विस्मयादिबोधक अव्यय | 100+ उदाहरण | 50+ MCQs | PDF
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विस्मयादिबोधक अव्यय: परिभाषा, भेद और उदाहरण
क्या आप जानते हैं कि जब हम अचानक खुशी, दुख या आश्चर्य व्यक्त करते हैं, तो हम किन शब्दों का प्रयोग करते हैं? व्याकरण की भाषा में इन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहा जाता है। आज के इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि विस्मयादिबोधक अव्यय क्या हैं और इनका वाक्य में कैसे प्रयोग किया जाता है।
विस्मयादिबोधक अव्यय क्या है? (परिभाषा)
वे शब्द जिनसे आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा, आशीर्वाद या भय जैसे मनोभाव प्रकट होते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं। इन शब्दों का वाक्य के अन्य पदों से कोई सीधा संबंध नहीं होता, बल्कि ये केवल वक्ता के मन के भावों को दर्शाते हैं।
पहचान: विस्मयादिबोधक अव्यय के बाद हमेशा विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग किया जाता है।
विस्मयादिबोधक अव्यय के मुख्य भेद
विस्मयादिबोधक अव्यय को उनके द्वारा प्रकट किए जाने वाले भावों के आधार पर कई भागों में बाँटा जा सकता है:
विस्मयादिबोधक अव्यय के भेदों को समझना अत्यंत सरल है क्योंकि ये सीधे हमारे मन के भावों (Emotions) से जुड़े होते हैं। व्याकरण की दृष्टि से इन्हें मुख्य रूप से निम्नलिखित 10 भेदों में विभाजित किया गया है:
1. हर्षबोधक (Joy)
जब मन में अत्यधिक प्रसन्नता, खुशी या उल्लास का भाव हो, तब इन अव्ययों का प्रयोग होता है।
- प्रमुख शब्द: आह!, वाह-वाह!, शाबाश!, आहा!, ओहो!, धन्य!
- उदाहरण:
- वाह-वाह! क्या शानदार गोल किया है।
- शाबाश! तुमने कक्षा में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
2. शोकबोधक (Sorrow/Grief)
दुख, पीड़ा, वेदना या सहानुभूति प्रकट करने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
- प्रमुख शब्द: हाय!, आह!, हा-हा!, त्राहि-त्राहि!, ऊफ!, राम-राम!, हे भगवान!
- उदाहरण:
- हाय! अब मेरा क्या होगा?
- ओह! बेचारे के साथ बहुत बुरा हुआ।
3. आश्चर्यबोधक (Surprise)
जब किसी अनपेक्षित घटना या वस्तु को देखकर मन चकित रह जाए।
- प्रमुख शब्द: क्या!, अरे!, ओहो!, सच!, हैं!, वाह!
- उदाहरण:
- अरे! तुम यहाँ कैसे?
- क्या! उसने नौकरी छोड़ दी?
4. तिरस्कारबोधक (Contempt/Disgust)
घृणा, नफरत या किसी का अनादर व्यक्त करने के लिए इनका उपयोग होता है।
- प्रमुख शब्द: छी-छी!, धिक्कार!, हट!, धत्!, चुप!, थू-थू!
- उदाहरण:
- छी-छी! नाले के पास कितनी बदबू है।
- धिक्कार है! जो अपनी मातृभूमि का सम्मान नहीं करता।
5. स्वीकारबोधक (Acceptance)
जब किसी बात पर अपनी सहमति या मंजूरी देनी हो।
- प्रमुख शब्द: हाँ!, जी हाँ!, बहुत अच्छा!, ठीक!, जी!, अच्छा!
- उदाहरण:
- जी हाँ! मैं समय पर पहुँच जाऊँगा।
- ठीक है! जैसा आप चाहें वैसा ही होगा।
6. संबोधनबोधक (Calling/Addressing)
किसी का ध्यान खींचने या किसी को पुकारने के लिए।
- प्रमुख शब्द: हे!, अजी!, अहो!, ओ!, रे!, अरी!, लो!
- उदाहरण:
- अजी! सुनते हो, बाजार से सब्जी ले आना।
- हे राम! सब पर कृपा करना।
7. भयबोधक (Fear)
जब मन में डर या घबराहट का भाव उत्पन्न हो।
- प्रमुख शब्द: बाप रे बाप!, ओ माँ!, हाय!, बचाओ-बचाओ!
