे जरूरी है।
यहाँ 100 से अधिक महत्वपूर्ण उदाहरणों की एक विस्तृत सूची दी गई है, जिन्हें परीक्षाओं में बार-बार पूछा जाता है।
1. अवव्ययीभाव समास के उदाहरण (20)
(पहचान: पहला पद अव्यय/उपसर्ग या शब्दों की आवृत्ति)
- प्रतिदिन: प्रत्येक दिन
- यथाशक्ति: शक्ति के अनुसार
- आजन्म: जन्म से लेकर
- यथासंभव: जैसा संभव हो
- भरपेट: पेट भरकर
- आमरण: मृत्यु तक
- रातोंरात: रात ही रात में
- प्रतिवर्ष: हर वर्ष
- बेखटके: बिना खटके के
- निडर: डर के बिना
- साफ-साफ: बिल्कुल साफ
- हाथोंहाथ: एक हाथ से दूसरे हाथ में
- यथाविधि: विधि के अनुसार
- प्रत्यक्ष: आँखों के सामने
- अनुरूप: रूप के योग्य
- यथामति: बुद्धि के अनुसार
- निस्संदेह: संदेह के बिना
- बाकायदा: कायदे के अनुसार
- बीचोंबीच: ठीक बीच में
- यथासमय: समय के अनुसार
2. तत्पुरुष समास के उदाहरण (25)
(पहचान: कारक चिन्हों का लोप)
- राजपुत्र: राजा का पुत्र
- रसोईघर: रसोई के लिए घर
- स्वर्गप्राप्त: स्वर्ग को प्राप्त
- गगनचुंबी: गगन को चूमने वाला
- तुलसीकृत: तुलसी द्वारा रचित
- भयाकुल: भय से आकुल
- देशभक्ति: देश के लिए भक्ति
- राहखर्च: राह के लिए खर्च
- ऋणमुक्त: ऋण से मुक्त
- धनहीन: धन से हीन
- गंगाजल: गंगा का जल
- लोकप्रिय: लोक में प्रिय
- घुड़सवार: घोड़े पर सवार
- कार्यकुशल: कार्य में कुशल
- वनवास: वन में वास
- सिरदर्द: सिर में दर्द
- धर्मभ्रष्ट: धर्म से भ्रष्ट
- राजआज्ञा: राजा की आज्ञा
- पॉकेटमार: पॉकेट को मारने वाला
- हस्तलिखित: हाथ से लिखा हुआ
- दानवीर: दान में वीर
- युद्धक्षेत्र: युद्ध का क्षेत्र
- विद्याहीन: विद्या से हीन
- शोककुल: शोक से व्याकुल
- गौशाला: गौओं के लिए शाला
3. कर्मधारय समास के उदाहरण (15)
(पहचान: विशेषण-विशेष्य या उपमान-उपमेय)
- चरणकमल: कमल के समान चरण
- नीलकमल: नीला है जो कमल
- महापुरुष: महान है जो पुरुष
- चंद्रमुख: चन्द्रमा के समान मुख
- पीताम्बर: पीला है जो वस्त्र (अम्बर)
- मृगनयनी: मृग के समान नयन वाली
- लालमणि: लाल है जो मणि
- परमानंद: परम है जो आनंद
- सज्जन: सत् (अच्छा) है जो जन
- कनकलता: कनक के समान लता
- महादेव: महान है जो देव
- क्रोधग्नि: क्रोध रूपी अग्नि
- लौहपुरुष: लोहे के समान (दृढ़) पुरुष
- नीलकंठ: नीला है जो कंठ
- भलमानस: भला है जो मानस
4. द्विगु समास के उदाहरण (15)
(पहचान: पहला पद संख्यावाचक समूह)
- चौराहा: चार राहों का समूह
- तिरंगा: तीन रंगों का समूह
- नवग्रह: नौ ग्रहों का समूह
- त्रिलोक: तीन लोकों का समाहार
- शताब्दी: सौ वर्षों का समूह
- सप्तऋषि: सात ऋषियों का समूह
- पंचवटी: पाँच वटों का समूह
- दोपहर: दो पहरों का समाहार
- त्रिभुज: तीन भुजाओं का समूह
- सतसई: सात सौ दोहों का समूह
- अठन्नी: आठ आनों का समूह
- त्रिफला: तीन फलों का समूह
- षट्कोण: छह कोणों का समूह
- चौमासा: चार मासों का समूह
- नवरत्न: नौ रत्नों का समूह
5. द्वंद्व समास के उदाहरण (15)
(पहचान: दोनों पद प्रधान और ‘और/या’ का प्रयोग)
- माता-पिता: माता और पिता
- रात-दिन: रात और दिन
- पाप-पुण्य: पाप या पुण्य
- सुख-दुःख: सुख और दुःख
- भाई-बहन: भाई और बहन