- उदाहरण:
- बाप रे बाप! इतना बड़ा अजगर।
- ओ माँ! यहाँ तो बहुत अंधेरा है।
8. आशीर्वादबोधक (Blessing)
जब किसी के प्रति शुभकामना या आशीर्वाद प्रकट करना हो।
- प्रमुख शब्द: जीते रहो!, खुश रहो!, दीर्घायु हो!, सदा सुहागन रहो!
- उदाहरण:
- जीते रहो! तुम जीवन में बहुत उन्नति करो।
- सदा सुखी रहो! यही मेरा आशीर्वाद है।
9. अनुमोदनबोधक (Approval)
जब किसी के कार्य या बात का समर्थन (Support) करना हो।
- प्रमुख शब्द: हाँ-हाँ!, अच्छा!, अवश्य!, बहुत ठीक!
- उदाहरण:
- अवश्य! मैं तुम्हारे साथ चलने को तैयार हूँ।
- हाँ-हाँ! यह योजना बिल्कुल सही है।
10. विदाबोधक (Farewell)
विदाई के समय भाव व्यक्त करने के लिए।
- प्रमुख शब्द: अच्छा!, अच्छा जी!, टा-टा!
- उदाहरण:
- अच्छा! अब हम चलते हैं।
- टा-टा! कल फिर मिलेंगे।
विस्मयादिबोधक अव्यय विशेष:
विस्मयादिबोधक अव्यय के संदर्भ में ‘विशेष’ बातों को जानना इसलिए जरूरी है क्योंकि ये व्याकरण के सामान्य नियमों से थोड़े अलग होते हैं। यहाँ कुछ ऐसे बिंदु दिए गए हैं जो इस टॉपिक को गहराई से समझने में मदद करेंगे:
1. वाक्य रचना में स्थिति (Independent Nature)
विस्मयादिबोधक अव्यय का संबंध वाक्य के किसी अन्य पद (संज्ञा, सर्वनाम, क्रिया) से नहीं होता। ये वाक्य के स्वतंत्र अंग होते हैं।
- उदाहरण: “वाह! क्या सुंदर दृश्य है।”
- यहाँ ‘वाह’ शब्द का ‘दृश्य’ या ‘है’ से व्याकरणिक संबंध नहीं है, यह केवल मन के उल्लास को प्रकट कर रहा है।
2. अर्थ परिवर्तन की क्षमता
एक ही विस्मयादिबोधक अव्यय अलग-अलग संदर्भों में अलग-अलग भाव प्रकट कर सकता है। यह वक्ता के बोलने के लहजे पर निर्भर करता है।
- अच्छा! (स्वीकृति): अच्छा, मैं चलता हूँ।
- अच्छा! (आश्चर्य): अच्छा! तो उसने ऐसा कहा?
- अच्छा! (धमकी): अच्छा! अब मैं तुम्हें देख लूँगा।
3. संज्ञा, सर्वनाम और विशेषण का अव्यय के रूप में प्रयोग
कभी-कभी सामान्य शब्द भी विस्मयादिबोधक अव्यय की तरह व्यवहार करने लगते हैं:
- संज्ञा: राम-राम!, शिव-शिव!, भगवान!
- विशेषण: सुंदर!, अच्छा!, बहुत बढ़िया!
- क्रिया: हट!, देख!, चुप!
4. विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का महत्व
इन अव्ययों के प्रयोग में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इनके तुरंत बाद विस्मयादिबोधक चिह्न लगाया जाता है। यदि चिह्न न लगाया जाए, तो वह शब्द केवल एक साधारण पद बनकर रह जाता है और भाव की तीव्रता खत्म हो जाती है।
5. अविकारी शब्द (Unchangeable)
चूँकि ये ‘अव्यय’ हैं, इसलिए इन पर लिंग, वचन, काल या कारक का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। चाहे लड़का बोले या लड़की, एक व्यक्ति बोले या अनेक, शब्द वही रहता है।
- लड़का: “अरे! वह गिर गया।”
- लड़की: “अरे! वह गिर गई।” (यहाँ ‘अरे’ में कोई बदलाव नहीं आया)
विस्मयादिबोधक अव्यय का मनोवैज्ञानिक महत्व
ये शब्द भाषा के ‘हृदय’ माने जाते हैं। इनके बिना भाषा केवल सूचना देने का माध्यम रह जाएगी, भावनाएँ व्यक्त करने का नहीं।
एक नजर में विशेष वर्गीकरण (Table)
| क्र.सं. | विस्मयादिबोधक अव्यय का नाम (भेद) | प्रमुख शब्द | वाक्य में प्रयोग (उदाहरण) |
|---|---|---|---|
| 1 | हर्षबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | शाबाश!, वाह-वाह!, धन्य! | शाबाश! तुमने स्कूल का नाम रोशन कर दिया। |
| 2 | शोकबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | हाय!, आह!, ओह!, हा-हा! | हाय! एक्सीडेंट में बेचारे की टांग टूट गई। |
| 3 | आश्चर्यबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | अरे!, क्या!, ओहो!, सच! | अरे! तुम यहाँ कब आए? |
| 4 | तिरस्कारबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | छी-छी!, धिक्!, हट!, धत्! | छी-छी! यहाँ कितनी गंदगी फैली हुई है। |
| 5 | भयबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | बाप रे बाप!, हाय!, ओ माँ! | बाप रे बाप! सामने शेर खड़ा है। |
| 6 | संबोधनबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | हे!, अजी!, अरी!, ओ! | अजी! जरा चाय का पानी रखना। |
| 7 | स्वीकारबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | हाँ!, जी हाँ!, ठीक!, अच्छा! | जी हाँ! मैं आपकी सहायता अवश्य करूँगा। |
| 8 | आशीर्वादबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | जीते रहो!, खुश रहो!, चिरंजीवी हो! | जीते रहो! भगवान तुम्हें सफलता दे। |
| 9 | चेतावनीबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | खबरदार!, सावधान!, हटो! | सावधान! आगे का रास्ता बहुत खतरनाक है। |
| 10 | अनुमोदनबोधक विस्मयादिबोधक अव्यय | हाँ-हाँ!, बहुत अच्छा!, अवश्य! | अवश्य! आप जैसा कहेंगे वैसा ही होगा। |
विस्मयादिबोधक अव्यय के 100+ उदाहरण
1. हर्षबोधक (खुशी के भाव)
- वाह! क्या स्वाद है।
- आहा! आज तो मज़ा आ गया।
- शाबाश! ऐसे ही आगे बढ़ते रहो।
- धन्य! प्रभु आपकी लीला अपरंपार है।
- वाह-वाह! बहुत सुंदर कविता सुनाई।
- ओहो! कितनी मीठी आवाज़ है।
- जय हो! सत्य की हमेशा जीत होती है।
- कमाल है! तुमने तो असंभव को संभव कर दिया।
- क्या बात है! आज तो बहुत सुंदर लग रहे हो।
- बहुत अच्छे! इसी तरह अभ्यास जारी रखो।
2. शोकबोधक (दुख और पीड़ा)
- हाय! अब मेरा क्या होगा?
- आह! पैरों में बहुत दर्द है।
- ओह! बहुत बुरा हुआ।
- हा-हा! यह कैसा अनर्थ हो गया।
- उफ़! यह दर्द सहा नहीं जाता।
- हाय राम! यह क्या देख लिया।
- हे भगवान! उस गरीब पर दया करो।
- त्राहि-त्राहि! हर तरफ हाहाकार मचा है।
- अफसोस! मैं उसे बचा न सका।
- हाय-हाय! बेचारा अनाथ हो गया।
3. आश्चर्यबोधक (हैरानी के भाव)
- अरे! तुम यहाँ कैसे?
- क्या! उसने परीक्षा छोड़ दी?
- ओहो! इतना बड़ा महल।
- सच! क्या वह वापस आ गया?
- हैं! यह कब हुआ?
- वाह! क्या शानदार नज़ारा है।
- एं! यह क्या कह रहे हो?
- अजी! यह चमत्कार कैसे हुआ?