- अमीर-गरीब: अमीर और गरीब
- आकाश-पाताल: आकाश और पाताल
- ठंडा-गरम: ठंडा या गरम
- अपना-पराया: अपना या पराया
- दाल-रोटी: दाल और रोटी
- छोटा-बड़ा: छोटा या बड़ा
- हार-जीत: हार या जीत
- अन्न-जल: अन्न और जल
- नर-नारी: नर और नारी
- देश-विदेश: देश और विदेश
6. बहुब्रीहि समास के उदाहरण (15)
(पहचान: कोई तीसरा पद प्रधान होना)
- दशानन: दस हैं मुख जिसके (रावण)
- लंबोदर: लंबा है उदर जिनका (गणेश)
- चक्रपाणि: चक्र है हाथ में जिनके (विष्णु)
- त्रिनेत्र: तीन नेत्र हैं जिनके (शिव)
- गजानन: हाथी के समान मुख है जिनका (गणेश)
- गिरिधर: गिरि को धारण करने वाले (कृष्ण)
- चतुर्भुज: चार भुजाएँ हैं जिनकी (विष्णु)
- प्रधानमंत्री: मंत्रियों में प्रधान है जो (विशिष्ट व्यक्ति)
- पंकज: कीचड़ में जन्म लेता है जो (कमल)
- वीणापाणि: वीणा है हाथ में जिसके (सरस्वती)
- निशाचर: रात में घूमने वाला (राक्षस)
- चंद्रशेखर: चाँद है शिखर पर जिसके (शिव)
- पीताम्बर: पीले हैं वस्त्र जिनके (कृष्ण)
- महावीर: महान वीर है जो (हनुमान)
- मृगेंद्र: मृगों का इंद्र (शेर)
समास पहचानने की सुपर फास्ट ट्रिक्स
1. अव्ययीभाव समास (Prefix Trick)
- ट्रिक: शब्द की शुरुआत में उपसर्ग देखें।
- कीवर्ड्स: यथा, प्रति, आ, भर, हर, नि, अनु, बे।
- एक और पहचान: अगर एक ही शब्द दो बार आए (जैसे- रातोंरात, घर-घर)।
2. तत्पुरुष समास (Factor Trick)
- ट्रिक: शब्द को मन में विस्तार (विग्रह) करके देखें।
- पहचान: अगर बीच में कारक चिन्ह आए (का, के, की, को, से, में, पर, के लिए)।
- उदाहरण: ‘राजपुत्र’ → राजा का पुत्र (तत्पुरुष)।
3. कर्मधारय समास (Comparison Trick)
- ट्रिक: दूसरे शब्द से पूछें— “कैसा है?”
- पहचान: विग्रह करने पर ‘है जो’ या ‘के समान’ आए।
- उदाहरण: ‘मृगनयनी’ → नयन कैसे हैं? मृग के समान।
4. द्विगु समास (Number Trick)
- ट्रिक: पहला पद हमेशा एक गिनती (संख्या) होगी।
- पहचान: यह हमेशा एक समूह (Group) की बात करेगा।
- उदाहरण: त्रिलोकी (3), चौराहा (4), सप्तऋषि (7)।
5. द्वंद्व समास (Opposite/Pair Trick)
- ट्रिक: बीच में योजक चिन्ह (-) देखें।
- पहचान: दोनों शब्द एक-दूसरे के उल्टे (Opposite) होंगे या जोड़ा होंगे। विग्रह में ‘और’ या ‘या’ आएगा।
- उदाहरण: सुख-दुःख, माता-पिता।
6. बहुब्रीहि समास (V.I.P Trick)
- ट्रिक: यह शब्द किसी तीसरे (Third Person) की ओर इशारा करता है।
- पहचान: अधिकतर देवी-देवताओं के नाम या प्रसिद्ध उपनाम।
- उदाहरण: ‘लम्बोदर’ → न पेट प्रधान है, न लंबा, बल्कि ‘गणेश जी’ प्रधान हैं।
| समास का नाम | शॉर्ट ट्रिक पहचान | उदाहरण |
|---|---|---|
| अव्ययीभाव | उपसर्ग / शब्द की पुनरावृत्ति | यथाशक्ति, प्रतिदिन |
| तत्पुरुष | कारक चिन्ह का लोप (विभक्ति) | युद्ध का क्षेत्र, वन में वास |
| कर्मधारय | विशेषण (कैसा है?) | नीलकमल, महादेव |
| द्विगु | संख्या (Number) | त्रिभुज, नवग्रह |
| द्वंद्व | डैश (-) और विपरीत शब्द | दाल**-रोटी, पाप-**पुण्य |
| बहुब्रीहि | भगवान या विशेष व्यक्ति | दशानन (रावण), चक्रपाणि |
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