- ओ! तुम यहाँ छिपे थे।
- आश्चर्य! उसने अकेले ही यह कर लिया।
4. तिरस्कारबोधक (घृणा और नफरत)
- छी-छी! कितनी दुर्गंध है यहाँ।
- धिक्कार है! जो अपनों को धोखा दे।
- धत्! तुमने सारा काम बिगाड़ दिया।
- हट! मेरे सामने से दूर हो जा।
- चुप! एक शब्द भी मत बोलना।
- थू-थू! ऐसी नीच हरकत पर शर्म आनी चाहिए।
- धिक्! ऐसे जीवन को जो दूसरों के काम न आए।
- दूर हो! मुझे तुम्हारी शक्ल नहीं देखनी।
- धत तेरे की! फिर से गलती कर दी।
- छी! यह खाना कितना गंदा है।
5. भयबोधक (डर और घबराहट)
- बाप रे बाप! इतना बड़ा अजगर।
- ओ माँ! मुझे बहुत डर लग रहा है।
- हाय! अब क्या होगा?
- बचाओ-बचाओ! आग लग गई है।
- अरे बाप रे! बिजली कड़क रही है।
- हाय! सामने भूत खड़ा है।
- माँ! मुझे अंधेरे में मत छोड़ो।
- बाप रे! कितना गहरा गड्ढा है।
- उई माँ! मुझे काँटा चुभ गया।
- हाय रे! शेर जंगल से बाहर आ गया।
6. संबोधनबोधक (बुलाने या पुकारने के लिए)
- हे! ईश्वर सबकी रक्षा करना।
- अजी! जरा मेरी बात तो सुनिए।
- अरी! तुम कहाँ जा रही हो?
- ओ! भाई साहब जरा रुकिए।
- रे! मूर्ख चुप हो जा।
- अबे! तू यहाँ क्या कर रहा है?
- लो! वह आ गया।
- सुनो! बाज़ार से फल ले आना।
- हे राम! मुझे शक्ति दो।
- ओए! इधर आ।
7. स्वीकारबोधक (सहमति और मंजूरी)
- हाँ! मैं कल ज़रूर आऊँगा।
- जी हाँ! मैंने आपका पत्र पढ़ लिया है।
- ठीक! जैसा आप कहें वैसा ही होगा।
- अच्छा! अब हम चलते हैं।
- जी! मैं आपकी बात समझ गया।
- बहुत अच्छा! आपने सही निर्णय लिया।
- बिल्कुल! मैं तुम्हारे साथ हूँ।
- ठीक है! मुझे कोई आपत्ति नहीं।
- हाँ-हाँ! तुम जा सकते हो।
- अवश्य! मैं यह काम पूरा कर दूँगा।
8. आशीर्वादबोधक (दुआ और शुभकामना)
- जीते रहो! तुम सदा सुखी रहो।
- खुश रहो! भगवान तुम्हें लंबी उम्र दे।
- सौभाग्यवती भव! तुम्हारा घर भरा रहे।
- दीर्घायु हो! खूब नाम कमाओ।
- चिरंजीवी हो! सदा स्वस्थ रहो।
- कल्याण हो! तुम्हारा मार्ग प्रशस्त हो।
- यशस्वी हो! तुम्हारी कीर्ति चारों ओर फैले।
- सदा सुहागन रहो! खुशहाल रहो।
- दूधों नहाओ पूतों फलो! समृद्ध हो।
- विजय भव! तुम युद्ध जीतकर आओ।
9. चेतावनीबोधक (सचेत करने के लिए)
- खबरदार! दोबारा ऐसा मत करना।
- सावधान! आगे रास्ता बंद है।
- बचो! ऊपर से पत्थर गिर रहे हैं।
- हटो! एम्बुलेंस को रास्ता दो।
- देखो! कहीं चोट न लग जाए।
- होशियार! दुश्मन पास ही है।
- ठहरो! अभी वहाँ जाना ठीक नहीं।
- सुनिए! बिजली का तार टूटा हुआ है।
- चेतो! अभी भी समय है संभल जाओ।
- दूर रहो! यह कुत्ता काट सकता है।
10. अनुमोदन और विदाबोधक (मिश्रित)
- हाँ-हाँ! यह काम बहुत ज़रूरी है।
- अवश्य! मैं तुम्हारी मदद करूँगा।
- बहुत ठीक! तुमने बिल्कुल सही कहा।
- अच्छा जी! अब आज्ञा दीजिये।
- टा-टा! हम फिर मिलेंगे।
- विदा! तुम्हारी यात्रा मंगलमय हो।
- नमस्ते! फिर मुलाकात होगी।
- राम-राम! भाई साहब चलते हैं।
- प्रणाम! आपका दिन शुभ हो।
- अलविदा! यादों में बने रहना।
- शुक्रिया! आपकी मदद के लिए धन्यवाद।
विस्मयादिबोधक अव्यय: 50+ महत्वपूर्ण वस्तुनिष्ठ प्रश्न (MCQs)
1. ‘विस्मयादिबोधक अव्यय’ का मुख्य कार्य क्या है?
(क) वाक्य को जोड़ना
(ख) संज्ञा की विशेषता बताना
(ग) मन के भावों को प्रकट करना
(घ) क्रिया की काल बताना
उत्तर: (ग)
2. विस्मयादिबोधक अव्यय के साथ किस चिह्न का प्रयोग अनिवार्य है?
(क) प्रश्नवाचक चिह्न (?)
(ख) विस्मयादिबोधक चिह्न (!)
(ग) पूर्ण विराम (।)
(घ) अल्प विराम (,)
उत्तर: (ख)
3. “शाबाश! तुमने बहुत अच्छा काम किया।” में कौन-सा अव्यय है?
(क) शोकबोधक
(ख) तिरस्कारबोधक
(ग) हर्षबोधक
(घ) भयबोधक
उत्तर: (ग)
4. “छी-छी! कितनी गंदगी है यहाँ।” इस वाक्य में ‘छी-छी’ कौन-सा भेद है?
(क) विदाबोधक
(ख) तिरस्कारबोधक
(ग) आश्चर्यबोधक
(घ) संबोधनबोधक
उत्तर: (ख)
5. “अरे! तुम अभी तक यहीं हो?” वाक्य में ‘अरे’ क्या प्रकट करता है?
(क) घृणा
(ख) आश्चर्य
(ग) क्रोध
(घ) भय
उत्तर: (ख)
6. “बाप रे बाप! इतना बड़ा साँप।” वाक्य में कौन-सा भाव है?
(क) हर्ष
(ख) शोक
(ग) भय
(घ) चेतावनी
उत्तर: (ग)
7. “जीते रहो! लंबी उम्र हो।” में कौन-सा अव्यय प्रयुक्त हुआ है?
(क) आशीर्वादबोधक
(ख) संबोधनबोधक
(ग) स्वीकारबोधक
(घ) भयबोधक
उत्तर: (क)
8. “अजी! सुनिए तो सही।” में ‘अजी’ शब्द किस श्रेणी में आता है?
(क) चेतावनी
(ख) तिरस्कार
(ग) संबोधन
(घ) अनुमोदन
उत्तर: (ग)
9. “हाय! अब मेरा क्या होगा?” वाक्य में कौन-सा भाव निहित है?
(क) उल्लास
(ख) शोक/पीड़ा
(ग) घृणा
(घ) आश्चर्य
उत्तर: (ख)
10. “खबरदार! आगे मत बढ़ना।” में ‘खबरदार’ शब्द क्या है?
(क) हर्षबोधक
(ख) भयबोधक
(ग) चेतावनीबोधक
(घ) विदाबोधक
उत्तर: (ग)
11. निम्नलिखित में से कौन-सा शब्द ‘हर्षबोधक’ नहीं है?
(क) वाह!
(ख) आहा!
(ग) हाय!
(घ) धन्य!
उत्तर: (ग)
12. ‘अव्यय’ शब्द का अर्थ क्या होता है?
(क) जिसका व्यय (परिवर्तन) न हो
(ख) जो खर्च हो जाए
(ग) जो बदलता रहे
(घ) जिसका अर्थ न हो
उत्तर: (क)
13. “जी हाँ! मैं कल आऊँगा।” में ‘जी हाँ’ कौन-सा अव्यय है?
(क) संबोधनबोधक
(ख) स्वीकारबोधक
(ग) शोकबोधक
(घ) आश्चर्यबोधक
उत्तर: (ख)
14. “धिक्कार है! तुम जैसे इंसान पर।” में ‘धिक्कार’ क्या दर्शाता है?
(क) घृणा/तिरस्कार
(ख) प्यार
(ग) आश्चर्य
(घ) आशीर्वाद
उत्तर: (क)
15. “ओह! बहुत दर्द हो रहा है।” में ‘ओह’ किस प्रकार का अव्यय है?
(क) हर्षबोधक
(ख) शोकबोधक
(ग) विदाबोधक
(घ) स्वीकारबोधक
उत्तर: (ख)
16. ‘विस्मयादिबोधक अव्यय’ वाक्य के किस भाग में प्रायः आते हैं?
(क) अंत में
(ख) मध्य में
(ग) प्रारंभ में
(घ) कहीं भी
उत्तर: (ग)
17. “सावधान! आगे गहरा गड्ढा है।” में ‘सावधान’ क्या है?
(क) संबोधन
(ख) चेतावनी
(ग) स्वीकृति
(घ) तिरस्कार
उत्तर: (ख)
18. “क्या! वह फेल हो गया?” वाक्य में ‘क्या’ कौन-सा भाव प्रकट कर रहा है?
(क) आश्चर्य
(ख) हर्ष
(ग) घृणा
(घ) भय
उत्तर: (क)
19. “उफ़! कितनी गर्मी है।” में ‘उफ़’ क्या प्रकट करता है?
(क) प्रसन्नता
(ख) व्यथा/परेशानी
(ग) आशीर्वाद
(घ) संबोधन
उत्तर: (ख)
20. “राम-राम! यह क्या अनर्थ हो गया।” में ‘राम-राम’ कैसा अव्यय है?
(क) शोकबोधक
(ख) स्वीकारबोधक
(ग) विदाबोधक
(घ) हर्षबोधक
उत्तर: (क)
21. “ठीक! तुम जा सकते हो।” में ‘ठीक’ क्या है?
(क) अस्वीकृति
(ख) स्वीकृति
(ग) घृणा
(घ) भय
उत्तर: (ख)
22. “बचाओ-बचाओ! घर में चोर घुस आए हैं।” में कौन-सा भाव है?
(क) भय
(ख) हर्ष
(ग) विदा
(घ) आश्चर्य
उत्तर: (क)
23. “वाह! क्या सुंदर दृश्य है।” यहाँ ‘वाह’ है—
(क) क्रिया
(ख) संज्ञा
(ग) विस्मयादिबोधक अव्यय
(घ) सर्वनाम
उत्तर: (ग)
24. “हट! मेरे रास्ते से हट जा।” में ‘हट’ क्या प्रकट करता है?
(क) प्यार
(ख) तिरस्कार
(ग) आशीर्वाद
(घ) शोक
उत्तर: (ख)
25. “सुखी रहो! सदा सफल बनो।” में ‘सुखी रहो’ क्या है?
(क) आशीर्वाद
(ख) चेतावनी
(ग) आश्चर्य
(घ) घृणा
उत्तर: (क)
विस्मयादिबोधक अव्यय: वस्तुनिष्ठ प्रश्न (26-50)
26. “अरे! तुम कब आए?” वाक्य में ‘अरे’ किस प्रकार का अव्यय है?
(क) शोकबोधक
(ख) आश्चर्यबोधक
(ग) स्वीकारबोधक
(घ) संबोधनबोधक
उत्तर: (ख)
27. “धत्! सारा मज़ा किरकिरा कर दिया।” इस वाक्य में ‘धत्’ क्या प्रकट करता है?
(क) घृणा
(ख) तिरस्कार/खीझ
(ग) भय
(घ) आशीर्वाद
उत्तर: (ख)
28. “जी! मैं अभी काम पूरा करता हूँ।” में ‘जी’ किस कोटि का अव्यय है?
(क) स्वीकारबोधक
(ख) हर्षबोधक
(ग) विदाबोधक
(घ) शोकबोधक
उत्तर: (क)
29. “ओ माँ! कितना खून बह रहा है।” यहाँ ‘ओ माँ’ क्या दर्शाता है?
(क) प्रसन्नता
(ख) भय और पीड़ा
(ग) संबोधन
(घ) चेतावनी
उत्तर: (ख)
30. “धन्य! प्रभु आपकी माया।” वाक्य में ‘धन्य’ शब्द का भाव क्या है?
(क) आश्चर्य
(ख) हर्ष/प्रशंसा
(ग) शोक
(घ) घृणा
उत्तर: (ख)
31. “अबे! तू क्या कर रहा है?” यहाँ ‘अबे’ किस प्रकार का संबोधन है?
(क) आदरसूचक
(ख) तिरस्कारपूर्ण/अशिष्ट संबोधन
(ग) प्रेमपूर्वक
(घ) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (ख)
32. “चुप! एक शब्द भी मत बोलना।” में ‘चुप’ क्या प्रकट करता है?
(क) हर्ष
(ख) निषेध/तिरस्कार
(ग) आशीर्वाद
(घ) भय
उत्तर: (ख)
33. “अरी! तुम कहाँ जा रही हो?” में ‘अरी’ का प्रयोग किसके लिए किया गया है?
(क) पुल्लिंग संबोधन
(ख) स्त्रीलिंग संबोधन
(ग) पशुओं के लिए
(घ) निर्जीव वस्तुओं के लिए
उत्तर: (ख)
34. “जय हो! सत्य की ही जीत होती है।” में ‘जय हो’ कैसा भाव है?
(क) शोकबोधक
(ख) हर्षबोधक/उल्लास
(ग) घृणाबोधक
(घ) भयबोधक
उत्तर: (ख)
35. “बचो! ऊपर से पत्थर गिर रहे हैं।” में ‘बचो’ किस श्रेणी का अव्यय है?
(क) चेतावनीबोधक
(ख) विदाबोधक
(ग) स्वीकारबोधक
(घ) हर्षबोधक
उत्तर: (क)
36. ‘अच्छा!’ शब्द आश्चर्य के रूप में कब प्रयुक्त होता है?
(क) जब किसी का तिरस्कार करना हो
(ख) जब कोई अनहोनी या नई बात सुनी जाए
(ग) जब विदा लेनी हो
(घ) जब किसी को डराना हो
उत्तर: (ख)
37. “हा-हा! यह कैसा अनर्थ हो गया।” में ‘हा-हा’ क्या प्रकट करता है?
(क) हँसी
(ख) अत्यधिक शोक/दुःख
(ग) आश्चर्य
(घ) घृणा
उत्तर: (ख)
38. “सलाम! क्या हाल-चाल हैं?” में ‘सलाम’ किस प्रकार का अव्यय है?
(क) संबोधन/अभिवादन
(ख) भयबोधक
(ग) आशीर्वादबोधक
(घ) तिरस्कारबोधक
उत्तर: (क)
39. “त्राहि-त्राहि! चारों ओर हाहाकार मचा है।” में ‘त्राहि-त्राहि’ क्या दर्शाता है?
(क) अत्यधिक प्रसन्नता
(ख) अत्यधिक भय या व्याकुलता
(ग) प्रशंसा
(घ) विदाई
उत्तर: (ख)
40. “अवश्य! मैं तुम्हारे साथ चलूँगा।” में ‘अवश्य’ किस भेद के अंतर्गत आता है?
(क) संबोधनबोधक
(ख) अनुमोदनबोधक/स्वीकृति
(ग) शोकबोधक
(घ) घृणाबोधक
उत्तर: (ख)
41. “बहुत अच्छा! आपने बिल्कुल सही कहा।” में ‘बहुत अच्छा’ क्या प्रकट करता है?
(क) भय
(ख) हर्ष/अनुमोदन
(ग) तिरस्कार
(घ) शोक
उत्तर: (ख)
42. विदाबोधक अव्यय “टा-टा!” का प्रयोग कब किया जाता है?
(क) किसी को बुलाते समय
(ख) विदा लेते समय
(ग) डरते समय
(घ) आशीर्वाद देते समय
उत्तर: (ख)
43. “खबरदार! जो पैर आगे बढ़ाया।” वाक्य में ‘खबरदार’ का अर्थ है?
(क) सचेत करना/धमकाना
(ख) प्यार करना
(ग) विदा करना
(घ) हँसाना
उत्तर: (क)
44. “आहा!” का विलोम भाव प्रकट करने वाला अव्यय कौन-सा है?
(क) वाह!
(ख) हाय!
(ग) शाबाश!
(घ) ठीक!
उत्तर: (ख)
45. “हे राम! मुझे शक्ति दो।” यहाँ ‘हे राम’ प्रार्थना के अलावा क्या प्रकट कर सकता है?
(क) घृणा
(ख) दुख या विस्मय
(ग) चेतावनी
(घ) तिरस्कार
उत्तर: (ख)
46. “सच! क्या भारत मैच जीत गया?” यहाँ ‘सच’ का प्रयोग किसलिए हुआ है?
(क) आश्चर्यचकित होने पर
(ख) झूठ बोलने पर
(ग) आशीर्वाद देने पर
(घ) विदा लेने पर
उत्तर: (क)
47. ‘जी’ शब्द आदरसूचक होने के साथ-साथ और क्या है?
(क) शोकबोधक
(ख) स्वीकारबोधक
(ग) भयबोधक
(घ) तिरस्कारबोधक
उत्तर: (ख)
48. विस्मयादिबोधक अव्यय “धिक्!” किस भाषा के शब्द से प्रेरित है?
(क) उर्दू
(ख) संस्कृत
(ग) अंग्रेजी
(घ) फारसी
उत्तर: (ख)
49. “हटो! पीछे हटो।” में ‘हटो’ क्या है?
(क) स्वीकारबोधक
(ख) चेतावनी/संबोधन
(ग) आशीर्वाद
(घ) शोकबोधक
उत्तर: (ख)
50. “शाबाश!” मूलतः किस भाषा का शब्द है जो हिंदी में विस्मयादिबोधक अव्यय की तरह प्रयुक्त होता है?
(क) अरबी
(ख) फारसी
(ग) तुर्की
(घ) संस्कृत
उत्तर: (ख)
विस्मयादिबोधक अव्यय किसे कहते हैं?
जिन अव्यय शब्दों से हर्ष, शोक, विस्मय, घृणा, लज्जा आदि भाव प्रकट होते हैं, उन्हें विस्मयादिबोधक अव्यय कहते हैं। इनका वाक्य के अन्य शब्दों से कोई व्याकरणिक संबंध नहीं होता।
विस्मयादिबोधक अव्यय के कितने भेद होते हैं?
मुख्य रूप से इसके 10 भेद माने जाते हैं: हर्षबोधक, शोकबोधक, आश्चर्यबोधक, तिरस्कारबोधक, स्वीकारबोधक, संबोधनबोधक, भयबोधक, आशीर्वादबोधक, अनुमोदनबोधक और विदाबोधक।
क्या विस्मयादिबोधक शब्दों का रूप बदलता है?
नहीं, चूँकि ये ‘अव्यय’ (अविकारी) शब्द हैं, इसलिए लिंग, वचन, कारक या काल के बदलने पर भी इनका रूप कभी नहीं बदलता।
विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग कहाँ किया जाता है?
विस्मयादिबोधक चिह्न का प्रयोग हमेशा विस्मयादिबोधक शब्द के ठीक बाद किया जाता है, जैसे— अरे! तुम कब आए?
क्या संज्ञा या विशेषण शब्द भी विस्मयादिबोधक हो सकते हैं?
हाँ, कभी-कभी संज्ञा (जैसे: राम-राम!), विशेषण (जैसे: सुंदर!) और क्रिया (जैसे: देख!) शब्दों का प्रयोग भी मन के तीव्र भावों को प्रकट करने के लिए विस्मयादिबोधक के रूप में किया जाता है।
‘वाह-वाह’ और ‘छी-छी’ में क्या अंतर है?
‘वाह-वाह’ एक हर्षबोधक अव्यय है जो खुशी या प्रशंसा के लिए उपयोग होता है, जबकि ‘छी-छी’ एक तिरस्कारबोधक अव्यय है जो घृणा या नफरत प्रकट करने के लिए उपयोग होता है।
विस्मयादिबोधक अव्यय को पहचानने का सबसे आसान तरीका क्या है?
इसकी पहचान के दो मुख्य तरीके हैं:
शब्द के बाद लगा विस्मयादिबोधक चिह्न (!)।
शब्द का वाक्य के शुरू में होना और उसका वाक्य की क्रिया से कोई सीधा संबंध न होना।
संबोधन और विस्मयादिबोधक में क्या समानता है?
संबोधन कारक और विस्मयादिबोधक अव्यय दोनों में ही किसी को पुकारने या ध्यान आकर्षित करने के लिए शब्दों का प्रयोग होता है और दोनों के साथ विस्मयादिबोधक चिह्न (!) लगाया जाता है।
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